चल मल अगाढ़ | Chal Mal Aghadh

चल-मल-अगाढ़ दोष क्या है ?

उत्तर :

तत्त्वार्थ श्रद्धान में चल, मल, अगाढ़ रूप दोष उत्पन्न करना मात्र ही सम्यक्त्व प्रकृति का व्यापार है। वे इस प्रकार हैं-

  1. चल दोष आप्त, आगम, पदार्थ संबंधी श्रद्धान के विशेष में चंचल होना, चल दोष है; जैसे अपने बनाये गये जिनमंदिर, अरहंत, प्रतिबिंब आदि में ऐसी कल्पना होना कि यह मेरा मंदिर है, ये मेरे देव हैं तथा दूसरों द्वारा बनाये गये जिनमंदिर, देव आदि में ऐसा भाव होना कि यह उनका मंदिर है, उनके देव हैं इत्यादि चल दोष हैं; क्योंकि सभी जिनमंदिर, जिन प्रतिबिंब एक समान ही हैं; अतः उनमें अपने पराए का भेद करना उचित नहीं है।

जैसे-जल में अनेक प्रकार की लहरें उत्पन्न होने से जल अनेक प्रकार का दिखाई देता है; उसी प्रकार दर्शन-मोहनीय के एक भेद सम्यक्त्व प्रकृति का उदय होने से आप्त, आगम, पदार्थ संबंधी श्रद्धान अनेक प्रकार का दिखाई देता है; परंतु जैसे जल एक जल ही रहता है; उसी प्रकार इसमें वीतरागी आप्त, आगम, सत्य पदार्थों का ही श्रद्धान रहता है; अन्य कुदेवादि का उपासक वह कभी भी नहीं होता है; अतः सम्यक्त्व सुरक्षित रहता है।

  1. मल दोष :- सम्यक्त्व प्रकृति के उदय में तत्त्वार्थ का श्रद्धान निर्मल नहीं होता है। उसमें अतिचार रूप शंकादि दोष हो जाते हैं; जैसे शुद्ध सोना अन्य बाह्य वस्तुओं के संयोग से मलिन हो जाता है; उसी प्रकार वेदक सम्यक्त्व में शंकादि मलरूप अतिचार लगते हैं

  2. अगाढ़ दोष :- अपने आप्त, आगम, पदार्थ में श्रद्धान होने पर भी सम्यक्त्व प्रकृति के उदय में उसमें प्रगाढ़ता नहीं होती है। जैसे सभी अरहंत भगवान् अनंत शक्ति संपन्न, एक समान होने पर भी इस जीव को ऐसा लगता है कि पाप कर्म की शांति करने में शांतिनाथ भगवान् समर्थ हैं; इस विघ्न को नष्ट करने में पार्श्वनाथ भगवान् समर्थ हैं इत्यादि प्रकार से श्रद्धा में शिथिलता होना, अगाढ़ दोष है। जैसे वृद्ध पुरुष के हाथ की लाठी छूटती तो नहीं है; परंतु शिथिलता के कारण कम्पित रहती है; उसी प्रकार क्षायोपशमिक सम्यग्दृष्टि शांति आदि कार्य-हेतु कुदेवादि की सेवा आदि तो नहीं करता है; परंतु अपने आस, आगम, पदार्थ संबंधी श्रद्धान में शिथिलता रहती है।

मल को उत्पन्न करने में कारणभूत सम्यक्त्व प्रकृति के उदय का अभाव होने से औपशमिक और क्षायिक सम्यक्त्व में ये दोष नहीं होते हैं। वे दोनों अतिनिर्मल हैं।

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