बालसभा भाग-१
— यह ग्रंथ का अंश है; पूर्ण ग्रंथ नीचे संलग्न PDF में उपलब्ध है —
पाठशाला के लिए उपयोगी
बालसभा
भाग-1
प्रकाशक
धर्मोदय परीक्षा बोर्ड
सागर (म.प्र.)
दो शब्द
रात्रिकाल में चलने वाली पाठशाला में सप्ताह के एक दिन बच्चों के मनोरंजन के लिये बालसभा का आयोजन किया जाता है। बालसभा के आयोजन हेतु एक ऐसे संकलन की माँग होती रही है, जिसमें मनोरंजन के साथ उनमें धर्मिक संस्कार, ज्ञान-विज्ञान का भी विकास हो। तभी किया बालसभा भाग-1 पुस्तक का संकलन।
इसमें सर्वप्रथम बालसभा का आयोजन कैसे करें इसकी विधि पश्चात् हमारी पाठशाला है गीत, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को नमोऽस्तु, बड़ा ही महत्त्व है, बड़ा ही अन्तर, अष्टक, 37 गद्य-पाठ, 202 चुटकुले, इनकी जिंदगी आपका फैशन, 117 मुक्तक, 27 काव्य-पाठ, 100 लौकिक पहेली, 24 खेल, सामान्य ज्ञान एवं नियमावली है।
इस पुस्तक में जिन मुनिराजों, आर्यिकाओं, त्यागी वृत्तियों, ब्रह्मचारी भाईयों एवं विद्वान गृहस्थ श्रावकों को रचनाओं का समावेश किया गया है। उन सबके प्रति मैं अपने हृदय के गहनतम तल से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ।
इस पुस्तक के प्रकाशन में गुना के श्रावक श्री अनिलकुमार जी जैन खेरा को धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ जिन्होंने अर्थ सहयोग प्रदान किया।
बालसभा आयोजन
- बालसभा शनिवार अथवा अन्य किसी अनुकूल दिवस में आयोजित करें।
- सामूहिक सभी कक्षाओं के एक साथ आयोजित करने हेतु आवश्यक सामग्री एवं व्यवस्था-सभा संचालक, दो माईक, सभा का अध्यक्ष बनाना, पुरस्कार वितरण हेतु मुख्य अतिथि।
- बालसभा प्रारम्भ करने के पूर्व मंगलाचरण, दीपप्रज्जवलन, अध्यक्ष, मुख्यअतिथि की घोषणा एवं सम्मान आदि करें।
- बालसभा की पूर्व तैयारी एवं प्रक्रिया- एक दिन पूर्व ही प्रत्येक कक्षाओं में से बच्चों के नाम लिख लें जो बोलना चाहते हों। (संभव हो तो बच्चों को पूर्व से (भजन, कहानियाँ, संस्मरण हास्य प्रसंग, काव्यपाठ आदि) तैयारी करवावें।
- बालसभा में सभी कक्षाओं के अनुसार पृथक् छोटे-छोटे डब्बों में बच्चों के नाम की चिट रख एवं चिट निकलने पर जिन बच्चों का नाम आवे उसे बुलवा लेवें।
- पुरस्कार दो प्रकार के सामान्य एवं विशेष रखें अथवा कक्षाओं की श्रेष्ठता के अनुरूप भी संयोजित कर सकते हैं। बच्चों की सामान्य प्रस्तुति में सामान्य अथवा अच्छी प्रस्तुति विशेष पुरस्कार देवें। प्रश्नमंच हेतु 10 पुरस्कार अलग से देवें।
- यह घोषणा पहले ही कर दें कि साम 15 अथवा 20 बच्चे अथवा (समय सीमा 1 घंटा आदि में) जिनका पहले नम्बर आवेगा उन्हें मंच पर प्रस्तुति देने का मौका मिलेगा। अथवा शेष नाम अगली बालसभा के लिये सुरक्षित रखे जायेंगे।
- प्रत्येक वर्ग से 1-1 बच्चे की प्रस्तुति होने पर प्रथम राउण्ड पूर्ण कर सभी बच्चों से प्रश्न / पहेली आदि पूछें तथा उत्तर देने वालों को पुरस्कृत करें।
- मंच पर पुरस्कार पाने वाले बच्चों का सामान्य साक्षात्कार लें। जैसे-आपका नाम, माता-पिता का नाम, शिक्षा, व्यापार, आवास कहाँ, आपका लक्ष्य, पसंदीदा खेल, भोजन, वस्त्र, क्षेत्र वंदना आदि।
विशेष-
- सही उत्तर आने पर भी चाहें तो और भी अन्य बच्चों से पूछें, जिससे आत्मविश्वास का पता चलता है और अंत में जिसने सबसे पहले सही बताया है, उसे पुरस्कृत करें। एवं बच्चे द्वारा बताये गये उत्तर का पुनः माइक से सबके सामने व्याख्यान करें।
जैसे- 24 वें तीर्थंकर कौन हैं उत्तर- भगवान महावीर।
संचालक- आप सभी जानते हैं जो संसार से पार लगाते हैं, वे तीर्थंकर कहलाते हैं, तीर्थंकर 24 होते हैं। उनमें अंतिम तीर्थंकर का नाम आया है भगवान् महावीर जो बिल्कुल सही है। गलत उत्तर आने पर उत्तर सही नहीं है ऐसा भी कह सकते हैं। यदि कोई न बता पावे तो आप स्वयं उस प्रश्न का उत्तर व्याख्यान सहित बतावें। अथवा अगली बालसभा में लिये प्रश्न सुरक्षित रख तथा बच्चों से खोज कर लाने के लिये कहें। - शोर होने पर जयकारा लगावें ओम् शांति अथवा भजन की दो, चार पंक्तियाँ बोलकर माहौल बनायें। अथवा एक अंगुली मुख पर रखकर दूसरा हाथ उठाने को कहें। सभी बच्चों के शांत बैठने पर प्रश्न पूछें।
- प्रथम आदि राउन्ड के बाद पाठशाला शिक्षकों को भी प्रस्तुति हेतु आमंत्रित करें। एवं सुनाई गई कहानी आदि में से भी प्रश्न पूछें। जिससे बच्चे ध्यान पूर्वक सुन सकें।
- संचालक बीच-बीच में मुद्रक, भजन, हास्य प्रयोग आदि का भी प्रयोग करें, जिससे माहौल आकर्षक बना रहे। तथा पाठशाला बच्चों के अतिरिक्त सभा में बैठे अन्य महिलायें व पुरुषों से भी प्रश्न पूछें, जिससे कि बालसभा वृहत् रूप ले सके।
- बालसभा के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन, आभार प्रदर्शन करें।
हमारी पाठशाला है
हमें आचरण सिखलाती — हमारी पाठशाला है।
हमें व्यवहार सिखलाती — हमारी पाठशाला है।
हमें मंदिर बुलाती — हमारी पाठशाला है।
प्रभु दर्शन दिलाती — हमारी पाठशाला है।
छना पानी सदा पीना — सिखाती पाठशाला है।
कभी ना रात को खाना — सिखाती पाठशाला है।
प्याज, आलू नहीं खाना — सिखाती पाठशाला है।
ना होटल में कभी जाना — सिखाती पाठशाला है।
सदा आदर विनय करना — सिखाती पाठशाला है।
चरण छूकर नमन करना — सिखाती पाठशाला है।
पिता-माता की सेवा करना — सिखाती पाठशाला है।
कभी आपस में ना लड़ना — सिखाती पाठशाला है।
कभी अभिमान ना करना — सिखाती पाठशाला है।
सदा पापों से तुम डरना — सिखाती पाठशाला है।
बुरी आदत ना तुम लाना — सिखाती पाठशाला है।
मिले अच्छाई जो पाना — सिखाती पाठशाला है।
धर्म पालो सदा अपना — सिखाती पाठशाला है।
हमें णमोकार है जपना — सिखाती पाठशाला है।
बड़ी सद्भावना पर कैसे — सिखाती पाठशाला है।
सही जैनी बनें कैसे — सिखाती पाठशाला है।
सदाचारी सदा बनना — सिखाती पाठशाला है।
कभी निंदा नहीं करना — सिखाती पाठशाला है।
कभी चुगली नहीं करना — सिखाती पाठशाला है।
जिनवाणी को नित पढ़ना — सिखाती पाठशाला है।
ज्ञान आगम के तुम गाना — सिखाती पाठशाला है।
कभी हिंसा नहीं करना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
कभी ना झूठ तुम कहना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
ना चोरी तुम कभी करना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
बुरी दृष्टि ना तुम रखना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
ना आसक्ति अधिक रखना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
देवपूजा सदा करना — बताती पाठशाला है।
गुरु सेवा में नित रहना — बताती पाठशाला है।
करो स्वाध्याय नित ही तुम — बताती पाठशाला है।
रहे संयम से जीवन में — बताती पाठशाला है।
करें तप हो सुखी जीवन — बताती पाठशाला है।
करें हम दान नित-प्रतिदिन — बताती पाठशाला है।
जहाँ सद्ज्ञान है मिलता — हमारी पाठशाला है।
जहाँ सन्मान है मिलता — हमारी पाठशाला है।
सभी को लगती है प्यारी — हमारी पाठशाला है।
कभी ना भूलना इसको — ये प्यारी पाठशाला है।
बड़े उपकार हैं इसके — ये प्यारी पाठशाला है।
हमारी पाठशाला है, हमारी पाठशाला है।
आचार्य श्री जी को नमोस्तु
माई सोल्ड, इबो मत लगाओ डुबकी, चेतना के गहरा में, तोता क्यों रोता, नर्मदा का नरम कंकड़, प्रवचन पारिजात, प्रवचन प्रमेय, सागर बूंद समय, सागर मंथन, चेतन का भोग ब्रह्मचर्य, समय, जैन गीता, मुनीति शतक, स्तुति शतक कितनी ऐसी ही कृतियाँ महान् आत्मा के द्वारा हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड़, मराठी, बंगाली, संस्कृत भाषा में लिखी गयीं। जो इस भीड़ भरे संसार में आत्म उन्नति के लिए अति उत्तम हैं, मगर वो मुक्तामयी महाकाव्य जिस महाकाव्य की तुलना बड़े-बड़े विद्वानों ने इंटरनेशनल पोएट मिल्टन की पैराडाइज लॉस्ट, प्रसाद की कामायनी, बाल्मीकी की रामायण, कालीदास की मेघदूत और रघुवंश से जिस मुक्तामयी की तुलना की ऐसी मुक्तामयी के लेखक, रचयिता, समाधि सम्राट, समाटो के सम्राट, विश्ववंदनीय, प्रातः स्मरणीय मौन के साधक, महान् तत्ववेत्ता, ज्योतिपुंज, युगप्रहरी, संयम के सूर्य, जिनशासन-शिरोमणि, तेजोमय नक्षत्र, सद्गुण रत्न, स्वाध्याय-प्रिय, शोधबोधि पथिक, क्षमाधर, परोपकार परायण, विवेक दर्पण, अर्हत्नीति, उन्नायक, कीर्ति निकुंज, विमल विचारक, भव्यजन दुःखभंजक, जैन आगम निधि संरक्षक, बोधि वृक्ष, मुक्तिदुदु, सरस्वती कंठाभरण, संस्कृत सरोज सरोवर, दिव्य विभूति, भव्यांबु पारगामी, जिनराग जिन सिन्धु, जिनवरगुणानुगामी, वरिष्ठ विद्वान, गणनायक, वाङ्मय वारिधि, अध्यात्मोन्मुखी, सिद्धाख्याता, सिद्धीसोपान, शास्त्रार्थ निपुण, ऊर्जा के केन्द्र, स्वस्थ परम्परा सम्पोपक, प्रभापुञ्ज, अनेकान्त विवेचक, जिनशासनसेवी, हृदयहारी, कलिकाल सर्वज्ञ, महामनीषी, समाधिसदन, अप्रमत्त विहारी, उद्दामनः हितचिन्तक सरस व्याख्याकार, शब्दशिल्पी, मननशील, मधुरभाषी, सौम्य स्वभावो, सद् संस्कार संजीवक, अमृत पुरुष दृढ़प्रतिज्ञ, आनन्दघन, श्रमनिष्ट दिगम्बराचार्य संयमाचार्य जैनाचार्य वाणीभूषण संत शिरोमणि, चारित्र शिरोमणि, आचार्यों के आचार्य, चारित्र चक्रवर्ती आचार्य, महावीर के लक्ष्मनन, कुन्दकुन्द गुरु के कुन्दन, ऋषिवर, मुनिवर, गुरुवर, आचार्यवर, हंसवत् विवेकी, सिंह से पराक्रमी, हाथीवत् स्वाभिमानी, इंदुवत् शीतल, तरुसम परोपकारी, अध्यात्म जगत् के
अनमोल रत्न, साधना के समदेहोश्वर, जिनका मुखमण्डल निहारने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे हजारों सूरज अपनी किरणें एक साथ बिखेर रहे हों। जिन्होंने अनन्त निन्द्राओं अनन्त प्रशंसाओं का आज तक कोई उत्तर नहीं दिया ऐसे भरत रत्न, भारत विभूति, श्रमण संस्कृति के महानायक, युगदृष्टा, युगाचेता, महाकवि, काव्य जगत् के कर्णधार, साधना के सच्चे सदन, ज्ञानदीप के तत्व सूर्य जो अपनी प्रखर रश्मियों से अज्ञान के तिमिर का नाशक हैं। जिनकी दिनचर्या देख करके लोग अपनी पंछियाँ मिलाते हैं, जिनके दो सौ से अधिक पिच्छिकाधारी साधु संत आदिंका देवाधिदेव अर्हन्तदेव 1008 आदिनाथ भगवान के बताये हुये मार्ग पर चल रहे हैं। सागर से गंभीर मेरु से धीर, रवि तुल्य तेजस्वी, नभ से निर्मल, गिरिसम अचल, कंचन-सा अंग, सागर से गहरे, हिमालय से ऊँचे, कोयल-सा कंठ, सुधा तुल्य वचन, यामिनीव कीर्तिमान, ज्ञान में वर्धमान, पृथ्वी तुल्य क्षमाधारी, शशी सम शीतल धर्म के अवतार, आगम पंथी, पञ्चम युग के प्रकाशपुञ्ज, स्वाध्याय के सच्चे सदन, धर्म धुरंधर, ज्ञान समुद्र के अनमोल रत्न, महावीर की प्रतिमूर्ति, पवित्र उदारक, सन्मार्ग दिवाकर, परोपकारी, निमित्तज्ञानी, धर्म दिवाकर, तीर्थ उद्धारक, करुणा के असीम आकाश, स्वप्नों में सूना जिनके नेत्रों में गुण ग्राहिता है, जिनकी वाणी ऐसी प्रतीत होती है जैसे देवाधिदेव अरिहंत देव की वाणी, सरस्वती उनके कंठ में विराजमान हो। उनके मुख मंडल पर थिरकती मुस्कान ऐसी लगती है मानो कह रही है नृत्य से थिरकते पुरके से आमंत्रण दे रही है हम सभी को आओ होश पूर्वक जीने की कला सीखो। इनकी मुस्कान में यही रहस्य छिपा है। ये वो सूरज हैं जो दीन दुःखी जीवों को शीतलता प्रदान करते हैं जो ना ही राग करते हैं और ना ही द्वेष, पृथ्वी इनका बिछौना है, आकाश इनका ओढ़ना, ब्रह्मतेज से देदीप्यमान मुखमण्डल, स्वभाव से सरल, संसार से उदास, निरन्तर आत्मानुभव, सबके प्रति समभाव, समताभाव, करुणाभाव रखने वाले अत्यन्त निस्पृही, जिनका आन्तरिक व्यक्तित्व बड़े-बड़े मनीषियों के आकर्षण का केन्द्र बना है। ऐसी शांतिवीर शिवज्ञान के धनी। आचार्य गुरुवर के चरणों में मेरा बारम्बार नमोऽस्तु, नमोऽस्तु, नमोऽस्तु।
बड़ा ही महत्त्व है
बच्चों में पढ़ने का, सिलाई में कढ़ने का।
शिर में चढ़ने का, बड़ा ही महत्त्व है॥
चालीसा में चालीस का, सोने की पालिस का।
शियर जी में मालिश का, बड़ा ही महत्त्व है॥
देखने में शीशा का, धर्म में अहिंसा का।
पढ़ने में चालीसा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
हिन्दी में मात्रा का, स्कूल में छात्रा का।
शिखरजी की यात्रा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
भव से तरण का, त्याग के वरण का।
ठीक में चरण का, बड़ा ही महत्त्व है॥
चलने में पाथ का, मित्रों में साथ का।
तीर्थंकरों में पार्श्वनाथ का, बड़ा ही महत्त्व है॥
माता-पिता की फिकर का, आपस में जिक्र का।
मंदिर में शिखर का, बड़ा ही महत्त्व है॥
प्रभु दर्श में लखने का, भोजन में चखने का।
यात्रा में थकने का, बड़ा ही महत्त्व है॥
विद्यालय में प्राचार्य का, कक्षा में आचार्य का।
घर में माता-पिता का, बड़ा ही महत्त्व है॥
सब्जी में जीरा का, रत्नों में हीरा का।
तीर्थंकरों में महावीरा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
हाथ में कलाई का, दूध में मलाई का।
मनुष्यों में भलाई का, बड़ा ही महत्त्व है॥
देशों में अवन्ती का, माताओं में कुन्ती का।
पर्वों में महावीर जयन्ती का, बड़ा ही महत्त्व है॥
नारी में शर्म का, स्वभाव में नर्म का।
धर्मों में जैनधर्म का, बड़ा ही महत्त्व है॥
नामों में भिमा का, वीर की अहिंसा का।
पृथ्वी में दिशा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
भिखारियों में भिक्षा का, शहरों में रिक्शा का।
जीवों में रक्षा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
अखबार में समाचार का, करने में विचार का।
जीवन में सदाचार का, बड़ा ही महत्त्व है॥
सब्जी में छोंक का, चाकू में नोक का।
शिखर जी में टोक का, बड़ा ही महत्त्व है॥
भाषा में जाती का, भोजन में दाल भात का।
शिखर जी में लाठी का, बड़ा ही महत्त्व है॥
उम्र में साल का, सिर में बाल का।
बैठने में हाल का, बड़ा ही महत्त्व है॥
शरीर में Heart का, सड़कों में Dust का।
लड़कों में Shirt का, बड़ा ही महत्त्व है॥
बिल्लों में Rat का, पहनने में Hat का।
क्रिकेट में Bat का, बड़ा ही महत्त्व है॥
बुढ़ों में छड़ी का, हाथियों में बढ़ी का।
पहाड़ों में लड़ी का, बड़ा ही महत्त्व है॥
1. खाने के मिठाई
गेहूँ में आटे का, खाने में पराठे का ॥
लड़की के चाटे का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
मंदिर में दर्शन का, बाहर में प्रदर्शन का ।
सेठ में सुदर्शन का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
दूध में मलाई का, खाने में मिठाई का ।
ससुराल में जमाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
मंदिर में भगवान का, भगवान में राम का ।
राम में आत्मा का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
लिखने में पेन का, गले में चैन का ।
यात्रा में ट्रेन का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बुनने में सूजा का, मंदिर में पूजा का ।
रक्षाबंधन में गुँजा का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
ध्वज में झण्ड का, समिति में फण्ड का ।
मौसमों में ठण्ड का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
युद्ध में तलवार का, नाव में पतवार का ।
तोटेगाँव में मलवार का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
ग्रहों में शनिचर का, घरों में फर्नीचर का ।
गर्भो में खच्चर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
आसमान में बादल का, कीचड़ में दलदल का ।
खेतों में फसल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
मानव में ज्ञान का, चेहरे में कान का ।
मंदिर में भगवान का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
महाभारत में कंस का, जीवन में अंत का ।
धरती में संत का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
जीवन में पानी का, जिंदगी में जवानी का ।
ग्रंथों में जिनवाणी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
माँ की मार का, बरसात की कहार का ।
जीवन में संस्कार का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
खेत में ट्रेक्टर का, जिले में कलेक्टर का ।
जीवन में करेक्टर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
फलों में आम का, वस्तु में दाम का ।
भारत में श्रीधाम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
कक्षा में हल्ले का, क्रिकेट में बल्ले का ।
कमर में छल्ले का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
दूध में मलाई का, घर में लड़ाई का ।
जीवन में पढ़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
चरित्र में विवेक का, खेल में क्रिकेट का ।
पूजा में अभिषेक का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
भोजन में दाल-रोटी का, पर्वत में ऊँची चोटी का ।
पढ़ने में मुकम्मदी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बर्तन में कढ़ाई का, कपड़ों में सिलाई का ।
बच्चों में पढ़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बिजली में करेंट का, सड़क में एक्सीडेंट का ।
आफिस में असिस्टेंट का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
रस में गन्ने का, पानी में छल्ले का ।
मौसमार्ग में चलने का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
स्कूल में ज्ञान का, जीवन में बलिदान का ।
दुनिया में हिन्दुस्तान का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
जानवर में लंगूर का, पैरों में बूट का ।
अदालत में झूठ का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बच्चों में खेल का, स्टेशन में रेल का ।
परीक्षा में फेल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
साड़ी में कढ़ाई का, परीक्षा में पढ़ाई का ।
ससुराल में लड़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
गुरुकुल में शिक्षा का, साधुओं में भिक्षा का ।
मौसमार्ग में दीक्षा का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
नगर में सेतु का, कपड़ों में मेल का ।
चिड़ियों में चिड़ बैल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
दिनों में कपड़े का, पुलिस में डण्डे का ।
तोटेगाँव में झण्डे का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
तरकश में तीर का, पृथ्वी में समीर का ।
तीर्थंकरों में महावीर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
घर में नारी का, फूलों में क्यारी का ।
मंदिर में पुजारी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पक्षियों में जटायु का, जीवों में आयु का ।
जीवन में प्राण वायु का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
हीटर में क्वाइल का, लोगों में स्टाइल का ।
मुनियों की स्माइल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
नाटक में वेश का, देश में प्रदेश का ।
संतों के उपदेश का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
सभा में विद्वानों का, दान में धनवानों का ।
लड़ाई में बलवानों का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
हिन्दुओं में शंकर का, मुस्लिमों में पैगम्बर का ।
दिगम्बरों में तीर्थंकर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पूजन में अभिषेक का, चरित्र में विवेक का ।
बर्फी में केक का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पुस्तक में ज्ञान का, शिक्षक में मान का ।
मंच में सम्मान का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
गंजे में बाल का, गोरे में गाल का ।
टेढ़ी में साल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
लिखने में पेन का, गणित में टेन का ।
अंधे में लालटेन का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
शेरों में बाल का, चढ़ने में ढाल का ।
घर में हाल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
उड़ने में पंछी का, बजने में शंख का ।
बिच्छू के डंक का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पेड़ों में नीम का, भृंगार में क्रीम का ।
आयोजन में टीम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पहनने में चड्डी का, शरीर में हड्डी का ।
खेतों में टिड्डी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
उड़ने में पतंग का, बालों में कटिंग का ।
जीवन में सेटिंग का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
नदी में पानी का, जीवन में नानी का ।
समाज में दानी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
फलों में आम का, वस्तु में दाम का ।
भारत में श्रीधाम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
रामायण में राम का, महाभारत में श्याम का ।
यात्रा में नाम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
जीवन में पढ़ाई का, त्योहार में मिठाई का ।
महाभारत में लड़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
होली में रंग का, जीवन में ढंग का ।
शरीर में अंग का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
निकाह में काजी का, शतरंज में बाजी का ।
तीर्थों में शिखर जी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
विवाह में मेहमान का, राजपूतों में जबान का ।
बड़ों में सम्मान का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
आसमान में बादल का, आँखों में काजल का ।
पैरों में पायल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
वर्तमान में धर्म का, जीवन में कर्म का ।
औरों में शर्म का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
साँप में जहर का, सागर में लहर का ।
समय में पहर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बड़ा ही अंतर है
तीर और तलवार में, एक और चार में ।
साइकिल और कार में, पैदल और सवार में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
कंजूस और दानी में, दूध और पानी में ।
दादी और नानी में, बुढ़ापा और जवानी में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
हाथी और घोड़ा में, रस्सी और कोड़ा में ।
फुल्ली और फोड़ा में, सिल और लोढ़ा में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
पुतली और पूँड़ा में, बंदूक और डंडा में ।
लकड़ी और कंडा में, आलू और अंडा में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
गली और गेट में, पीठ और पेट में ।
मजदूर और सेठ में, वस्तु और रेट में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
गुरु और चेला में, बाजार और मेला में ।
ट्रेक्टर और ठेला में, फूल और फेला में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
अष्टक
| गुरु अष्टक | सर्वोदय अष्टक |
|---|---|
| गुरु गीता, गुरु छंद है, गुरु जिनदर्शन मंत्र। | सर्वोदय मम पंथ हो, सर्वोदय पाथेय। |
| गुरु पुराण, गुरु वेद है, गुरु परमार्थ संत॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय हो ध्येय॥ |
| गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन क्रिया न होय। | सर्वोदय ही पोत है, सर्वोदय सुख स्रोत। |
| गुरु बिन प्रभु दर्शन नहीं, गुरु बिन जीवन खोय॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय वर ज्योत॥ |
| गुरु मार्ग, गुरु छाँव है, गुरु भव खेवनहार। | सर्वोदय ही ग्रंथ है, सर्वोदय निर्ग्रंथ। |
| गुरु अनंत की छाँव है, गुरु गुण अपार॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय अरहंत॥ |
| गुरु शिल्पी, गुरु पारखी, गुरु है करुणामंत। | सर्वोदय का गान हो, सर्वोदय का मान। |
| बंद नेत्र गुरु खोलते, जय जय गुरु जयवंत॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय वरदान॥ |
| गुरु तीर्थ, गुरु कीर्ति है, गुरु यश, गुरु भगवंत। | सर्वोदय गुणवंत है, सर्वोदय ऋषिसंत। |
| गुरु जिनेंद्र की मूर्ति है, गुरु पूजा अरहंत॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय जयवंत॥ |
| गुरु बिन ज्ञान न ऊपजे, गुरु बिन मिटे न भेद। | सर्वोदय में श्वास लूं, सर्वोदय में वास। |
| गुरु बिन संशय न मिटे, जय जय जय गुरुदेव॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय का दास॥ |
| गुरु दर्शन, गुरु ज्ञान है, गुरु चारित की खान। | सर्वोदय को भूल ना, सर्वोदय भवकुल। |
| गुरु धर्म की शान है, गुरु महिमा मन आन॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय सुखमूल॥ |
| गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु है, गुरु शंकर शिव शुद्ध। | सर्वोदय में रमण हो, सर्वोदय में अलख। |
| गुरु स्वयं परब्रह्म है, गुरु पुरुषोत्तम बुद्ध॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय पर्यंत॥ |
गद्य-पाठ
जीवन
जीवन एक कला है … इसे सुन्दर बनाइये।
जीवन एक चमत्कार है … इसकी प्रशंसा कीजिए।
जीवन एक रहस्य है … इसे प्रकट कीजिए।
जीवन एक विज्ञान है … इसे अन्वेषित कीजिए।
जीवन एक अवसर है … इसको निखारिये।
जीवन एक वास्तविकता है … इसे पहचानिये।
जीवन एक खजाना है … इसकी सुरक्षा कीजिए।
जीवन एक प्रसन्नता है … इसे बाँटिये।
जीवन एक गीत है … इसे गुनगुनाइये।
जीवन एक यात्रा है … इसे रोमांचित बनाइये।
जीवन एक पहेली है … इसे सुलझाइये।
जीवन एक चुनौती है … इसे स्वीकार कीजिए।
जीवन एक संशय है … इसे सुगम बनाइये।
जीवन एक लालसा है … इसे विजित बनाइये।
जीवन एक कर्तव्य है … इसे निबाहिये।
जीवन एक दुःख है … इसे वश में कीजिए।
जीवन एक पाठ है … इससे कुछ सीखिये।
जीवन एक शाप है … इसे हटाइये।
जीवन एक वरदान है … इसे धारण कीजिए।
जीवन एक उपहार है … इसका आनन्द मनाइये।
रहस्य घड़ी का
मेरा नाम घड़ी है। आज के युग में मेरा बहुत महत्त्व है। हर घर में मैं रहती हूँ। स्टेशन जाना हो, कार्यालय जाना हो परीक्षा देना हो तो हर बार मेरी आवश्यकता होती है। मेरे अंदर रहस्य छुपा है। अंग्रेजी में मुझे WATCH कहते हैं। WATCH यह शब्द पाँच अक्षरों से बना है। एक-एक अक्षर एक-एक गुण दर्शाता है।
W यह अक्षर बताता है WATCH YOUR WORD यह समझाता है हर समय जो बोलते हो वह हित मित प्रिय हो।
A यह अक्षर बताता है WATCH YOUR ACTION यह समझाता है हर समय जो कार्य करते हो उसे ठीक से और सहजता से करो।
T यह अक्षर बताता है WATCH YOUR TIME यह समझाता है समय हाथ से निकलने के बाद फिर से वापस नहीं आता। आप समय को पकड़ नहीं पाते। इसीलिये हर क्षण महत्त्व का होता है।
C यह अक्षर बताता है WATCH YOUR CHARECTER यह समझाता है हर समय अपना चारित्र अच्छा रखो। नाम कमाने में देर लगती है। खोने में जरा भी समय नहीं लगता।
H यह अक्षर बताता है WATCH YOUR HEALTH यह समझाता है स्वास्थ्य अच्छा रखो।
शरीर माद्यं खलु धर्म साधनम्।
शरीर अच्छा है तो ही धर्म होता है।
छुपे हैं न मेरे अन्दर पाँच रहस्य ?
मेरा भारत महान्
एक अमेरिकन ने मुझसे कहा कि यदि तुम्हारा भारत महान् है तो बतलाई संसार के इतने आविष्कारों में तुम्हारे देश का क्या योगदान है, तो मैंने कहा रे- अमेरिकन सुन-संसार की पहली फायर प्रूफ लेडी इंडिया में ही पैदा हुई थी नाम था उसका होलिका इसलिये उस जमाने में फायर ब्रिगेड चलती ही नहीं थी। होलिका, इसलिये आग में जलती ही नहीं थी ये तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने का एक षड्यंत्र किया था इसलिये भगवान ने उसकी बॉडी में शोर्ट सर्किट कर दिया था।
मैंने कहा रे-अमेरिकन दूसरा आविष्कार गिनाता हूँ संसार की पहली वॉल्ट-प्रूफ बिल्डिंग इंडिया में ही बनी थी जो समुद्र के पेट में विष्णु भगवान का सरकारी रेसीडेन्स थी बिल्डिंग का नाम था शेषनाग, शेषनाग जमीन में चले गये, विशेष नाम पृथ्वी पर ही रह गये और हम उन्हीं के हाथों ढगे गये।
संसार के पहले पत्रकार नारदजी हुये जो किसी भी सत्ता या व्यवस्था से नहीं डरते थे। तीनों लोकों की सनसनी खेज रिपोर्टिंग करते थे। सृष्टि के पहले कमिटेटर संजय हुये, जिन्होंने एक नया इतिहास बनवाया, अंधे धृतराष्ट्र को महाभारत का आँखों देखा हाल जिन्होंने रेडियो पर सुनाया।
मैंने कहा रे-अमेरिकन, सुन जहाँ तक दादागिरी का सवाल है तो इसका आविष्कार भी हम भारत वालों ने ही किया है क्योंकि शब्दादिमुनि भारत के ही शंखधर भगवान ने इस पृथ्वी पर इतना आतंक मचाया था कि हफ्ता वसूली का रिवाज उनके चेले ने ही चलाया था आज भी हर शंखनाद को उनके भक्त आते हैं उनका फोटो दिखाते हैं और हफ्ता ले जाते हैं।
मेरी बात सुन अमेरिकन हड़बड़ाया गुस्से में बड़बड़ाया बोले फालतू की बातें मत बनाओ यदि तुम्हारे भारत ने कोई ठीक-ठाक ढंग का आविष्कार किया हो तो बताओ क्यों हमारा दिमाग मत खाओ, तो मैंने कहा रे भाई कैसा आविष्कार, तो बोला ऐसा आविष्कार जैसे हमने अमेरिका में आदमी की किडनी बदल दी, हार्ट की बायपास सर्जरी कर दी, दिमाग की न्यूरोसर्जरी कर दी, ऐसा कोई मेडिकल साइंस या सर्जरी में यदि भारत ने कोई आविष्कार किया हो तो बताओ क्यों हमारा दिमाग मत खाओ तो मैंने कहा रे-अमेरिकन सुन संसार को तो सर्जरी का कॉन्सेप्ट ही इंडिया ने दिया था। वर्ना तू ही बता गणेशजी का ऑपरेशन क्या तेरे बाप ने किया था, मेरी बात सुन अमेरिकन हड़बड़ाया, गुस्से में बड़बड़ाया देखने ही देखते वहाँ से चलता फिरता नजर आया तब से अमेरिका को ही नहीं सारी दुनिया को ध्यान है कि दुनिया में देश चाहे जितने भी हों पर उन सब में मेरा भारत महान् है।
महत्त्वपूर्ण तीन
इन तीनों के लिए मर मिटो धर्म, देश, मित्र
इन तीनों का सम्मान करो माता, पिता, गुरु
इन तीनों को हमेशा वश में रखो मन, क्रोध, लोभ
इन तीनों पर सदा दया करो बालक, भूखे, पागल
इन तीनों के लिए लड़ो आजादी, ईमान, इंसाफ
इन तीनों को कभी नहीं भूले कर्ज, फर्ज, मर्ज
तीन चीजें किसी का इंतजार नहीं करती समय, मौत, ग्राहक
When wealth is lost nothing lost
When health is lost something lost
When character is all is lost
जब धन गया कुछ भी नहीं गया।
जब स्वास्थ्य गया कुछ गया।
जब चारित्र गया सब कुछ गया।
मोक्ष यात्रा
अटेंशन प्लीज यात्रीगण ध्यान दें, संसारपुर से मोक्षपुर जाने वाली विद्या एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चल रही है। जिस किसी भी यात्री का संसारपुर से मोक्षपुर जाना हो, वो अपनी संयम रूपी टिकट कटाकर अपनी सीट आरक्षित करा ले। ये गाड़ी उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य, ब्रह्मचर्य दस धर्मों के स्टेशन से होते हुये मोक्षपुर जा रही है।
एक विशेष हिदायत मानी छली-कपटी स्वार्थिष्ट भोजन करने वाले, मदमग्न की गद्दी में बैठकर स्वाध्याय करने वाले, अति क्रोध, झगड़ा करने वाले, रात्रिभोजन, बिना छना पानी पीने वाले तथा कपड़े पहनकर मोक्ष जाने वाले टिकट की लाईन पर खड़े न हों।
धन्यवाद।
भूल की गाथा
जो भूल न करे, उसे भगवान कहते हैं।
जो भूलों से बचता रहे, उसे इंसान कहते हैं॥
जो भूलों को देखकर हँसता है, उसे हैवान कहते हैं।
जो भूलकर उसे भूल जाये, उसे शैतान कहते हैं॥
जो भूलकर उसे फिर न करे, उसे सावधान कहते हैं।
जो भूल से कुछ सीख जाये उसे बुद्धिमान् कहते हैं॥
जीवन का गणित
जीवन एक गणित है,
दोस्तों का जोड़ करो,
दुश्मनों का घटाव करो,
खुशियों का गुणा करो।
दुखों का भाग दो,
लेकिन निराश मत होना,
जिन्दगी का वर्गमूल,
निकल आयेगा॥
देखिये
भाषा को नहीं भाव को देखिये
संत को नहीं साधना को देखिये
भोजन को नहीं स्नेह को देखिये
रूप को नहीं स्वरूप को देखिये
अनुप्रास को नहीं कविता को देखिये
लेखक को नहीं कृति को देखिये
शक्ति को नहीं सहिष्णुता को देखिये
फूल को नहीं सुगंध को देखिये
मोती को नहीं पानी को देखिये
मानव को नहीं मानवता को देखिये
विचार को नहीं आचार को देखिये
व्यक्ति को नहीं तलवार को देखिये
चित्त को नहीं विवेक को देखिये
पुस्तक को नहीं शिक्षा को देखिये
जीवन को नहीं संयम को देखिये
बेजोड़
एक विवाह समारोह में
एक ने देखा अर्चना
दुल्हन बिल्कुल ढिगनी
और दुबला
असिमितवचन से भी लंबा
किसी ने कहा दूल्हे से
एक बात बताइये
इतनी ढिगनी जीवी से
आप कैसे काम चलायेंगे
वे बोले
आप कवि हैं न
कवियों की अकल
बिल्कुल कच्ची होती है
भैया मुसीबत जितनी छोटी हो
उतनी अच्छी होती है
तीन क्षणिकाएँ
जुड़वा बच्चे
एक महिला ने
एक साथ
दो बच्चों को जन्म दिया
पहला गोरा
दूसरा काला
लेडी डॉक्टर बोली
बोस साल में सर्विस में हूँ
आज तक नहीं देखा
ऐसा गड़बड़ घोटाला
और एक गोरा एक काला
यह नया केस है
अस्पताल के इतिहास में
शायद आपका मायका
काश्मीर में है
और ससुराल मद्रास में
रंग भेद नीति का विरोधी
आपका पति प्रबल प्रतापी है
महिला बोली
बात यह नहीं है
बात यह है
कि मैं एक दफ़्तर में टाइपिस्ट हूँ।
पहला बच्चा ओरिजनल है
और दूसरा उसका कार्बन कॉपी।
1. लाश
यदि मानव शरीर में, आत्मा का वास है श्रद्धा व
विश्वास है प्रभु के प्रति आस है तो जीवन का
विकास है अन्यथा फिर चलती-फिरती लाश है।
2. सुप्रभात
यदि मानव निज चेतना से कर देता मिथ्यात्व का
घात सम्यक्त्व को कर लेता आत्मसात तो हो
जाता है सुप्रभात।
3. अच्छी बात
जो न कर सके मानव। प्राणीमात्र का घात जिसे
स्वयं ने कर लिया हो आत्मसात वही है सच्ची
मुलाकात अच्छी बात।
श्रेष्ठ
पढ़ने से सुनना श्रेष्ठ है, कहने से करना श्रेष्ठ है।
ज्ञान से अनुभव श्रेष्ठ है, शब्द से अनुभूति श्रेष्ठ है।
मानने से जानना श्रेष्ठ है, भावना से कर्तव्य श्रेष्ठ है।
दान से दक्षिणा से श्रेष्ठ है, दमन से संयम श्रेष्ठ है।
त्याग से अनासक्ति श्रेष्ठ है, स्मरण से ध्यान श्रेष्ठ है।
सत्य से अहिंसा श्रेष्ठ है, और अपनी आत्मा के समान
सबकी आत्मा समझना सर्वश्रेष्ठ है॥
घायल हिन्दुस्तान
गाँधीजी
जब स्वर्ग सिधारे
दुखी हुये
सब जन बेचारे
गाँधीजी
बहुत उदास थे
जबकि
स्वर्ग के वैभव
उनके पास थे
अचानक खबर मिली
संजयगाँधी आये हैं
स्वर्गवासियों को खुशी हुई
दो-दो गाँधी पाये हैं
संजय ने प्रणाम करके
जैसे ही सिर उठाया
वह बुरी तरह चकराया
बापू को उदास पाया
दुखी स्वर में
उसने पूछा!
बापू आप उदास क्यों हैं?
बापू ने ऐनक ऊपर उठाई
बोले सुन मेरे भाई
मैं हिन्दुस्तान की चिंता में
दुबला होता जा रहा हूँ।
स्वर्ग के सुखों को भी
कहीं भोग पा रहा हूँ।
खबर इतने में आई
इंदिरा जी भी
अभी-अभी आई
वे गाँधी से मिलीं
की संजय उनसे मिल गये
आते ही हिल गये
संजय ने कहा
मम्मी बापू भारत की
चिन्ता में, उदास हैं
दोनों बातों में थे लीन
समाचार मिला नवीन
राजीवगाँधी आये हैं
विकास की आँधी लाये हैं
संजय ने लपककर कहा
भैया बापू हिन्दुस्तान के लिए
बहुत उदास हैं
राजीव ने कहा
चलो अभी बात करते हैं
सबसे पहले उनसे
मुलाकात करते हैं
राजीव
के बोलने से पहले बापू बोल पड़े
जैसे राजीव की प्रतीक्षा
में पहले से ही हो खड़े
राजीव मुझे
हिन्दुस्तान की बहुत चिन्ता है
क्योंकि
हमारी पीढ़ी का
एक भी नेता नहीं जिन्दा है
राजीव
ने कहा
बापू आप हिन्दुस्तान की चिन्ता छोड़िये
और सीधा मुझसे नाता जोड़िये
भारत बहुत विकास कर रहा है
आदमी बीमार मर रहा है
और देश का
हर छोटा बड़ा नेता
अपना घर भर रहा है
गोडसे ने आप को
तीन गोलियों से
ठिकाने लगाया था
संजय!
हवाई जहाज से आया था
इन्दिरा जी के शरीर में
छत्तीस गोलियाँ उतारी थी
रक्षक-भक्षक बना
मानवता हारी थी
उनके बाद हमारी बारी थी
आपने तीन से
संजय ने प्लेन से
मम्मी ने गोलियों की चेन से
स्वर्ग का द्वार खटखटाया
और विकसित देश का
प्रधानमंत्री होने के नाते
मैं मानव बम पर
बैठकर आया
बापू कौन कहता है
विकास नहीं हुआ
आपके समय
मात्र तीन सौ बूचड़खाने थे
छत्तीस हजार अड़तीस
का आंकड़ा हमने ही तो
छुआ
बापू यह सुनकर
रो पड़े
मुश्किल से हो पाये खड़े
भर्राई आवाज में
किसी तरह बोले
बेटा अहिंसा ही
मेरे देश का प्राण है
और आज
भ्रष्टाचार हिंसा में डूबा
घायल हिन्दुस्तान है।
शाश्वत सत्य
क्षमा - भूल को भूल जाना ही क्षमा है।
मार्दव - सम्मान प्रिय और अपमान अप्रिय लगने का कारण मान है।
आर्जव - टेढ़ा चलने वाला सीधे मार्ग पर नहीं चल सकता।
शौच - लोभ अपूर्णता का कारण है लोभी, लोभ छोड़े बिना, परिग्रह संग्रह द्वारा
तृप्ति चाहता है।
सत्य - असत्य चंचलता है क्योंकि उसकी मृत्यु समीप होती है।
संयम - जीवन वृक्ष संयम दुख बिना व्यर्थ है।
तप - तपन बिना भी नहीं निकलता, तप बिना जीव नहीं निखरता।
त्याग - जीवन को अनावश्यक भार उतार देना त्याग है।
आकिंचन्य - अपना कुछ नहीं, इसलिये कुछ अपनाना दुःखद है।
ब्रह्मचर्य - लालसा पर विजय पाना ही ब्रह्मचर्य है।
गृहस्थ गीता
आतिथ्य ही हर घर का वैभव है, प्रेम ही हर घर की प्रतिष्ठा है।
व्यवस्था ही हर घर की शोभा है, समाधान ही हर घर का सुख है ॥
सदाचार ही हर घर की सुवास है, पैसे में सदा वीर का वास है।
ऋण हो ऐसा खर्च मत करो, पाप हो ऐसी कमाई मत करो ॥
क्लेश हो ऐसा मत बोलो, चिंता हो ऐसा जीवन मत जीओ।
रोग हो ऐसा मत खाओ, किसी को दुख पहुँचे ऐसा कार्य मत करो ॥
करते रहिए पाते रहिए
गुरु भक्ति कीजिए, धर्म तत्व स्वतः ही मिल जायेगा।
सच्चे हृदय से प्रार्थना कीजिए प्रसन्नता मिल जायेगी।
माता-पिता की निर्मल सेवा कीजिए लक्ष्मी मिल जायेगी।
दीन की सेवा करने से आनंद अनुभूति मिलेगी।
अपना कर्तव्य पूरा करने से यश मिलता है।
अपनी आलोचना करते रहिए आराधना हो जायेगी।
दान और परोपकार कीजिए अमर हो जाओगे।
बुढ़ापे में
आँख पे तनेगा जाला,
नाक से बहेगा नाला,
लाठी से पड़ेगा पाला,
जरा जिंदगानी में,
बिस्तर पे पड़े-पड़े
थूकते रहोगे तुम,
धोती में मलमूत्र करोगे तुम …
कोई लिखता है
कोई लिखता है हँसने के लिये,
कोई लिखता है किसी को रुलाने के लिये,
कोई लिखकर जीता है जिंदगी अपनी,
कोई लिखता है गम भुलाने के लिये।
किसी के लिखने से बात बुरी हो जाती है,
किसी के लिखने से तबीयत हरी हो जाती है।
बात रह जाती है अधूरी किसी के लिखने से,
किसी के लिखने से दिल पर छुरी चल जाती है ॥
शोशी माचिस
वह जब मायके से ससुराल आयी, सास ने पूछा क्या लाई? बहू बोली पति के लिये घड़ी, देवर के
लिये घड़ी, ननद के लिये लहंगा, देवरानी के लिये कंगन, जेठानी के लिये हार, जेठ के लिये कार
सुनकर सास चकराई मेरे लिये कुछ नहीं लाई। मुस्कुराई बहू सरमाई, कमरे के अंदर गई वहाँ से
स्टोव, शोशी, माचिस ले आई सास मन ही मन मुस्कुराई लेकिन देखकर चकराई दो शोशी और
दो माचिस क्यों लाई, बहू बोली तुम्हारी बेटी हमारी ससुरारी जायेगी तो एक शोशी एक माचिस
साथ में ले जायेगी।
ईश्वर एक परीक्षा है…
यह दुनिया जिसमें आप रहते हैं, परीक्षा भवन है।
यह जीवन उत्तरपुस्तिका है।
समय केवल तीन घण्टे है।
प्रश्नपत्र बंद चुका है जन्म के साथ।
बालकपन समाप्त होते ही पहला घण्टा बज चुका है।
दूसरा घंटा जवानी समाप्त होते ही बज चुका है।
अभी तक आपने अपनी उत्तरपुस्तिका में कुछ नहीं लिखा।
मृत्यु का तीसरा घण्टा बजने वाला है।
क्या फेल होने का डर नहीं।
कल्याण हो जायेगा
माल मत छोड़ो, मालकियत छोड़ दो, कल्याण हो जायेगा।
जिसने जन्म लिया उसकी मौत निश्चित है।
इसलिये मौत नहीं मौत का भय छोड़ दो, कल्याण हो जायेगा।
भोजन अनिवार्य है जीवन जीने के लिये।
इसलिये भोजन नहीं उसकी शुद्धता छोड़ दो, कल्याण हो जायेगा।
नहीं मिलता
लालची को चैन नहीं मिलता, कंजूस को सम्मान नहीं मिलता ॥
पेटू को स्वास्थ्य नहीं मिलता, झूठे को विश्वास नहीं मिलता ॥
कमजोर को इंसाफ नहीं मिलता, शक्की को प्रेम नहीं मिलता ॥
जलनखोर को दोस्त नहीं मिलता, बेअदब को इल्म नहीं मिलता ॥
डरपोक को नाम नहीं मिलता, आलसी को इनाम नहीं मिलता ॥
दहेज में बच्चा
मैंने कहा क्यों जी आप अपने लड़के को शादी की सूची पर क्यों टाँग रहे हैं? दहेज में क्या-क्या माँग रहे हैं? वे बोले बात चल रही है कल ही लड़की वाला आया था पाँच लाख का आँफर लाया था। परन्तु आज कल पाँच लाख से क्या होता है, अरे लड़का जीवन भर लड़की का भार ढोता है। मैंने कहा-हाँ-हाँ क्यों नहीं वैसे लड़का आजकल कर क्या रहा है, वे गर्व से बोले, हमने उसे पढ़ाया है लिखाया है अपने पैरों पर खड़ा हो सके इस काबिल बनाया है। आजकल अच्छा-खासा कमा रहा है, एक दहेज विरोधी संस्था चला रहा है।
बच्चे
खुशबुओं के गुलाब है बच्चे, कितनी आँखों के ख्वाब है बच्चे।
चाँद है आफताब है बच्चे, रोशनी की किताब है बच्चे।
क्या फरिश्ते किसी ने देखे हैं ? कितना अच्छा जवाब है बच्चे।
जिनको संस्कार शुभ मिले हैं वे हर जगह कामयाब है बच्चे।
अपनी मस्ती की राजधानी में अपने मन के नवाब है बच्चे।
जब कभी ये खिलखिलाते हैं ऐसा लगता है मधुवन के सुवास है बच्चे।
पीपल का भूत
रात का सन्नाटा भयावह का घण्टा बारह बजा रहा था।
विशाल पीपल के पेड़ के नीचे बैठा अपनी नई कविता गुनगुना रहा
तभी अचानक पीपल के पेड़ से एक भूत प्रकट हुआ।
रुँआसा नजर आ रहा था। बेचारा बोला “मुझें ले जो माँगेगा है”
परन्तु ध्यान रहे फिर कभी इधर मत आना
और यदि आवे भी तो मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ।
अपनी कविताएँ मत गुनगुनाना।
जहर मिठाई
एक इंसान जिन्दगी में होकर परेशान, जहर की पुड़िया लाया, रात को खाया, सो गया, वह बेचारा शर्मिन्दा था, क्योंकि जहर खाकर भी जिंदा था। परिवार के लोगों ने यह सुना मन में गुना, खुशी से झूमने लगे, कुछ लोग बाजार गये मिठाई खरीद लाये प्यार से उसे मिठाई खिलाई, मिठाई खाते ही उसे मौत की नींद आयी, गजब हो गया, वह बेचारा मौत की गोद में सो गया, परिवार के लोग शर्मिन्दा हैं उन्हें आश्चर्य ये मिला है, यह संसार सचमुच ही गजब ढाता है आदमी जहर खाकर जिंदा रहता है पर मिठाई खाके मर जाता है।
परीक्षा
परीक्षा एक क्रिकेट का खेल है।
जिसमें विद्यार्थी एक बैट्समैन है।
कलम एक बैट है।
चपरासी एक कॉमेंटेटर है।
परीक्षक एक एम्पायर है।
मार्केशीट एक स्कोर है।
फेल होना एक हार है।
कठिन प्रश्न एक गेंदबाज है।
अच्छे उत्तर बल्लेबाजजी है।
ताँक-झाँक में पकड़े जाना रनआउट है।
कोरा पेपर छोड़ना क्लीन बोल्ड है।
पेपर में फेंकना अतिरिक्त है।
बहुत अच्छे उत्तर देना चौके छक्के है।
नकल करके पास होना मैच फिक्सिंग है।
प्रभु सन्देश
जब तुम भूख-प्यास से हड़फोगे,
हम जलपान बनके आयेंगे।
तुम जब होगे पथिक,
हम राह बनकर आयेंगे ॥
तुम होगे गहन रोग से पीड़ित,
हम उपचार बनकर आयेंगे।
तुम होगे तपती धूप में बेहाल,
हम छँत्र बनकर आयेंगे ॥
किन्तु जब चरित्र व धर्म से गिर जाओगे।
फिर हमें न पाओगे, तुम लाख बुलाओगे ॥
फिर हमें न पाओगे।…॥
बुझो तो जाने
इसमें बारह साधुओं के नाम छुपे है उनका पता लगाइये-
विजय और जय दो अच्छे मित्र थे। एक बार विजय अपने कुत्ते मोती को लेकर गंगा के
किनारे गया। विजय नीम के पेड़ पर से गिर पड़ा। जय ने तुरंत डॉक्टर ग्रीन को बुलाया। डॉक्टर
ग्रीन ने तुरंत डेटोल लगाया और कहा- अब इसकी तबीयत ओके है। एक बार दोनों मित्र ने अपनी
प्रतिभा का प्रदर्शन किया जिससे दोनों को 501 तथा 555 का नेक मिला। साथ में दो विमान के
टिकट भी मिले। एक दिन उनके जीवन में ऐसी घड़ी भी आई जिससे उनके विमान का एरियल
खराब हो गया तथा उनकी जिंदगी समाप्त हो गई।
- … 2. … 3. … 4. … 5. … 6. … 7. … 8. … 9. … 10. … 11. … 12. …
गुमशुदा की तलाश
दूरदर्शन के
गुमशुदा की तलाश में
एक कवि का फोटो
हर हफ्ते देखकर
मैं चकराया
क्योंकि उस समय वह महाशय
मेरे ही पास बैठे थे
मैंने उससे कहा राम लुभाया
जब तुम हो नहीं छुपे
तो यह विज्ञापन क्यों निकलवाया
वह बोला
इस बहाने से ही सही
मेरा चेहरा टी. वी. पर तो आया।
सेम्पल
एक साथ तीन बच्चे पैदा हुये
पहला बहरा
दूसरा गूंगा और
तीसरा अंधा
नेताजी घबरा गये
ये गांधी जी के तीन बन्दर
मेरे घर में कैसे आ गये
उन्होंने कहा ‘बजरंग बली’
इन भिखारियों को जन्म देने के लिए
तुझे और कोई जगह नहीं मिली
आवाज आयी
आजादी के बाद मिला है
बहरा कानून
गूंगा संविधान और
अंधी योजनायें
बेटे तू बेकार घबड़ाया है
मैंने कोई करिश्मा
नहीं दिखाया है
मैंने तो बच्चों के रूप में
तेरे पास भारत वर्ष का
सिर्फ एक सेम्पल
भिजवाया है।
मजेदार पत्र
आदरणीय
कलाकंद मामा व रस माधुरी मामी
हलवा पूरी, खस्ता कालाजी
चमचमगढ़ जिला- रसगुल्ला
नमस्ते,
इमरती दीदी की शादी पेठानगर में समोसा जी के सुपुत्र खीरचंद के साथ तय हो गयी है। आप सभी विवाह में सम्मिलित होने की कृपा करें। लड्डू भैया और आलू बड़ा चाची को साथ लाएँ। बालूशाही दीदी और पोहा जीजाजी सकुशल होंगे। दहीबड़ा मौसा जी के साथ चमचम मौसी आ चुकी हैं। भजिया फूफाजी और जलेबी बुआ भी कल पहुँच रही हैं। आप लोग गुलाबजामुन पैसेंजर से आइसक्रीम खाते हुए, कपूरचंद स्टेशन पर चायकाल के समय पहुँचने का प्रयत्न कीजिए।
आपकी स्वादिष्ट भाजी
बर्फी
टेलीफोन महान्
मेरा टेलीफोन है कितना महान्, एक नमूना देखिए श्रीमान्।
मैंने घुमाया रेल्वे इन्क्वारी और लग गया कब्रिस्तान ॥
चूँकि मुझे निबंध प्रतियोगिता में जाना था और रेलगाड़ी में
अपना रिजर्वेशन करवाना था। इसलिए मैंने रेल्वे इन्क्वारी
का नम्बर घुमाया पर क्या मालूम वहाँ के कब्रिस्तान के
बाबू ने उठाया बोला फरमाइये! मैंने कहा बस एक सीट
चाहिए। वह बोला बैठे ही आपके लिए है, हमारी सेवा
किस दिन काम आयगी। बेधड़क चले आइये एक क्या
पचास सीटें खाली हैं पूरे खानदान को ले आईये।
महत्त्व
एक पत्नी अपने पति को पत्र लिखती है, लेकिन उसमें वह कहीं भी पूर्ण विराम नहीं
लगाती, अतः पत्र लिखने के बाद जब उसे गलती का अहसास होता है तो वह अंदाज से जल्दी-
जल्दी कुछ पूर्ण विराम लगा देती है। इससे होता है ये कि सारे पत्र का अर्थ ही बदल जाता है,
लेकिन अगर बिन्दु के हिसाब से पढ़ा जाये तो पत्र बिल्कुल सही है। प्रस्तुत है वह पत्र-
प्रिय पतिदेव,
प्रणाम, आपने कितने दिनों से चिट्ठी नहीं लिखी, मेरी प्यारी सहेली कल्पना को। नौकरी से
निकाल दिया है हमारी गाय ने। बछड़ा दिया है दादा जी ने। शराब पीना शुरू कर दी है मैंने। बहुत
घर डाले मगर नहीं आये मुर्गी के बच्चे। भोड़सा खा गया है राशन को चीनी। छुट्टी पर आते वक्त ले
आना एक खूबसूरत औरत। मेरी नई सहेली बन गई है। तुम्हारी भी याद करती है एक पड़ोसन।
मुझे तंग करती है हमारी जमीन। पर गड़े हुए आम हैं ताऊ जी के सिर में। माइनिंग हो गई है मेरे पैर
में। चोट लग गई है तुम्हारी चिट्ठी को। तरसती रहती हूँ हर वक्त।
पारिश्रमिक
— अंश यहाँ समाप्त; पूर्ण ग्रंथ के लिए नीचे संलग्न PDF देखें —
मूल दस्तावेज़ (PDF): 3017.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है