चाहे औखयारा
Notes
चाहे अंधियारा हो, या दूर किनारा हो,
आवाज हमें देना, हम दौड़े आयेंगे ॥
चाहे गर्मी सरदी हो,
या बिजली चमकी हो
आवाज हमें देना,
हम दौड़े आयेंगे ॥
चाहे अंधियारा…
हम मंदिर जायेंगे, हम पूजा रचायेंगे,
जिनवाणी सुनने को, हम दौड़े आयेंगे ॥
चाहे अंधियारा…
हम शिविर लगायेंगे,
ज्ञान बढ़ायेंगे,
जिनवाणी पढ़ने को,
हम दौड़े आयेंगे ॥
चाहे अंधियारा…
हम मुनि बन जायेंगे, निज ध्यान लगायेंगे,
आवाज नहीं देना, हम कभी नहीं आयेंगे ॥
चाहे अंधियारा…
हम मुक्त पायेंगे
हम सिद्ध बन जायेंगे,
आवाज नहीं देना,
हम कभी नहीं आयेंगे ॥
चाहे अंधियारा
Notes
आँखों से न देखी जाये, कानों से न सुनी जाये,
जिनवाणी ये घटना, जो घर में धरा है,
तो कैसा ये समाज जो, विकास गीत गाता है
फूल जैसी जिन्दगी को, आग में जलाता है
क्या जमाना आ गया है आत्मा -
गाय हमारी माता है, हमको उलझे भाता है
भूख विदेश में, जाता है क्या ये हमको भाता है
तो कैसे ये हत्यारे है जो प्यार से कमाते है
फूल जैसी जिन्दगी को, आग में जलाता है
क्या जमाना आ गया है आत्मा -
मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है
हाथ लगाओ डर जायेगी, बाहर निकालो मर जायेगी
तो कैसे मनुहार है, जो जाल में फंसाते है
फूल जैसी जिन्दगी को, आग में जलाते है?
क्या जमाना आ गया है आत्मा -
काव्य
गुड़गुड़ एक लड्डू को पाकर,
रोने लगा कोने में जाकर।
मेरा लड्डू छोटा भाई
बड़ा मिले तो खाऊँ भाई।
तब तक उसने लड्डू खाया,
कोने में एक बिच्छू आया।
डंक लगा तो रोया गुड़गुड़,
चूहे खा गये उनका लड्डू।
तब गुड़गुड़ ने सौगन्ध खाई,
हठ न करेंगे कभी भी भाई।
हम सब ने भी सौगन्ध खाई,
हठ न करेंगे कभी भाई।।
हम नन्हें मुन्ने बच्चे हैं
दाँत हमारे कच्चे हैं।
झूठ कभी ना बोलेंगे
दिल ना किसी का दुखाएँगे।
जिनदर्शन को जाएँगे
निज स्वभाव को पाएँगे।
अब तो जल्दी करेंगे
हम तो मुनि बनेंगे।
चिड़िया सुन ले कुट-कुट-कुट।
तू भी खाले ये बिस्कुट।।
भूख लगी है खाले तू।
खाकर ही उड़ जाना तू।।
बिस्कुट मैं ना खाती हूँ।
दाना पानी पीती हूँ।।
बिस्कुट है बाज़ार के।
घर में बनाओ प्यार से।।
बड़े प्यार से खाऊँगी।
वरना भूखी रह जाऊँगी।।
काव्य
तन-मन उठता ठाँव खराब - अण्डा, मछली, माँस, शराब।
शाकाहारी रहते स्वस्थ - चिर जीवी निर्भय अवस्था।
सभी धामों का यह है कहना - कभी किसी को दुःख मत देना।
लम्बी आयु निरोगी काया - शाकाहारी की सच्ची माया।
राम कृष्ण का यह संदेश - शाकाहार हरेगा क्लेश।
ऋषि मुनियों का कहना है - शाकाहारी रहना है।
राम राज्य लाना है - माँसाहार हटाना है।
धर्म ध्वज फहराना है - शाकाहार अपनाना है।
सत्य अहिंसा का आधार - शाकाहार शाकाहार।
हमें प्रकृति का है वरदान - शाकाहार शाकाहार।
जैसा खावें अन्न - वैसा होवे मन।
नारे
एक दो एक दो - पेप्सी की बोतल फोड़ दो।
एक छक्का और दो - चॉकलेट खाना छोड़ दो।
छोड़ दो भाई छोड़ दो - रात का भोजन छोड़ दो।
जनम-जनम-जनम आ - रागम-रागम-रागम जा।
जैसा सिंह वैसा मैं - मोहे अड़ाओ फुर-फुर-फुर।
टी.वी. रेडियो ने क्या लिया - सबका सत्यानाश किया।
हाय-हेलो छोड़िये - जय जिनेन्द्र बोलिये।
सब धर्मों से न्यारा है - जैनधर्म हमारा है।
उल्लिखित मिथ्याज्ञान है - शिक्षण क्रिकि महान है।
अरुण-चरणन दड़ी चराडा - मिथ्याज्ञान का छोड़ो फराडा।
हम बच्चों की यही पुकार - शिक्षण क्रिकि लगे बार-बार।
नोट्स
टन-टन-टन-टन-टारा - जैन धर्म का बजे नगाड़ा।
जैन धर्म किसका है - जो पाले उसका है।
अहिंसा वाणी जिंदाबाद - जिंदाबाद-जिंदाबाद।
जंगल में साँप है - रात में खाना पाप है।
हम सब है किसकी संतान - वीर प्रभु की हम संतान।
अण्डा है इस माँ का लाला - मत समझो खाने का माल।
विश्व शान्त का यह आधार - भोजन करना शाकाहार।
मानवता का करते नाश - अण्डा, मछली, मदिरा माँस।
वेद पुराण और गीता सार - शाकाहार शुद्ध आहार।
विश्व शान्ति का यह आधार - भोजन करना शाकाहार।
सबसे मैत्री सबका ध्यान - शाकाहारी की पहचान।
काव्य
जीवन में हम कभी न भूलें, पंच प्रभु भगवान को
बड़े जनों का आदर करना,
मात-पिता को शीश नवाना।
कार्य सदा ऐसा ही होवे
जीवन में सन्मान हो ॥ 1 ॥
जीवन में हम कभी …
जिनवाणी की बात को सुनेंगे,
पाप भाव से दूर रहेंगे।
सत्य मार्ग पर चलें सदा ही,
मुक्तिपुरी विश्राम हो ॥ 2 ॥
जीवन में हम कभी …
जिनवर दर्शन रोज करेंगे,
सदाचार से सदा रहेंगे।
सत्य अहिंसामय हो जीवन,
यही हमारी शान हो ॥ 3 ॥
जीवन में हम कभी
काव्य
जय जिनेंद्र जय जिनेंद्र जय जिनेंद्र बोलिये।
जय जिनेंद्र की ध्वनि से अपना मौन खोलिये ॥ 1 ॥
जय जिनेंद्र ही हमारा एक मंत्र हो।
जय जिनेंद्र बोलने से हर मनुज स्वतन्त्र हो
जय जिनेंद्र बोलकर अपना मौन खोलिये ॥ 2 ॥
जय जिनेंद्र …
पाप छोड़ धर्म जोड़ यह जिनेंद्र देशना।
अष्ट कर्म को मरोड़, यह जिनेंद्र देशना ॥
जाग जाग जाग चेतन बहु काल सो लिये ॥ 3 ॥
जय जिनेंद्र …
हे जिनेंद्र ज्ञान दो, मोक्ष का वरदान दो।
कर रहे हम प्रार्थना, तुम प्रार्थना पर ध्यान दो।
जय जिनेंद्र बोलकर, बोल हृदय के द्वार खोलिये ॥ 4 ॥
जय जिनेंद्र …
काव्य
शहद अरे क्यों खाते हो ?
कितना पाप कमाते हो ?
यह मक्खी का थूक है,
तुमको लगता जूस है।
कितनी मक्खी मर जातीं,
अग्नि में ही जल जातीं।
मत खाना मानो तुम सीख,
ताली बजाओ हो गई जीत ॥
काव्य
पापा गये थे बाजार,
वहाँ से लाये थे बाजार।
अचार में दिख गई इल्ली,
हंस रही मौसी बिल्ली।
मम्मी गाती गाना,
अचार कभी नहीं खाना ॥
जिनधर्म के नारे
- पुण्य-पाप तो कर्म हैं - वीतरागता धर्म है।
- राग-द्वेष तो कर्म हैं - वीतरागता धर्म है।
- ज्ञाता-दृष्टा आत्मा - बन जाओ परमात्मा।
- कुन्दकुन्द ने क्या दिया - भगवान आत्मा बता दिया।
- मिथ्यात्व से क्या किया - भव सागर में डाल दिया।
- जिनवाणी ने क्या दिया - शुद्धात्म दिखला दिया।
- त्रिशलानन्दन वीर की - जय बोलो महावीर की।
- आत्म करता कौन खराब - राग-द्वेष और मिथ्यात्व
- मानव जीवन की पहचान - जिनदर्शन कर आत्म जान।
- इस जीवन का क्या उद्देश्य - सम्यग्दर्शन प्राप्त करो।
- सबसे प्यारे - मुनि हमारे।
- वीतरागता पूज्य है - वीतरागता धर्म है।
- घर-घर से निकले आवाज - सत्य अहिंसा जिन्दाबाद।
- रत्नत्रय की एकता - मोक्ष मार्ग की विशेषता।
- जय हो सब अरहन्तों की - वीतरागी मुनि सन्तों की।
- सम्यक्त्व ने क्या किया - भव सागर से बचा लिया।
- मानव भव की एक सफलता - सम्यग्दर्शन प्राप्त करें।
- जिनवाणी का मर्म है - वस्तु स्वभाव धर्म है।
- चिदानन्द ध्रुवधाम की - जय हो सिद्ध भगवान की।
- जैन धर्म किसका है - जो पाले सो उसका है।
- मिथ्यातम की क्या पहचान - देह आत्मा एक ही जान।
- महावीर का क्या संदेश - जियो और जीने दो।
- कहान गुरु का क्या संदेश - तेरी सत्ता जग में एक।
- महावीर के संदेशों को - जीवन में अपनायेंगे।
- कैसा हो अपना आचार - सादा जीवन उच्च विचार।
- वीर जिनेश्वर प्यारा है - चैतन्य सरोवर न्यारा है।
- वीर जिनेश्वर जहाँ-जहाँ - दिव्य ध्वनि वहाँ-वहाँ।
- बच्चे मिलकर करें पुकार - समयसार की जय जयकार।
- ज्ञाता दृष्टा आत्मा - बन जाये परमात्मा।
- One two three four - No Sole more and more.
- Five six seven eight - Open now Moksha Gate.
- Nine ten elevan twelve - Bhagvan Atma my self.
- Thirteen fourteen fifteen sixteen - My sole Ever Green.
मूल दस्तावेज़ (PDF): 3019.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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