बालसभा भाग-१
- यह ग्रंथ का अंश है; पूर्ण ग्रंथ नीचे संलग्न PDF में उपलब्ध है -
अनुक्रमणिका
| क्र. | विवरण |
|---|---|
| 1 | पाठशाला के लिए उपयोगी |
| 2 | बालसभा |
| 3 | दो शब्द |
| 4 | बालसभा आयोजन |
| 5 | विशेष- |
| 6 | हमारी पाठशाला है |
| 7 | आचार्य श्री जी को नमोस्तु |
| 8 | बड़ा ही महत्त्व है |
| 9 | 1. खाने के मिठाई |
| 10 | बड़ा ही अंतर है |
| 11 | अष्टक |
| 12 | गद्य-पाठ |
| 13 | जीवन |
| 14 | रहस्य घड़ी का |
| 15 | छुपे हैं न मेरे अन्दर पाँच रहस्य ? |
| 16 | मेरा भारत महान् |
| 17 | महत्त्वपूर्ण तीन |
| 18 | मोक्ष यात्रा |
| 19 | भूल की गाथा |
| 20 | जीवन का गणित |
| 21 | देखिये |
| 22 | बेजोड़ |
| 23 | तीन क्षणिकाएँ |
| 24 | जुड़वा बच्चे |
| 25 | 1. लाश |
| 26 | 2. सुप्रभात |
| 27 | 3. अच्छी बात |
| 28 | श्रेष्ठ |
| 29 | घायल हिन्दुस्तान |
| 30 | शाश्वत सत्य |
| 31 | गृहस्थ गीता |
| 32 | करते रहिए पाते रहिए |
| 33 | बुढ़ापे में |
| 34 | कोई लिखता है |
| 35 | शोशी माचिस |
| 36 | ईश्वर एक परीक्षा है… |
| 37 | कल्याण हो जायेगा |
| 38 | नहीं मिलता |
| 39 | दहेज में बच्चा |
| 40 | बच्चे |
| 41 | पीपल का भूत |
| 42 | जहर मिठाई |
| 43 | परीक्षा |
| 44 | प्रभु सन्देश |
| 45 | बुझो तो जाने |
| 46 | गुमशुदा की तलाश |
| 47 | सेम्पल |
| 48 | मजेदार पत्र |
| 49 | टेलीफोन महान् |
| 50 | महत्त्व |
| 51 | पारिश्रमिक |
पाठशाला के लिए उपयोगी
बालसभा
भाग-1
प्रकाशक
धर्मोदय परीक्षा बोर्ड
सागर (म.प्र.)
दो शब्द
रात्रिकाल में चलने वाली पाठशाला में सप्ताह के एक दिन बच्चों के मनोरंजन के लिये बालसभा का आयोजन किया जाता है। बालसभा के आयोजन हेतु एक ऐसे संकलन की माँग होती रही है, जिसमें मनोरंजन के साथ उनमें धार्मिक संस्कार, ज्ञान-विज्ञान का भी विकास हो। तभी किया बालसभा भाग-1 पुस्तक का संकलन।
इसमें सर्वप्रथम बालसभा का आयोजन कैसे करें इसकी विधि पश्चात् हमारी पाठशाला है गीत, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को नमोऽस्तु, बड़ा ही महत्त्व है, बड़ा ही अन्तर, अष्टक, 37 गद्य-पाठ, 202 चुटकुले, इनकी जिंदगी आपका फैशन, 117 मुक्तक, 27 काव्य-पाठ, 100 लौकिक पहेली, 24 खेल, सामान्य ज्ञान एवं नियमावली है।
इस पुस्तक में जिन मुनिराजों, आर्यिकाओं, त्यागी वृत्तियों, ब्रह्मचारी भाईयों एवं विद्वान् गृहस्थ श्रावकों को रचनाओं का समावेश किया गया है। उन सबके प्रति मैं अपने हृदय के गहनतम तल से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ।
इस पुस्तक के प्रकाशन में गुना के श्रावक श्री अनिलकुमार जी जैन खेरा को धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ जिन्होंने अर्थ सहयोग प्रदान किया।
बालसभा आयोजन
- बालसभा शनिवार अथवा अन्य किसी अनुकूल दिवस में आयोजित करें।
- सामूहिक सभी कक्षाओं के एक साथ आयोजित करने हेतु आवश्यक सामग्री एवं व्यवस्था-सभा संचालक, दो माईक, सभा का अध्यक्ष बनाना, पुरस्कार वितरण हेतु मुख्य अतिथि।
- बालसभा प्रारम्भ करने के पूर्व मंगलाचरण, दीपप्रज्जवलन, अध्यक्ष, मुख्यअतिथि की घोषणा एवं सम्मान आदि करें।
- बालसभा की पूर्व तैयारी एवं प्रक्रिया- एक दिन पूर्व ही प्रत्येक कक्षाओं में से बच्चों के नाम लिख लें जो बोलना चाहते हों। (संभव हो तो बच्चों को पूर्व से (भजन, कहानियाँ, संस्मरण हास्य प्रसंग, काव्यपाठ आदि) तैयारी करवावें।
- बालसभा में सभी कक्षाओं के अनुसार पृथक् छोटे-छोटे डब्बों में बच्चों के नाम की चिट रख एवं चिट निकलने पर जिन बच्चों का नाम आवे उसे बुला लेवें।
- पुरस्कार दो प्रकार के सामान्य एवं विशेष रखें अथवा कक्षाओं की श्रेष्ठता के अनुरूप भी संयोजित कर सकते हैं। बच्चों की सामान्य प्रस्तुति में सामान्य अथवा अच्छी प्रस्तुति विशेष पुरस्कार देवें। प्रश्नमंच हेतु 10 पुरस्कार अलग से देवें।
- यह घोषणा पहले ही कर दें कि साम 15 अथवा 20 बच्चे अथवा (समय सीमा 1 घंटा आदि में) जिनका पहले नम्बर आवेगा उन्हें मंच पर प्रस्तुति देने का मौका मिलेगा। अथवा शेष नाम अगली बालसभा के लिये सुरक्षित रखे जायेंगे।
- प्रत्येक वर्ग से 1-1 बच्चे की प्रस्तुति होने पर प्रथम राउण्ड पूर्ण कर सभी बच्चों से प्रश्न / पहेली आदि पूछें तथा उत्तर देने वालों को पुरस्कृत करें।
- मंच पर पुरस्कार पाने वाले बच्चों का सामान्य साक्षात्कार लें। जैसे-आपका नाम, माता-पिता का नाम, शिक्षा, व्यापार, आवास कहाँ, आपका लक्ष्य, पसंदीदा खेल, भोजन, वस्त्र, क्षेत्र वंदना आदि।
विशेष-
- सही उत्तर आने पर भी चाहें तो और भी अन्य बच्चों से पूछें, जिससे आत्मविश्वास का पता चलता है और अंत में जिसने सबसे पहले सही बताया है, उसे पुरस्कृत करें। एवं बच्चे द्वारा बताये गये उत्तर का पुनः माइक से सबके सामने व्याख्यान करें।
जैसे- 24 वें तीर्थंकर कौन हैं उत्तर- भगवान् महावीर।
संचालक- आप सभी जानते हैं जो संसार से पार लगाते हैं, वे तीर्थंकर कहलाते हैं, तीर्थंकर 24 होते हैं। उनमें अंतिम तीर्थंकर का नाम आया है भगवान् महावीर जो बिल्कुल सही है। गलत उत्तर आने पर उत्तर सही नहीं है ऐसा भी कह सकते हैं। यदि कोई न बता पावे तो आप स्वयं उस प्रश्न का उत्तर व्याख्यान सहित बतावें। अथवा अगली बालसभा में लिये प्रश्न सुरक्षित रख तथा बच्चों से खोज कर लाने के लिये कहें। - शोर होने पर जयकारा लगावें ओम् शांति अथवा भजन की दो, चार पंक्तियाँ बोलकर माहौल बनायें। अथवा एक अंगुली मुख पर रखकर दूसरा हाथ उठाने को कहें। सभी बच्चों के शांत बैठने पर प्रश्न पूछें।
- प्रथम आदि राउन्ड के बाद पाठशाला शिक्षकों को भी प्रस्तुति हेतु आमंत्रित करें। एवं सुनाई गई कहानी आदि में से भी प्रश्न पूछें। जिससे बच्चे ध्यान पूर्वक सुन सकें।
- संचालक बीच-बीच में मुद्रक, भजन, हास्य प्रयोग आदि का भी प्रयोग करें, जिससे माहौल आकर्षक बना रहे। तथा पाठशाला बच्चों के अतिरिक्त सभा में बैठे अन्य महिलायें व पुरुषों से भी प्रश्न पूछें, जिससे कि बालसभा वृहत् रूप ले सके।
- बालसभा के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन, आभार प्रदर्शन करें।
हमारी पाठशाला है
हमें आचरण सिखलाती — हमारी पाठशाला है।
हमें व्यवहार सिखलाती — हमारी पाठशाला है।
हमें मंदिर बुलाती — हमारी पाठशाला है।
प्रभु दर्शन दिलाती — हमारी पाठशाला है।
छना पानी सदा पीना — सिखाती पाठशाला है।
कभी ना रात को खाना — सिखाती पाठशाला है।
प्याज, आलू नहीं खाना — सिखाती पाठशाला है।
ना होटल में कभी जाना — सिखाती पाठशाला है।
सदा आदर विनय करना — सिखाती पाठशाला है।
चरण छूकर नमन करना — सिखाती पाठशाला है।
पिता-माता की सेवा करना — सिखाती पाठशाला है।
कभी आपस में ना लड़ना — सिखाती पाठशाला है।
कभी अभिमान ना करना — सिखाती पाठशाला है।
सदा पापों से तुम डरना — सिखाती पाठशाला है।
बुरी आदत ना तुम लाना — सिखाती पाठशाला है।
मिले अच्छाई जो पाना — सिखाती पाठशाला है।
धर्म पालो सदा अपना — सिखाती पाठशाला है।
हमें णमोकार है जपना — सिखाती पाठशाला है।
बड़ी सद्भावना पर कैसे — सिखाती पाठशाला है।
सही जैनी बनें कैसे — सिखाती पाठशाला है।
सदाचारी सदा बनना — सिखाती पाठशाला है।
कभी निंदा नहीं करना — सिखाती पाठशाला है।
कभी चुगली नहीं करना — सिखाती पाठशाला है।
जिनवाणी को नित पढ़ना — सिखाती पाठशाला है।
ज्ञान आगम के तुम गाना — सिखाती पाठशाला है।
कभी हिंसा नहीं करना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
कभी ना झूठ तुम कहना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
ना चोरी तुम कभी करना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
बुरी दृष्टि ना तुम रखना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
ना आसक्ति अधिक रखना — पाठ पढ़ना यहाँ आकर।
देवपूजा सदा करना — बताती पाठशाला है।
गुरु सेवा में नित रहना — बताती पाठशाला है।
करो स्वाध्याय नित ही तुम — बताती पाठशाला है।
रहे संयम से जीवन में — बताती पाठशाला है।
करें तप हो सुखी जीवन — बताती पाठशाला है।
करें हम दान नित-प्रतिदिन — बताती पाठशाला है।
जहाँ सद्ज्ञान है मिलता — हमारी पाठशाला है।
जहाँ सन्मान है मिलता — हमारी पाठशाला है।
सभी को लगती है प्यारी — हमारी पाठशाला है।
कभी ना भूलना इसको — ये प्यारी पाठशाला है।
बड़े उपकार हैं इसके — ये प्यारी पाठशाला है।
हमारी पाठशाला है, हमारी पाठशाला है।
आचार्य श्री जी को नमोस्तु
माई सोल्ड, इबो मत लगाओ डुबकी, चेतना के गहरा में, तोता क्यों रोता, नर्मदा का नरम कंकड़, प्रवचन पारिजात, प्रवचन प्रमेय, सागर बूंद समय, सागर मंथन, चेतन का भोग ब्रह्मचर्य, समय, जैन गीता, मुनीति शतक, स्तुति शतक कितनी ऐसी ही कृतियाँ महान् आत्मा के द्वारा हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड़, मराठी, बंगाली, संस्कृत भाषा में लिखी गयीं। जो इस भीड़ भरे संसार में आत्म उन्नति के लिए अति उत्तम हैं, मगर वो मुक्तामयी महाकाव्य जिस महाकाव्य की तुलना बड़े-बड़े विद्वानों ने इंटरनेशनल पोएट मिल्टन की पैराडाइज लॉस्ट, प्रसाद की कामायनी, बाल्मीकी की रामायण, कालीदास की मेघदूत और रघुवंश से जिस मुक्तामयी की तुलना की ऐसी मुक्तामयी के लेखक, रचयिता, समाधि सम्राट, समाटो के सम्राट, विश्ववंदनीय, प्रातः स्मरणीय मौन के साधक, महान् तत्ववेत्ता, ज्योतिपुंज, युगप्रहरी, संयम के सूर्य, जिनशासन-शिरोमणि, तेजोमय नक्षत्र, सद्गुण रत्न, स्वाध्याय-प्रिय, शोधबोधि पथिक, क्षमाधर, परोपकार परायण, विवेक दर्पण, अर्हत्नीति, उन्नायक, कीर्ति निकुंज, विमल विचारक, भव्यजन दुःखभंजक, जैन आगम निधि संरक्षक, बोधि वृक्ष, मुक्तिदुदु, सरस्वती कंठाभरण, संस्कृत सरोज सरोवर, दिव्य विभूति, भव्यांबु पारगामी, जिनराग जिन सिन्धु, जिनवरगुणानुगामी, वरिष्ठ विद्वान्, गणनायक, वाङ्मय वारिधि, अध्यात्मोन्मुखी, सिद्धाख्याता, सिद्धीसोपान, शास्त्रार्थ निपुण, ऊर्जा के केन्द्र, स्वस्थ परम्परा सम्पोपक, प्रभापुञ्ज, अनेकान्त विवेचक, जिनशासनसेवी, हृदयहारी, कलिकाल सर्वज्ञ, महामनीषी, समाधिसदन, अप्रमत्त विहारी, उद्दामनः हितचिन्तक सरस व्याख्याकार, शब्दशिल्पी, मननशील, मधुरभाषी, सौम्य स्वभावो, सद् संस्कार संजीवक, अमृत पुरुष दृढ़प्रतिज्ञ, आनन्दघन, श्रमनिष्ट दिगम्बराचार्य संयमाचार्य जैनाचार्य वाणीभूषण संत शिरोमणि, चारित्र शिरोमणि, आचार्यों के आचार्य, चारित्र चक्रवर्ती आचार्य, महावीर के लक्ष्मनन, कुन्दकुन्द गुरु के कुन्दन, ऋषिवर, मुनिवर, गुरुवर, आचार्यवर, हंसवत् विवेकी, सिंह से पराक्रमी, हाथीवत् स्वाभिमानी, इंदुवत् शीतल, तरुसम परोपकारी, अध्यात्म जगत् के
अनमोल रत्न, साधना के समदेहोश्वर, जिनका मुखमण्डल निहारने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे हजारों सूरज अपनी किरणें एक साथ बिखेर रहे हों। जिन्होंने अनन्त निन्द्राओं अनन्त प्रशंसाओं का आज तक कोई उत्तर नहीं दिया ऐसे भरत रत्न, भारत विभूति, श्रमण संस्कृति के महानायक, युगदृष्टा, युगाचेता, महाकवि, काव्य जगत् के कर्णधार, साधना के सच्चे सदन, ज्ञानदीप के तत्व सूर्य जो अपनी प्रखर रश्मियों से अज्ञान के तिमिर का नाशक हैं। जिनकी दिनचर्या देख करके लोग अपनी पंछियाँ मिलाते हैं, जिनके दो सौ से अधिक पिच्छिकाधारी साधु संत आदिंका देवाधिदेव अर्हन्तदेव 1008 आदिनाथ भगवान् के बताये हुये मार्ग पर चल रहे हैं। सागर से गंभीर मेरु से धीर, रवि तुल्य तेजस्वी, नभ से निर्मल, गिरिसम अचल, कंचन-सा अंग, सागर से गहरे, हिमालय से ऊँचे, कोयल-सा कंठ, सुधा तुल्य वचन, यामिनीव कीर्तिमान, ज्ञान में वर्धमान, पृथ्वी तुल्य क्षमाधारी, शशी सम शीतल धर्म के अवतार, आगम पंथी, पञ्चम युग के प्रकाशपुञ्ज, स्वाध्याय के सच्चे सदन, धर्म धुरंधर, ज्ञान समुद्र के अनमोल रत्न, महावीर की प्रतिमूर्ति, पवित्र उदारक, सन्मार्ग दिवाकर, परोपकारी, निमित्तज्ञानी, धर्म दिवाकर, तीर्थ उद्धारक, करुणा के असीम आकाश, स्वप्नों में सूना जिनके नेत्रों में गुण ग्राहिता है, जिनकी वाणी ऐसी प्रतीत होती है जैसे देवाधिदेव अरिहंत देव की वाणी, सरस्वती उनके कंठ में विराजमान हो। उनके मुख मंडल पर थिरकती मुस्कान ऐसी लगती है मानो कह रही है नृत्य से थिरकते पुरके से आमंत्रण दे रही है हम सभी को आओ होश पूर्वक जीने की कला सीखो। इनकी मुस्कान में यही रहस्य छिपा है। ये वो सूरज हैं जो दीन दुःखी जीवों को शीतलता प्रदान करते हैं जो ना ही राग करते हैं और ना ही द्वेष, पृथ्वी इनका बिछौना है, आकाश इनका ओढ़ना, ब्रह्मतेज से देदीप्यमान मुखमण्डल, स्वभाव से सरल, संसार से उदास, निरन्तर आत्मानुभव, सबके प्रति समभाव, समताभाव, करुणाभाव रखने वाले अत्यन्त निस्पृही, जिनका आन्तरिक व्यक्तित्व बड़े-बड़े मनीषियों के आकर्षण का केन्द्र बना है। ऐसी शांतिवीर शिवज्ञान के धनी। आचार्य गुरुवर के चरणों में मेरा बारम्बार नमोऽस्तु, नमोऽस्तु, नमोऽस्तु।
बड़ा ही महत्त्व है
बच्चों में पढ़ने का, सिलाई में कढ़ने का।
शिर में चढ़ने का, बड़ा ही महत्त्व है॥
चालीसा में चालीस का, सोने की पालिस का।
शिखर जी में मालिश का, बड़ा ही महत्त्व है॥
देखने में शीशा का, धर्म में अहिंसा का।
पढ़ने में चालीसा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
हिन्दी में मात्रा का, स्कूल में छात्रा का।
शिखरजी की यात्रा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
भव से तरण का, त्याग के वरण का।
ठीक में चरण का, बड़ा ही महत्त्व है॥
चलने में पाथ का, मित्रों में साथ का।
तीर्थंकरों में पार्श्वनाथ का, बड़ा ही महत्त्व है॥
माता-पिता की फिकर का, आपस में जिक्र का।
मंदिर में शिखर का, बड़ा ही महत्त्व है॥
प्रभु दर्श में लखने का, भोजन में चखने का।
यात्रा में थकने का, बड़ा ही महत्त्व है॥
विद्यालय में प्राचार्य का, कक्षा में आचार्य का।
घर में माता-पिता का, बड़ा ही महत्त्व है॥
सब्जी में जीरा का, रत्नों में हीरा का।
तीर्थंकरों में महावीरा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
हाथ में कलाई का, दूध में मलाई का।
मनुष्यों में भलाई का, बड़ा ही महत्त्व है॥
देशों में अवन्ती का, माताओं में कुन्ती का।
पर्वों में महावीर जयन्ती का, बड़ा ही महत्त्व है॥
नारी में शर्म का, स्वभाव में नर्म का।
धर्मों में जैनधर्म का, बड़ा ही महत्त्व है॥
नामों में भिमा का, वीर की अहिंसा का।
पृथ्वी में दिशा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
भिखारियों में भिक्षा का, शहरों में रिक्शा का।
जीवों में रक्षा का, बड़ा ही महत्त्व है॥
अखबार में समाचार का, करने में विचार का।
जीवन में सदाचार का, बड़ा ही महत्त्व है॥
सब्जी में छोंक का, चाकू में नोक का।
शिखर जी में टोक का, बड़ा ही महत्त्व है॥
भाषा में जाती का, भोजन में दाल भात का।
शिखर जी में लाठी का, बड़ा ही महत्त्व है॥
उम्र में साल का, सिर में बाल का।
बैठने में हाल का, बड़ा ही महत्त्व है॥
शरीर में Heart का, सड़कों में Dust का।
लड़कों में Shirt का, बड़ा ही महत्त्व है॥
बिल्लों में Rat का, पहनने में Hat का।
क्रिकेट में Bat का, बड़ा ही महत्त्व है॥
बुढ़ों में छड़ी का, हाथियों में बढ़ी का।
पहाड़ों में लड़ी का, बड़ा ही महत्त्व है॥
1. खाने के मिठाई
गेहूँ में आटे का, खाने में पराठे का ॥
लड़की के चाटे का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
मंदिर में दर्शन का, बाहर में प्रदर्शन का ।
सेठ में सुदर्शन का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
दूध में मलाई का, खाने में मिठाई का ।
ससुराल में जमाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
मंदिर में भगवान् का, भगवान् में राम का ।
राम में आत्मा का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
लिखने में पेन का, गले में चैन का ।
यात्रा में ट्रेन का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बुनने में सूजा का, मंदिर में पूजा का ।
रक्षाबंधन में गुँजा का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
ध्वज में झण्ड का, समिति में फण्ड का ।
मौसमों में ठण्ड का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
युद्ध में तलवार का, नाव में पतवार का ।
तोटेगाँव में मलवार का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
ग्रहों में शनिचर का, घरों में फर्नीचर का ।
गर्भो में खच्चर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
आसमान में बादल का, कीचड़ में दलदल का ।
खेतों में फसल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
मानव में ज्ञान का, चेहरे में कान का ।
मंदिर में भगवान् का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
महाभारत में कंस का, जीवन में अंत का ।
धरती में संत का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
जीवन में पानी का, जिंदगी में जवानी का ।
ग्रंथों में जिनवाणी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
माँ की मार का, बरसात की कहार का ।
जीवन में संस्कार का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
खेत में ट्रेक्टर का, जिले में कलेक्टर का ।
जीवन में करेक्टर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
फलों में आम का, वस्तु में दाम का ।
भारत में श्रीधाम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
कक्षा में हल्ले का, क्रिकेट में बल्ले का ।
कमर में छल्ले का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
दूध में मलाई का, घर में लड़ाई का ।
जीवन में पढ़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
चरित्र में विवेक का, खेल में क्रिकेट का ।
पूजा में अभिषेक का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
भोजन में दाल-रोटी का, पर्वत में ऊँची चोटी का ।
पढ़ने में मुकम्मदी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बर्तन में कढ़ाई का, कपड़ों में सिलाई का ।
बच्चों में पढ़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बिजली में करेंट का, सड़क में एक्सीडेंट का ।
आफिस में असिस्टेंट का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
रस में गन्ने का, पानी में छल्ले का ।
मौसमार्ग में चलने का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
स्कूल में ज्ञान का, जीवन में बलिदान का ।
दुनिया में हिन्दुस्तान का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
जानवर में लंगूर का, पैरों में बूट का ।
अदालत में झूठ का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बच्चों में खेल का, स्टेशन में रेल का ।
परीक्षा में फेल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
साड़ी में कढ़ाई का, परीक्षा में पढ़ाई का ।
ससुराल में लड़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
गुरुकुल में शिक्षा का, साधुओं में भिक्षा का ।
मौसमार्ग में दीक्षा का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
नगर में सेतु का, कपड़ों में मेल का ।
चिड़ियों में चिड़ बैल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
दिनों में कपड़े का, पुलिस में डण्डे का ।
तोटेगाँव में झण्डे का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
तरकश में तीर का, पृथ्वी में समीर का ।
तीर्थंकरों में महावीर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
घर में नारी का, फूलों में क्यारी का ।
मंदिर में पुजारी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पक्षियों में जटायु का, जीवों में आयु का ।
जीवन में प्राण वायु का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
हीटर में क्वाइल का, लोगों में स्टाइल का ।
मुनियों की स्माइल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
नाटक में वेश का, देश में प्रदेश का ।
संतों के उपदेश का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
सभा में विद्वानों का, दान में धनवानों का ।
लड़ाई में बलवानों का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
हिन्दुओं में शंकर का, मुस्लिमों में पैगम्बर का ।
दिगम्बरों में तीर्थंकर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पूजन में अभिषेक का, चरित्र में विवेक का ।
बर्फी में केक का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पुस्तक में ज्ञान का, शिक्षक में मान का ।
मंच में सम्मान का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
गंजे में बाल का, गोरे में गाल का ।
टेढ़ी में साल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
लिखने में पेन का, गणित में टेन का ।
अंधे में लालटेन का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
शेरों में बाल का, चढ़ने में ढाल का ।
घर में हाल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
उड़ने में पंछी का, बजने में शंख का ।
बिच्छू के डंक का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पेड़ों में नीम का, भृंगार में क्रीम का ।
आयोजन में टीम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
पहनने में चड्डी का, शरीर में हड्डी का ।
खेतों में टिड्डी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
उड़ने में पतंग का, बालों में कटिंग का ।
जीवन में सेटिंग का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
नदी में पानी का, जीवन में नानी का ।
समाज में दानी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
फलों में आम का, वस्तु में दाम का ।
भारत में श्रीधाम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
रामायण में राम का, महाभारत में श्याम का ।
यात्रा में नाम का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
जीवन में पढ़ाई का, त्योहार में मिठाई का ।
महाभारत में लड़ाई का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
होली में रंग का, जीवन में ढंग का ।
शरीर में अंग का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
निकाह में काजी का, शतरंज में बाजी का ।
तीर्थों में शिखर जी का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
विवाह में मेहमान का, राजपूतों में जबान का ।
बड़ों में सम्मान का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
आसमान में बादल का, आँखों में काजल का ।
पैरों में पायल का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
वर्तमान में धर्म का, जीवन में कर्म का ।
औरों में शर्म का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
साँप में जहर का, सागर में लहर का ।
समय में पहर का, बड़ा ही महत्त्व है ॥
बड़ा ही अंतर है
तीर और तलवार में, एक और चार में ।
साइकिल और कार में, पैदल और सवार में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
कंजूस और दानी में, दूध और पानी में ।
दादी और नानी में, बुढ़ापा और जवानी में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
हाथी और घोड़ा में, रस्सी और कोड़ा में ।
फुल्ली और फोड़ा में, सिल और लोढ़ा में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
पुतली और पूँड़ा में, बंदूक और डंडा में ।
लकड़ी और कंडा में, आलू और अंडा में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
गली और गेट में, पीठ और पेट में ।
मजदूर और सेठ में, वस्तु और रेट में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
गुरु और चेला में, बाजार और मेला में ।
ट्रेक्टर और ठेला में, फूल और फेला में ॥
बड़ा ही अंतर है ।
अष्टक
| गुरु अष्टक | सर्वोदय अष्टक |
|---|---|
| गुरु गीता, गुरु छंद है, गुरु जिनदर्शन मंत्र। | सर्वोदय मम पंथ हो, सर्वोदय पाथेय। |
| गुरु पुराण, गुरु वेद है, गुरु परमार्थ संत॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय हो ध्येय॥ |
| गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन क्रिया न होय। | सर्वोदय ही पोत है, सर्वोदय सुख स्रोत। |
| गुरु बिन प्रभु दर्शन नहीं, गुरु बिन जीवन खोय॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय वर ज्योत॥ |
| गुरु मार्ग, गुरु छाँव है, गुरु भव खेवनहार। | सर्वोदय ही ग्रंथ है, सर्वोदय निर्ग्रंथ। |
| गुरु अनंत की छाँव है, गुरु गुण अपार॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय अरहंत॥ |
| गुरु शिल्पी, गुरु पारखी, गुरु है करुणामंत। | सर्वोदय का गान हो, सर्वोदय का मान। |
| बंद नेत्र गुरु खोलते, जय जय गुरु जयवंत॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय वरदान॥ |
| गुरु तीर्थ, गुरु कीर्ति है, गुरु यश, गुरु भगवंत। | सर्वोदय गुणवंत है, सर्वोदय ऋषिसंत। |
| गुरु जिनेंद्र की मूर्ति है, गुरु पूजा अरहंत॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय जयवंत॥ |
| गुरु बिन ज्ञान न ऊपजे, गुरु बिन मिटे न भेद। | सर्वोदय में श्वास लूं, सर्वोदय में वास। |
| गुरु बिन संशय न मिटे, जय जय जय गुरुदेव॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय का दास॥ |
| गुरु दर्शन, गुरु ज्ञान है, गुरु चारित की खान। | सर्वोदय को भूल ना, सर्वोदय भवकुल। |
| गुरु धर्म की शान है, गुरु महिमा मन आन॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय सुखमूल॥ |
| गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु है, गुरु शंकर शिव शुद्ध। | सर्वोदय में रमण हो, सर्वोदय में अलख। |
| गुरु स्वयं परब्रह्म है, गुरु पुरुषोत्तम बुद्ध॥ | सर्वोदय को नमन हो, सर्वोदय पर्यंत॥ |
गद्य-पाठ
जीवन
जीवन एक कला है … इसे सुन्दर बनाइये।
जीवन एक चमत्कार है … इसकी प्रशंसा कीजिए।
जीवन एक रहस्य है … इसे प्रकट कीजिए।
जीवन एक विज्ञान है … इसे अन्वेषित कीजिए।
जीवन एक अवसर है … इसको निखारिये।
जीवन एक वास्तविकता है … इसे पहचानिये।
जीवन एक खजाना है … इसकी सुरक्षा कीजिए।
जीवन एक प्रसन्नता है … इसे बाँटिये।
जीवन एक गीत है … इसे गुनगुनाइये।
जीवन एक यात्रा है … इसे रोमांचित बनाइये।
जीवन एक पहेली है … इसे सुलझाइये।
जीवन एक चुनौती है … इसे स्वीकार कीजिए।
जीवन एक संशय है … इसे सुगम बनाइये।
जीवन एक लालसा है … इसे विजित बनाइये।
जीवन एक कर्तव्य है … इसे निबाहिये।
जीवन एक दुःख है … इसे वश में कीजिए।
जीवन एक पाठ है … इससे कुछ सीखिये।
जीवन एक शाप है … इसे हटाइये।
जीवन एक वरदान है … इसे धारण कीजिए।
जीवन एक उपहार है … इसका आनन्द मनाइये।
रहस्य घड़ी का
मेरा नाम घड़ी है। आज के युग में मेरा बहुत महत्त्व है। हर घर में मैं रहती हूँ। स्टेशन जाना हो, कार्यालय जाना हो परीक्षा देना हो तो हर बार मेरी आवश्यकता होती है। मेरे अंदर रहस्य छुपा है। अंग्रेजी में मुझे WATCH कहते हैं। WATCH यह शब्द पाँच अक्षरों से बना है। एक-एक अक्षर एक-एक गुण दर्शाता है।
W यह अक्षर बताता है WATCH YOUR WORD यह समझाता है हर समय जो बोलते हो वह हित मित प्रिय हो।
A यह अक्षर बताता है WATCH YOUR ACTION यह समझाता है हर समय जो कार्य करते हो उसे ठीक से और सहजता से करो।
T यह अक्षर बताता है WATCH YOUR TIME यह समझाता है समय हाथ से निकलने के बाद फिर से वापस नहीं आता। आप समय को पकड़ नहीं पाते। इसीलिये हर क्षण महत्त्व का होता है।
C यह अक्षर बताता है WATCH YOUR CHARECTER यह समझाता है हर समय अपना चारित्र अच्छा रखो। नाम कमाने में देर लगती है। खोने में जरा भी समय नहीं लगता।
H यह अक्षर बताता है WATCH YOUR HEALTH यह समझाता है स्वास्थ्य अच्छा रखो।
शरीर माद्यं खलु धर्म साधनम्।
शरीर अच्छा है तो ही धर्म होता है।
छुपे हैं न मेरे अन्दर पाँच रहस्य ?
मेरा भारत महान्
एक अमेरिकन ने मुझसे कहा कि यदि तुम्हारा भारत महान् है तो बतलाई संसार के इतने आविष्कारों में तुम्हारे देश का क्या योगदान है, तो मैंने कहा रे- अमेरिकन सुन-संसार की पहली फायर प्रूफ लेडी इंडिया में ही पैदा हुई थी नाम था उसका होलिका इसलिये उस जमाने में फायर ब्रिगेड चलती ही नहीं थी। होलिका, इसलिये आग में जलती ही नहीं थी ये तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने का एक षड्यंत्र किया था इसलिये भगवान् ने उसकी बॉडी में शोर्ट सर्किट कर दिया था।
मैंने कहा रे-अमेरिकन दूसरा आविष्कार गिनाता हूँ संसार की पहली वॉल्ट-प्रूफ बिल्डिंग इंडिया में ही बनी थी जो समुद्र के पेट में विष्णु भगवान् का सरकारी रेसीडेन्स थी बिल्डिंग का नाम था शेषनाग, शेषनाग जमीन में चले गये, विशेष नाम पृथ्वी पर ही रह गये और हम उन्हीं के हाथों ढगे गये।
संसार के पहले पत्रकार नारदजी हुये जो किसी भी सत्ता या व्यवस्था से नहीं डरते थे। तीनों लोकों की सनसनी खेज रिपोर्टिंग करते थे। सृष्टि के पहले कमिटेटर संजय हुये, जिन्होंने एक नया इतिहास बनवाया, अंधे धृतराष्ट्र को महाभारत का आँखों देखा हाल जिन्होंने रेडियो पर सुनाया।
मैंने कहा रे-अमेरिकन, सुन जहाँ तक दादागिरी का सवाल है तो इसका आविष्कार भी हम भारत वालों ने ही किया है क्योंकि शब्दादिमुनि भारत के ही शंखधर भगवान् ने इस पृथ्वी पर इतना आतंक मचाया था कि हफ्ता वसूली का रिवाज उनके चेले ने ही चलाया था आज भी हर शंखनाद को उनके भक्त आते हैं उनका फोटो दिखाते हैं और हफ्ता ले जाते हैं।
मेरी बात सुन अमेरिकन हड़बड़ाया गुस्से में बड़बड़ाया बोले फालतू की बातें मत बनाओ यदि तुम्हारे भारत ने कोई ठीक-ठाक ढंग का आविष्कार किया हो तो बताओ क्यों हमारा दिमाग मत खाओ, तो मैंने कहा रे भाई कैसा आविष्कार, तो बोला ऐसा आविष्कार जैसे हमने अमेरिका में आदमी की किडनी बदल दी, हार्ट की बायपास सर्जरी कर दी, दिमाग की न्यूरोसर्जरी कर दी, ऐसा कोई मेडिकल साइंस या सर्जरी में यदि भारत ने कोई आविष्कार किया हो तो बताओ क्यों हमारा दिमाग मत खाओ तो मैंने कहा रे-अमेरिकन सुन संसार को तो सर्जरी का कॉन्सेप्ट ही इंडिया ने दिया था। वर्ना तू ही बता गणेशजी का ऑपरेशन क्या तेरे बाप ने किया था, मेरी बात सुन अमेरिकन हड़बड़ाया, गुस्से में बड़बड़ाया देखने ही देखते वहाँ से चलता फिरता नजर आया तब से अमेरिका को ही नहीं सारी दुनिया को ध्यान है कि दुनिया में देश चाहे जितने भी हों पर उन सब में मेरा भारत महान् है।
महत्त्वपूर्ण तीन
इन तीनों के लिए मर मिटो धर्म, देश, मित्र
इन तीनों का सम्मान करो माता, पिता, गुरु
इन तीनों को हमेशा वश में रखो मन, क्रोध, लोभ
इन तीनों पर सदा दया करो बालक, भूखे, पागल
इन तीनों के लिए लड़ो आजादी, ईमान, इंसाफ
इन तीनों को कभी नहीं भूले कर्ज, फर्ज, मर्ज
तीन चीजें किसी का इंतजार नहीं करती समय, मौत, ग्राहक
When wealth is lost nothing lost
When health is lost something lost
When character is all is lost
जब धन गया कुछ भी नहीं गया।
जब स्वास्थ्य गया कुछ गया।
जब चारित्र गया सब कुछ गया।
मोक्ष यात्रा
अटेंशन प्लीज यात्रीगण ध्यान दें, संसारपुर से मोक्षपुर जाने वाली विद्या एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चल रही है। जिस किसी भी यात्री का संसारपुर से मोक्षपुर जाना हो, वो अपनी संयम रूपी टिकट कटाकर अपनी सीट आरक्षित करा ले। ये गाड़ी उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य, ब्रह्मचर्य दस धर्मों के स्टेशन से होते हुये मोक्षपुर जा रही है।
एक विशेष हिदायत मानी छली-कपटी स्वार्थिष्ट भोजन करने वाले, मदमग्न की गद्दी में बैठकर स्वाध्याय करने वाले, अति क्रोध, झगड़ा करने वाले, रात्रिभोजन, बिना छना पानी पीने वाले तथा कपड़े पहनकर मोक्ष जाने वाले टिकट की लाईन पर खड़े न हों।
धन्यवाद।
भूल की गाथा
जो भूल न करे, उसे भगवान् कहते हैं।
जो भूलों से बचता रहे, उसे इंसान कहते हैं॥
जो भूलों को देखकर हँसता है, उसे हैवान कहते हैं।
जो भूलकर उसे भूल जाये, उसे शैतान कहते हैं॥
जो भूलकर उसे फिर न करे, उसे सावधान कहते हैं।
जो भूल से कुछ सीख जाये उसे बुद्धिमान् कहते हैं॥
जीवन का गणित
जीवन एक गणित है,
दोस्तों का जोड़ करो,
दुश्मनों का घटाव करो,
खुशियों का गुणा करो।
दुखों का भाग दो,
लेकिन निराश मत होना,
जिन्दगी का वर्गमूल,
निकल आयेगा॥
देखिये
भाषा को नहीं भाव को देखिये
संत को नहीं साधना को देखिये
भोजन को नहीं स्नेह को देखिये
रूप को नहीं स्वरूप को देखिये
अनुप्रास को नहीं कविता को देखिये
लेखक को नहीं कृति को देखिये
शक्ति को नहीं सहिष्णुता को देखिये
फूल को नहीं सुगंध को देखिये
मोती को नहीं पानी को देखिये
मानव को नहीं मानवता को देखिये
विचार को नहीं आचार को देखिये
व्यक्ति को नहीं तलवार को देखिये
चित्त को नहीं विवेक को देखिये
पुस्तक को नहीं शिक्षा को देखिये
जीवन को नहीं संयम को देखिये
बेजोड़
एक विवाह समारोह में
एक ने देखा अर्चना
दुल्हन बिल्कुल ठिगनी
और दुबला
असिमितवचन से भी लंबा
किसी ने कहा दूल्हे से
एक बात बताइये
इतनी ठिगनी जीवी से
आप कैसे काम चलायेंगे
वे बोले
आप कवि हैं न
कवियों की अकल
बिल्कुल कच्ची होती है
भैया मुसीबत जितनी छोटी हो
उतनी अच्छी होती है
तीन क्षणिकाएँ
जुड़वा बच्चे
एक महिला ने
एक साथ
दो बच्चों को जन्म दिया
पहला गोरा
दूसरा काला
लेडी डॉक्टर बोली
बोस साल में सर्विस में हूँ
आज तक नहीं देखा
ऐसा गड़बड़ घोटाला
और एक गोरा एक काला
यह नया केस है
अस्पताल के इतिहास में
शायद आपका मायका
काश्मीर में है
और ससुराल मद्रास में
रंग भेद नीति का विरोधी
आपका पति प्रबल प्रतापी है
महिला बोली
बात यह नहीं है
बात यह है
कि मैं एक दफ़्तर में टाइपिस्ट हूँ।
पहला बच्चा ओरिजनल है
और दूसरा उसका कार्बन कॉपी।
1. लाश
यदि मानव शरीर में, आत्मा का वास है श्रद्धा व
विश्वास है प्रभु के प्रति आस है तो जीवन का
विकास है अन्यथा फिर चलती-फिरती लाश है।
2. सुप्रभात
यदि मानव निज चेतना से कर देता मिथ्यात्व का
घात सम्यक्त्व को कर लेता आत्मसात तो हो
जाता है सुप्रभात।
3. अच्छी बात
जो न कर सके मानव। प्राणीमात्र का घात जिसे
स्वयं ने कर लिया हो आत्मसात वही है सच्ची
मुलाकात अच्छी बात।
श्रेष्ठ
पढ़ने से सुनना श्रेष्ठ है, कहने से करना श्रेष्ठ है।
ज्ञान से अनुभव श्रेष्ठ है, शब्द से अनुभूति श्रेष्ठ है।
मानने से जानना श्रेष्ठ है, भावना से कर्तव्य श्रेष्ठ है।
दान से दक्षिणा से श्रेष्ठ है, दमन से संयम श्रेष्ठ है।
त्याग से अनासक्ति श्रेष्ठ है, स्मरण से ध्यान श्रेष्ठ है।
सत्य से अहिंसा श्रेष्ठ है, और अपनी आत्मा के समान
सबकी आत्मा समझना सर्वश्रेष्ठ है॥
घायल हिन्दुस्तान
गाँधीजी
जब स्वर्ग सिधारे
दुखी हुये
सब जन बेचारे
गाँधीजी
बहुत उदास थे
जबकि
स्वर्ग के वैभव
उनके पास थे
अचानक खबर मिली
संजयगाँधी आये हैं
स्वर्गवासियों को खुशी हुई
दो-दो गाँधी पाये हैं
संजय ने प्रणाम करके
जैसे ही सिर उठाया
वह बुरी तरह चकराया
बापू को उदास पाया
दुखी स्वर में
उसने पूछा!
बापू आप उदास क्यों हैं?
बापू ने ऐनक ऊपर उठाई
बोले सुन मेरे भाई
मैं हिन्दुस्तान की चिंता में
दुबला होता जा रहा हूँ।
स्वर्ग के सुखों को भी
कहीं भोग पा रहा हूँ।
खबर इतने में आई
इंदिरा जी भी
अभी-अभी आई
वे गाँधी से मिलीं
की संजय उनसे मिल गये
आते ही हिल गये
संजय ने कहा
मम्मी बापू भारत की
चिन्ता में, उदास हैं
दोनों बातों में थे लीन
समाचार मिला नवीन
राजीवगाँधी आये हैं
विकास की आँधी लाये हैं
संजय ने लपककर कहा
भैया बापू हिन्दुस्तान के लिए
बहुत उदास हैं
राजीव ने कहा
चलो अभी बात करते हैं
सबसे पहले उनसे
मुलाकात करते हैं
राजीव
के बोलने से पहले बापू बोल पड़े
जैसे राजीव की प्रतीक्षा
में पहले से ही हो खड़े
राजीव मुझे
हिन्दुस्तान की बहुत चिन्ता है
क्योंकि
हमारी पीढ़ी का
एक भी नेता नहीं जिन्दा है
राजीव
ने कहा
बापू आप हिन्दुस्तान की चिन्ता छोड़िये
और सीधा मुझसे नाता जोड़िये
भारत बहुत विकास कर रहा है
आदमी बीमार मर रहा है
और देश का
हर छोटा बड़ा नेता
अपना घर भर रहा है
गोडसे ने आप को
तीन गोलियों से
ठिकाने लगाया था
संजय!
हवाई जहाज से आया था
इन्दिरा जी के शरीर में
छत्तीस गोलियाँ उतारी थी
रक्षक-भक्षक बना
मानवता हारी थी
उनके बाद हमारी बारी थी
आपने तीन से
संजय ने प्लेन से
मम्मी ने गोलियों की चेन से
स्वर्ग का द्वार खटखटाया
और विकसित देश का
प्रधानमंत्री होने के नाते
मैं मानव बम पर
बैठकर आया
बापू कौन कहता है
विकास नहीं हुआ
आपके समय
मात्र तीन सौ बूचड़खाने थे
छत्तीस हजार अड़तीस
का आंकड़ा हमने ही तो
छुआ
बापू यह सुनकर
रो पड़े
मुश्किल से हो पाये खड़े
भर्राई आवाज में
किसी तरह बोले
बेटा अहिंसा ही
मेरे देश का प्राण है
और आज
भ्रष्टाचार हिंसा में डूबा
घायल हिन्दुस्तान है।
शाश्वत सत्य
क्षमा - भूल को भूल जाना ही क्षमा है।
मार्दव - सम्मान प्रिय और अपमान अप्रिय लगने का कारण मान है।
आर्जव - टेढ़ा चलने वाला सीधे मार्ग पर नहीं चल सकता।
शौच - लोभ अपूर्णता का कारण है लोभी, लोभ छोड़े बिना, परिग्रह संग्रह द्वारा
तृप्ति चाहता है।
सत्य - असत्य चंचलता है क्योंकि उसकी मृत्यु समीप होती है।
संयम - जीवन वृक्ष संयम दुख बिना व्यर्थ है।
तप - तपन बिना भी नहीं निकलता, तप बिना जीव नहीं निखरता।
त्याग - जीवन को अनावश्यक भार उतार देना त्याग है।
आकिंचन्य - अपना कुछ नहीं, इसलिये कुछ अपनाना दुःखद है।
ब्रह्मचर्य - लालसा पर विजय पाना ही ब्रह्मचर्य है।
गृहस्थ गीता
आतिथ्य ही हर घर का वैभव है, प्रेम ही हर घर की प्रतिष्ठा है।
व्यवस्था ही हर घर की शोभा है, समाधान ही हर घर का सुख है ॥
सदाचार ही हर घर की सुवास है, पैसे में सदा वीर का वास है।
ऋण हो ऐसा खर्च मत करो, पाप हो ऐसी कमाई मत करो ॥
क्लेश हो ऐसा मत बोलो, चिंता हो ऐसा जीवन मत जीओ।
रोग हो ऐसा मत खाओ, किसी को दुख पहुँचे ऐसा कार्य मत करो ॥
करते रहिए पाते रहिए
गुरु भक्ति कीजिए, धर्म तत्व स्वतः ही मिल जायेगा।
सच्चे हृदय से प्रार्थना कीजिए प्रसन्नता मिल जायेगी।
माता-पिता की निर्मल सेवा कीजिए लक्ष्मी मिल जायेगी।
दीन की सेवा करने से आनंद अनुभूति मिलेगी।
अपना कर्तव्य पूरा करने से यश मिलता है।
अपनी आलोचना करते रहिए आराधना हो जायेगी।
दान और परोपकार कीजिए अमर हो जाओगे।
बुढ़ापे में
आँख पे तनेगा जाला,
नाक से बहेगा नाला,
लाठी से पड़ेगा पाला,
जरा जिंदगानी में,
बिस्तर पे पड़े-पड़े
थूकते रहोगे तुम,
धोती में मलमूत्र करोगे तुम …
कोई लिखता है
कोई लिखता है हँसने के लिये,
कोई लिखता है किसी को रुलाने के लिये,
कोई लिखकर जीता है जिंदगी अपनी,
कोई लिखता है गम भुलाने के लिये।
किसी के लिखने से बात बुरी हो जाती है,
किसी के लिखने से तबीयत हरी हो जाती है।
बात रह जाती है अधूरी किसी के लिखने से,
किसी के लिखने से दिल पर छुरी चल जाती है ॥
शोशी माचिस
वह जब मायके से ससुराल आयी, सास ने पूछा क्या लाई? बहू बोली पति के लिये घड़ी, देवर के
लिये घड़ी, ननद के लिये लहंगा, देवरानी के लिये कंगन, जेठानी के लिये हार, जेठ के लिये कार
सुनकर सास चकराई मेरे लिये कुछ नहीं लाई। मुस्कुराई बहू सरमाई, कमरे के अंदर गई वहाँ से
स्टोव, शोशी, माचिस ले आई सास मन ही मन मुस्कुराई लेकिन देखकर चकराई दो शोशी और
दो माचिस क्यों लाई, बहू बोली तुम्हारी बेटी हमारी ससुरारी जायेगी तो एक शोशी एक माचिस
साथ में ले जायेगी।
ईश्वर एक परीक्षा है…
यह दुनिया जिसमें आप रहते हैं, परीक्षा भवन है।
यह जीवन उत्तरपुस्तिका है।
समय केवल तीन घण्टे है।
प्रश्नपत्र बंद चुका है जन्म के साथ।
बालकपन समाप्त होते ही पहला घण्टा बज चुका है।
दूसरा घंटा जवानी समाप्त होते ही बज चुका है।
अभी तक आपने अपनी उत्तरपुस्तिका में कुछ नहीं लिखा।
मृत्यु का तीसरा घण्टा बजने वाला है।
क्या फेल होने का डर नहीं।
कल्याण हो जायेगा
माल मत छोड़ो, मालकियत छोड़ दो, कल्याण हो जायेगा।
जिसने जन्म लिया उसकी मौत निश्चित है।
इसलिये मौत नहीं मौत का भय छोड़ दो, कल्याण हो जायेगा।
भोजन अनिवार्य है जीवन जीने के लिये।
इसलिये भोजन नहीं उसकी शुद्धता छोड़ दो, कल्याण हो जायेगा।
नहीं मिलता
लालची को चैन नहीं मिलता, कंजूस को सम्मान नहीं मिलता ॥
पेटू को स्वास्थ्य नहीं मिलता, झूठे को विश्वास नहीं मिलता ॥
कमजोर को इंसाफ नहीं मिलता, शक्की को प्रेम नहीं मिलता ॥
जलनखोर को दोस्त नहीं मिलता, बेअदब को इल्म नहीं मिलता ॥
डरपोक को नाम नहीं मिलता, आलसी को इनाम नहीं मिलता ॥
दहेज में बच्चा
मैंने कहा क्यों जी आप अपने लड़के को शादी की सूची पर क्यों टाँग रहे हैं? दहेज में क्या-क्या माँग रहे हैं? वे बोले बात चल रही है कल ही लड़की वाला आया था पाँच लाख का आँफर लाया था। परन्तु आज कल पाँच लाख से क्या होता है, अरे लड़का जीवन भर लड़की का भार ढोता है। मैंने कहा-हाँ-हाँ क्यों नहीं वैसे लड़का आजकल कर क्या रहा है, वे गर्व से बोले, हमने उसे पढ़ाया है लिखाया है अपने पैरों पर खड़ा हो सके इस काबिल बनाया है। आजकल अच्छा-खासा कमा रहा है, एक दहेज विरोधी संस्था चला रहा है।
बच्चे
खुशबुओं के गुलाब है बच्चे, कितनी आँखों के ख्वाब है बच्चे।
चाँद है आफताब है बच्चे, रोशनी की किताब है बच्चे।
क्या फरिश्ते किसी ने देखे हैं ? कितना अच्छा जवाब है बच्चे।
जिनको संस्कार शुभ मिले हैं वे हर जगह कामयाब है बच्चे।
अपनी मस्ती की राजधानी में अपने मन के नवाब है बच्चे।
जब कभी ये खिलखिलाते हैं ऐसा लगता है मधुवन के सुवास है बच्चे।
पीपल का भूत
रात का सन्नाटा भयावह का घण्टा बारह बजा रहा था।
विशाल पीपल के पेड़ के नीचे बैठा अपनी नई कविता गुनगुना रहा
तभी अचानक पीपल के पेड़ से एक भूत प्रकट हुआ।
रुँआसा नजर आ रहा था। बेचारा बोला “मुझें ले जो माँगेगा है”
परन्तु ध्यान रहे फिर कभी इधर मत आना
और यदि आवे भी तो मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ।
अपनी कविताएँ मत गुनगुनाना।
जहर मिठाई
एक इंसान जिन्दगी में होकर परेशान, जहर की पुड़िया लाया, रात को खाया, सो गया, वह बेचारा शर्मिन्दा था, क्योंकि जहर खाकर भी जिंदा था। परिवार के लोगों ने यह सुना मन में गुना, खुशी से झूमने लगे, कुछ लोग बाजार गये मिठाई खरीद लाये प्यार से उसे मिठाई खिलाई, मिठाई खाते ही उसे मौत की नींद आयी, गजब हो गया, वह बेचारा मौत की गोद में सो गया, परिवार के लोग शर्मिन्दा हैं उन्हें आश्चर्य ये मिला है, यह संसार सचमुच ही गजब ढाता है आदमी जहर खाकर जिंदा रहता है पर मिठाई खाके मर जाता है।
परीक्षा
परीक्षा एक क्रिकेट का खेल है।
जिसमें विद्यार्थी एक बैट्समैन है।
कलम एक बैट है।
चपरासी एक कॉमेंटेटर है।
परीक्षक एक एम्पायर है।
मार्केशीट एक स्कोर है।
फेल होना एक हार है।
कठिन प्रश्न एक गेंदबाज है।
अच्छे उत्तर बल्लेबाजी है।
ताँक-झाँक में पकड़े जाना रनआउट है।
कोरा पेपर छोड़ना क्लीन बोल्ड है।
पेपर में फेंकना अतिरिक्त है।
बहुत अच्छे उत्तर देना चौके छक्के है।
नकल करके पास होना मैच फिक्सिंग है।
प्रभु सन्देश
जब तुम भूख-प्यास से हड़फोगे,
हम जलपान बनके आयेंगे।
तुम जब होगे पथिक,
हम राह बनकर आयेंगे ॥
तुम होगे गहन रोग से पीड़ित,
हम उपचार बनकर आयेंगे।
तुम होगे तपती धूप में बेहाल,
हम छँत्र बनकर आयेंगे ॥
किन्तु जब चरित्र व धर्म से गिर जाओगे।
फिर हमें न पाओगे, तुम लाख बुलाओगे ॥
फिर हमें न पाओगे।…॥
बुझो तो जाने
इसमें बारह साधुओं के नाम छुपे है उनका पता लगाइये-
विजय और जय दो अच्छे मित्र थे। एक बार विजय अपने कुत्ते मोती को लेकर गंगा के
किनारे गया। विजय नीम के पेड़ पर से गिर पड़ा। जय ने तुरंत डॉक्टर ग्रीन को बुलाया। डॉक्टर
ग्रीन ने तुरंत डेटोल लगाया और कहा- अब इसकी तबीयत ओके है। एक बार दोनों मित्र ने अपनी
प्रतिभा का प्रदर्शन किया जिससे दोनों को 501 तथा 555 का नेक मिला। साथ में दो विमान के
टिकट भी मिले। एक दिन उनके जीवन में ऐसी घड़ी भी आई जिससे उनके विमान का एरियल
खराब हो गया तथा उनकी जिंदगी समाप्त हो गई।
- … 2. … 3. … 4. … 5. … 6. … 7. … 8. … 9. … 10. … 11. … 12. …
गुमशुदा की तलाश
दूरदर्शन के
गुमशुदा की तलाश में
एक कवि का फोटो
हर हफ्ते देखकर
मैं चकराया
क्योंकि उस समय वह महाशय
मेरे ही पास बैठे थे
मैंने उससे कहा राम लुभाया
जब तुम हो नहीं छुपे
तो यह विज्ञापन क्यों निकलवाया
वह बोला
इस बहाने से ही सही
मेरा चेहरा टी. वी. पर तो आया।
सेम्पल
एक साथ तीन बच्चे पैदा हुये
पहला बहरा
दूसरा गूंगा और
तीसरा अंधा
नेताजी घबरा गये
ये गांधी जी के तीन बन्दर
मेरे घर में कैसे आ गये
उन्होंने कहा ‘बजरंग बली’
इन भिखारियों को जन्म देने के लिए
तुझे और कोई जगह नहीं मिली
आवाज आयी
आजादी के बाद मिला है
बहरा कानून
गूंगा संविधान और
अंधी योजनायें
बेटे तू बेकार घबड़ाया है
मैंने कोई करिश्मा
नहीं दिखाया है
मैंने तो बच्चों के रूप में
तेरे पास भारत वर्ष का
सिर्फ एक सेम्पल
भिजवाया है।
मजेदार पत्र
आदरणीय
कलाकंद मामा व रस माधुरी मामी
हलवा पूरी, खस्ता कालाजी
चमचमगढ़ जिला- रसगुल्ला
नमस्ते,
इमरती दीदी की शादी पेठानगर में समोसा जी के सुपुत्र खीरचंद के साथ तय हो गयी है। आप सभी विवाह में सम्मिलित होने की कृपा करें। लड्डू भैया और आलू बड़ा चाची को साथ लाएँ। बालूशाही दीदी और पोहा जीजाजी सकुशल होंगे। दहीबड़ा मौसा जी के साथ चमचम मौसी आ चुकी हैं। भजिया फूफाजी और जलेबी बुआ भी कल पहुँच रही हैं। आप लोग गुलाबजामुन पैसेंजर से आइसक्रीम खाते हुए, कपूरचंद स्टेशन पर चायकाल के समय पहुँचने का प्रयत्न कीजिए।
आपकी स्वादिष्ट भाजी
बर्फी
टेलीफोन महान्
मेरा टेलीफोन है कितना महान्, एक नमूना देखिए श्रीमान्।
मैंने घुमाया रेल्वे इन्क्वारी और लग गया कब्रिस्तान ॥
चूँकि मुझे निबंध प्रतियोगिता में जाना था और रेलगाड़ी में
अपना रिजर्वेशन करवाना था। इसलिए मैंने रेल्वे इन्क्वारी
का नम्बर घुमाया पर क्या मालूम वहाँ के कब्रिस्तान के
बाबू ने उठाया बोला फरमाइये! मैंने कहा बस एक सीट
चाहिए। वह बोला बैठे ही आपके लिए है, हमारी सेवा
किस दिन काम आयगी। बेधड़क चले आइये एक क्या
पचास सीटें खाली हैं पूरे खानदान को ले आईये।
महत्त्व
एक पत्नी अपने पति को पत्र लिखती है, लेकिन उसमें वह कहीं भी पूर्ण विराम नहीं
लगाती, अतः पत्र लिखने के बाद जब उसे गलती का अहसास होता है तो वह अंदाज से जल्दी-
जल्दी कुछ पूर्ण विराम लगा देती है। इससे होता है ये कि सारे पत्र का अर्थ ही बदल जाता है,
लेकिन अगर बिन्दु के हिसाब से पढ़ा जाये तो पत्र बिल्कुल सही है। प्रस्तुत है वह पत्र-
प्रिय पतिदेव,
प्रणाम, आपने कितने दिनों से चिट्ठी नहीं लिखी, मेरी प्यारी सहेली कल्पना को। नौकरी से
निकाल दिया है हमारी गाय ने। बछड़ा दिया है दादा जी ने। शराब पीना शुरू कर दी है मैंने। बहुत
घर डाले मगर नहीं आये मुर्गी के बच्चे। भोड़सा खा गया है राशन को चीनी। छुट्टी पर आते वक्त ले
आना एक खूबसूरत औरत। मेरी नई सहेली बन गई है। तुम्हारी भी याद करती है एक पड़ोसन।
मुझे तंग करती है हमारी जमीन। पर गड़े हुए आम हैं ताऊ जी के सिर में। माइनिंग हो गई है मेरे पैर
में। चोट लग गई है तुम्हारी चिट्ठी को। तरसती रहती हूँ हर वक्त।
पारिश्रमिक
महत्त्व
पारिश्रमिक
उन्होंने वादा किया है कि वे कवि सम्मेलनों से जितना भी पारिश्रमिक पाएंगे उसका दस परसेंट स्थानीय साहित्यिक संस्था की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उसके कोष में जमा करायेंगे और फिर …।
एक दिन कवि सम्मेलन से आने के बाद, संस्था के कोषाध्यक्ष ने कहा लाइये जो कुछ मिला है उसका दस परसेंट संस्था में जमा कराइये तो वे चिल्लाने लगे पैर से जूता निकालकर कोषाध्यक्ष के सिर पर बजाने लगे मैंने कहा-अरे-अरे ये क्या कर रहे हैं। आप तो वे बोले तू बीच में मत आओ मैं अपना वादा निभा रहा हूँ, कवि सम्मेलन में मिले पारिश्रमिक का दस परसेंट संस्था के कोष में जमा करा रहा हूँ।
खटका
सर्दी में हतास जुकाम का खटका, मल्लाह को रहता तूफान का खटका।
विद्यार्थी को रहता इम्तिहान का खटका, कंजूस को रहता मेहनत का खटका ॥
निर्बल को रहता बलवान का खटका, दानी को रहता आन का खटका।
रोगी को रहता श्मशान का खटका, चोर को रहता पुलिस का खटका ॥
कंडक्टर को रहता चालान का खटका, सज्जन को रहता अपमान का खटका।
भक्त को रहता भगवान् का खटका, दुकानदार को रहता ग्राहक का खटका ॥
चुटकुले
पहला व्यक्ति - अजी आधी रात गये इतने अंधेरे में कहाँ जा रहे हो ? दूसरा व्यक्ति - आत्महत्या करने।
पहला व्यक्ति - पर हाथ में टार्च क्यों है ?
दूसरा व्यक्ति - इसलिये कि रास्ते में ठोकर न लग जाए। 2.
मुल्जिम - जज साहब आप मेरे कान नहीं कटवाएँ वरना मैं अंधा हो जाऊँगा। जज - क्यों ?
मुल्जिम - क्योंकि मेरे कान काट देने पर मैं चश्मा कहाँ लगाऊँगा। 3.
एक बार एक व्यक्ति बच्चे के साथ बाल कटवाने गया। बाल कटवाकर वह नाई से बोला-तुम बच्चे के बाल काटो, मैं अभी आता हूँ।
बाल कटवाते-कटवाते बच्चा अचानक रोने लगा। तो नाई ने कहा-रो मत तेरे पापा आते ही होंगे। बच्चे ने जवाब दिया-वे मेरे पापा नहीं हैं, मैं तो गली में खेल रहा था। उन्होंने कहा कि मुफ्त में बाल कटवाने हो तो चलो।
यात्री (बस कंडक्टर से) - भाई साहब यह खटारा कब चलेगी ? कंडक्टर (यात्री से) - अच्छी तरह कूड़ा कचरा भर जाने दो। 4.
मेहमान (घर के मुखिया से)- ये क्या बात है कि जब से मैं भोजन करने बैठा हूँ तब से आपका कुत्ता मुझे घूर-घूर कर देख रहा है।
मुखिया - वह तो अपनी प्लेट अच्छी तरह से पहचानता है।
निशांत - मैं अपनी कक्षा में प्रथम आ सकता हूँ। पर एक शर्त है। प्रशांत - क्या शर्त है ?
निशांत - परीक्षा में मेरे सिवा और कोई छात्र सम्मिलित नहीं होना चाहिये। 6.
पागल - डाक्टर साहब आप हमें बहुत अच्छे लगते हैं।
डाक्टर (आश्चर्य से) – क्यों ?
पागल – क्योंकि आप बिल्कुल हमारे जैसे लगते हैं।
- पिता – बेटा आज स्कूल में शैतानी तो नहीं की ?
बेटा – नहीं पिताजी! आज मैं शांति से मुर्गा बना रहा।
- माँ (अपने बेटे रमेश से) – रमेश तुम मन लगाकर पढ़ा करो।
रमेश – मगर माँ आप तो चश्मा लगाकर पढ़ती हो।
-
पिता – बेटा गम न करो। भाग्य में फेल होना लिखा था। सो हो गये। बेटा – तब तो बहुत अच्छा हुआ। यदि मैं मेहनत करता तो सारी मेहनत बेकार हो जाती।
-
संजय – अगर तुम्हें कोई डाँटे तो क्या करोगे ?
अजय – बस कान बंद कर लूँगा।
- माँ (बेटे से)-बेटा ससुराल वाले ट्रांजिस्टर दें तो टेलीविजन माँगना। स्कूटर दें तो कार माँगना।
बेटा – माँ बहू देंगे तो सासू जी को उठा लाऊँगा।
- अध्यापक (छात्र से) – अगर आक्सीजन नहीं होती तो ?
छात्र – किताब का एक पाठ कम हो जाता।
-
ग्राहक – कैसा ताला दिया था तुमने ? ताले में चाबी लगाई तो चाबी टूट गई। दुकानदार – गारंटी ताले की थी चाबी की नहीं।
-
राम (श्याम से) – पहले मच्छर रात में काटते थे लेकिन अब दिन मैं भी काटते हैं। श्याम – हाँ भाई मँहगाई बढ़ गई है इसलिए उनको दिन-रात काम करना पड़ता है। 15. दो मूर्ख एक बार नाव में सफर कर रहे थे। अचानक नाव में छेद हो गया। एक मूर्ख बोला – यार डरने की कोई बात नहीं एक छेद और कर देते हैं। एक से आयेगा और एक से निकल जायेगा।
-
लंबी बहस के बाद अपराधी ने अपना अपराध कबूल कर लिया। तब जज ने पूछा शुरू में तुमने अपना अपराध स्वीकार क्यों नहीं किया ?
अपराधी - माई बाप ! शुरू में ऐसा लग रहा था कि मैं बेगुनाह हूँ पर गवाहों के बयान सुनकर मेरा विचार बदल गया।
- छात्र (गणित के शिक्षक से) - सर आप गणित में बात क्यों नहीं करते ? हमारे अंग्रेजी के शिक्षक अंग्रेजी में बात करते हैं।
अध्यापक – ज्यादा तीन पाँच मत करो नहीं तो दो चार लगा दूँगा तो चेहरा चौकोर हो जायेगा।
- कामचोर पति (पत्नि से) - अभी-अभी मैंने सपने में देखा कि मुझे नौकरी मिल गई।
पत्नि-अच्छा तभी आप थके-थके नजर आ रहे हैं।
- एक मित्र (दूसरे मित्र से) - मैं अमेरिका जाने की सोच रहा हूँ, कितना पैसा लगेगा। दूसरा मित्र – एक भी नहीं क्योंकि सोचने का कोई पैसा नहीं लगता। 20. एक नगर में दो गप्पी पहुँचे-
पहला गप्पी – मेरे पिताजी कुएँ में डुबकी मारते थे और नदी से निकलते थे। दूसरा गप्पी – मेरे पिताजी नदी में डुबकी मारते थे और नल की टोटी में से निकलते थे।
- मालिक ने नौकर को डांट लगाई कि कोई काम करने से पहले कम से कम मुझसे पूछ तो लिया करो।
थोड़ी देर बाद नौकर आया और बोला – मालिक मैंने खिड़की में से देखा कि रसोई में बिल्ली दूध पी रही है अगर आप कहें तो उसे भगा दूँ।
-
पिता (बेटे से) - देखो बेटे, जुआ नहीं खेलते। यह ऐसी चीज है कि यदि इसमें आज जीतोगे तो कल हारोगे, परसों जीतोगे तो अगले दिन हार जाओगे। बेटा (पिता से) – बस पिता जी, मैं समझ गया आगे से मैं एक दिन छोड़कर खेला करूँगा।
-
एक सैनिक – खबरदार जो तुम आगे बढ़े ।
दूसरा सैनिक – आगे नहीं, पीछे तो जा सकता हूँ।
- मरीज (डाक्टर से) - आपने कल जो दवा दी थी,उससे खाँसी तो बंद हो गयी लेकिन सांस रुक-रुक कर आती है।
डाक्टर (मरीज से) - दवाई लेते रहो वह भी बंद हो जायेगी।
- इतिहास के अध्यापक (गणित के अध्यापक से)-यदि अमेरिका भारत पर आक्रमण करे तो आप क्या करेंगे ?
गणित के अध्यापक – मैं अमेरिका के सैनिकों को कोष्ठक में बंद करके शून्य से गुणा कर दूँगा।
- ग्राहक – मैंने जो हाथी दाँत का पेन आपकी दुकान से खरीदा था, वह तो नकली है।
दुकानदार – हद हो गई भाई साहब, मुझे तो पता ही नहीं था कि अब हाथी भी नकली दाँत लगाने लगे हैं।
-
पिता (गुस्सा होते हुए) - तुम्हारी रिपोर्ट पर लिखे इस जीरो का क्या मतलब है ? राजेश – कुछ नहीं पिता जी, टीचर जी शायद इसके पहले गिनती लिखना भूल गये हैं।
-
चंदा माँगने वाली महिलायें - क्या वृद्ध गृह के लिए आप कुछ देंगी ? बूढ़ी महिला – मुझे ही ले चलिए।
-
सुधीर-यार कोतवाली किसे कहते हैं ?
अविनाश – कोतवाल की पत्नी को कोतवाली कहते हैं।
- एक मूर्ख - क्या कहूँ यार, मेरी तो अक्ल ही चली गई।
दूसरा मूर्ख - तू चिंता मत कर मैंने जासूसी कुत्ते छोड़ रखे हैं। 31. मालिक (नौकर से) - तुमने लेटर बाक्स में पत्र डाल दिये ?
नौकर - नहीं हुजूर ।
मालिक - क्यों नहीं डाले ?
नौकर - कैसे डालता लेटर बाक्स में ताला लगा था।
- दुकानदार (ग्राहक से) - आपको कैसे जूते चाहिए ? हल्के या भारी। ग्राहक - जी दोंनो ।
दुकानदार - यानी ।
ग्राहक - यानी कि वजन में भारी कीमत में हल्के।
- शिक्षक मेहनत का फल मीठा होता है, इसका कोई उदाहरण दो।
छात्र - परीक्षा के बाद गर्मियों की छुट्टियाँ हो जाती हैं।
- डाक्टर (रोगी से)-क्या बात है, ट्रक दुर्घटना के बाद से तुम बहुत भयभीत नजर आ रहे हो ?
रोगी-जी। क्योंकि ट्रक के पीछे लिखा था, फिर मिलेंगे।
- शिक्षक - महेन्द्र गर्मियों में पैदा होने वाला कौन-सा फल सबसे मीठा और सबसे खट्टा होता है ?
महेन्द्र - परीक्षाफल ।
- एक आदमी (भिखारी से)- तुम्हें भीख माँगते शर्म नहीं आती। चलो मेरे घर काम करना, मैं तुम्हें पाँच रुपये दूँगा।
भिखारी (आदमी से) - तुम मेरे साथ दिन भर बैठ जाओ, मैं तुम्हें दस रुपये दूँगा। 37. जज-जब तुम्हारा स्कूटर चोरी हुआ, उसी समय तुमने रिपोर्ट क्यों नहीं लिखाई ? व्यक्ति - हुजूर ! मैंने सोचा, चोर स्कूटर की मरम्मत करा ले तभी रिपोर्ट लिखाऊँ। 38. डाक्टर - क्या आप हमेशा हकलाते हैं ?
रोगी - जी…नहीं…सि…सि…सिर्फ बोलते वक्त । 39. एक आदमी चोरी की रिपोर्ट लिखवाने जाता है-
आदमी - साब मेरी रिपोर्ट लिखिये कल रात मेरे घर में चोरी हो गयी। थानेदार – जब चोरी हुई तब क्या बजा था ?
आदमी – साब मेरे सिर पर दो लट्ठ बजा था।
थानेदार – नहीं घड़ी में क्या बजा था ?
आदमी - घड़ी में एक लट्ठ बजा था जिससे वह बंद हो गयी थी।
-
पहला दोस्त – यार आज मैंने दुनिया का सबसे बड़ा भूत देख लिया। दूसरा दोस्त – क्यों ? क्या शीशे के सामने खड़े हो गये थे।
-
गुरु जी (बच्चों से) - स्वर एवं व्यंजन में अंतर बताओ।
शिष्य – स्वर गाया जाता है, व्यंजन खाया जाता है।
- अध्यापक – महात्मागाँधी का जन्म सन् 1869 में हुआ और भारत को आजादी 1947 में मिली तो बताओ मेरी उम्र क्या है ?
अध्यापक के प्रश्न को सुनकर सबसे मूर्ख छात्र बोला - सर आपकी उम्र 40 वर्ष है। अध्यापक बहुत खुश हुआ। अब बताओ क्यों तुम्हें कैसे पता चला। छात्र - सर मेरा बड़ा भाई 20 वर्ष का है जो आधा पागल है।
- मरणासन्न व्यक्ति से एक व्यक्ति कहता है-मरते समय कुछ दान करते जाइये यह परलोक में काम आयेगा।
मरणासन्न व्यक्ति – सबसे बहुमूल्य अपने प्राणों को तो मैं दान कर रहा हूँ। इससे बढ़कर और क्या दान हो सकता है।
- माँ - बेटे रामू ! सबेरे से प्लेट चम्मच लेकर कहाँ जा रहे हो ? रामू - माता जी, कल गुरु जी ने कहा था कि सबेरे उठकर स्वच्छ हवा खाया करो। इसलिए मैं छत पर जाकर प्लेट में हवा रखकर चम्मच से उसे खाने जा रहा हूँ। 45. खाद्य निरीक्षक – रमेश तुमने दूध में पानी मिलाया है, इसीलिए तुम्हारे दूध की जाँच के लिए दूध सेम्पिल हेतु लिया जाएगा।
रमेश – नहीं, इंस्पेक्टर साहब मैंने दूध में पानी नहीं बल्कि पानी में दूध मिलाया है इसीलिये आप मुझे परेशान न करें। दूध में पानी मिलाना अपराध है न कि पानी में दूध मिलाना।
-
गुरुजी (बच्चों से) – लोग रात को खाने के बाद क्यों घूमते हैं ? शिष्य - किसी के पैसे गिरे हों तो सबसे पहले उन्हें मिलें।
-
पापा (बेटे से) - अगर पढ़ाई न हो तो देश का क्या होगा ?
बेटा - छुट्टी होगी।
- टीचर (छात्र से) - सच्चा रास्ता कौन बताता है ?
छात्र (सर से) - सर, ट्रेफिक पुलिस वाले।
- भिखारी (आदमी से) - पाँच दिन से कुछ नहीं खाया कुछ पैसे दे दो। आदमी तोतला था।
आदमी (भिखारी से)- हत्ते कत्ते दिखते हो, तमातर खाओ।
भिखारी (आदमी से)- यहाँ खाने के लाले पड़े हैं आप कह रहे हैं कि टमाटर खाओ। 50. एक पहलवान ने घड़ीसाज से अपनी घड़ी दिखा कर पूछा- इसको सुधारने का क्या लोगे ?
घड़ीसाज ने हंसते हुए कहा- जितने में आपने ली उसका आधा। मैंने दो घूंसे मारकर यह घड़ी ली थी। अब तुम एक घूंसा खाने के लिए तैयार हो जाओ।
-
एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से-तुम दौड़ में हमेशा फर्स्ट कैसे आ जाते हो ? दूसरा व्यक्ति - मैं दौड़ते समय यह सोच लेता हूँ कि पीछे से मेरी बीबी बेलन लिए मुझे मारने दौड़ रही है।
-
शिक्षक (मानीटर से) - कोई ऐसा उपाय बताओ जिससे पूरी कक्षा शांत हो जाए। मानीटर – सर, सब लड़कों को छुट्टी दे दीजिए।
-
पिता- बेटा, अगर तुम हिन्दी में बोलोगे तो 5, अंग्रेजी में बोलोगे तो 10 और संस्कृत में बोलोगे तो 20 पैसे मिलेंगे।
बेटा- डेडी मैं एक पठामि। अब 35 पैसे दीजिए।
-
मुझे नाटक में पगली का रोल करने के लिए कैसा मेकअप करना होगा ? कुछ भी नहीं ? जैसी दिखती हो, वही एकदम ठीक है।
-
बेटा (माँ से) - माँ क्या पीला रंग महंगा मिलता है ? माँ- नहीं तो।
बेटा- मगर पड़ोस वाली आंटी तो कह रही थीं कि बेटी के हाथ पीले करने में लाख रुपये लगेंगे।
- टीचर (छात्र से) - तुम्हारा नाम क्या है ?
छात्र- रूपप्रकाश ।
टीचर (छात्र से) - अंग्रेजी में उत्तर दो ?
छात्र-सर, माई नेम इज फेस लाइट।
-
एक वृद्ध अध्यापिका - मैं जवान हूँ। कौन-सा काल है ? छात्र-जी भूतकाल ।
-
म्यूजियम देखने आई प्रिया को गाइड ने रोका- जिस कुर्सी पर आप बैठी हैं वह रानी रूपमती की है।
मैं बहुत थक गई हूँ । प्रिया बोली- अभी बैठने दो। जब वह आयेंगी तो उठ जाऊँगी। 59. शिक्षक (छात्र से) – दाँतों तले ऊँगली दबाने का वाक्य बनाओ ? छात्र- मासाब जिनके दाँत नहीं हैं वे कहाँ ऊँगली दबायेंगे। 60. रोगी (डाक्टर से) - ऐसी दवाई दो जिससे मैं अमर रहूँ। डाक्टर (रोगी से)- एक काम करो तुम अपना नाम अमर रख लो क्योंकि ऐसी दवाई तो आज तक नहीं बनी है।
-
टीटू (दोस्तों से) - मैं जब मेरे पापा के साथ शिकार पर गया था तो वहाँ पर मैंने टाइगर की पूँछ काट दी। पहला दोस्त-लेकिन तुमने उसे जान से क्यों नहीं मारा? टीटू कैसे मारता ? उसे तो हमसे पहले ही कोई मार गया था।
-
अध्यापक- टिंकू, तुम्हारी शरारतों के कारण पिछले काफी दिनों से मेरा सिर फट रहा है। मुझे घर आकर तुम्हारे पापा से मिलना पड़ेगा।
टिंकू- क्यों नहीं मैडम, जरूर आइए। मेरे पापा डाक्टर हैं वह आपके फट रहे सिर को टांकों से सिल देंगे।
- पवन- क्या तुम्हें अंग्रेजी बोलने में परेशानी होती है ?
राजू- नहीं अगर सुनने वाले को होती हो तो पता नहीं।
- नीरज (रमेश से) - तुम्हारे पिता जी क्या काम करते हैं ?
रमेश- लोगों में सुख-दुःख बांटते हैं।
नीरज- अरे वाह, क्या वे भगवान् हैं ?
रमेश- नहीं ? पोस्टमेन हैं।
- महेश (अपने मित्र से)- मेरे पैर में चोट आने के कारण मैं चल नहीं सकता। इसलिए आज स्कूल नहीं आऊँगा।
मित्र- अरे कोई बात नहीं, कम से कम स्कूल जाकर एप्लीकेशन तो दे दो। 66. भिखारी-भगवान् के नाम पर कुछ देदो बाबा।
विवेक-तुम्हारे पास 100 के छुट्टे हैं ?
भिखारी-हाँ, क्यों नहीं।
विवेक- तो पहले जाकर उन्हें खर्च करो।
- एक चींटी दौड़ी-दौड़ी जा रही थी तो दूसरी चींटी ने पूछा- कहाँ जा रही हो ? चींटी बोली- मेरे दोस्त हाथी का एक्सीडेन्ट हो गया है, मैं उसे खून देने जा रही हूँ। 68. एक चींटी सड़क पर फैलकर खड़ी थी। दूसरी चींटी ने कहा-तुम ऐसे क्यों खड़ी हो ?
चींटी ने कहा- कल मुझे हाथी ने धक्का दिया था, आज मैं उसे धक्का दूँगी।
- आजकल मेरे पिताजी के आगे सब सिर झुकाते हैं।
कौन से आफीसर हैं ?
उन्होंने हज्जाम का काम शुरू कर दिया है।
- कवि सम्मेलन में एक भीमकाय कुरूप कवि गीत पढ़ रहे थे।
पहली पंक्ति थी- तुमने क्यों मंगाई मेरी तस्वीर।
तभी एक श्रोता बोला- बच्चों को डराने के लिए।
- अगर आज मेरा कर्जा चुका दे तो आपका अहसान होगा।
लेकिन आज आप गलत वक्त पर आये हैं।
तो कब आऊँ, मैं घर पर न रहूँ तब।
-
पागलखाने में एक बार चर्चा छिड़ गई सबसे बड़ा पागल कौन है ? काफी हल्ले के बाद तय हुआ सबसे बड़ा पागल डाक्टर है। क्यों ? कुछ ने शंका व्यक्त की। अरे अच्छा भला पागलों के बीच रहता है।
-
अध्यापिका (छात्र से) - तिनके का बहुवचन क्या है ?
छात्र- झाडू ।
- एक दोस्त (दूसरे दोस्त से) - अपनी भूलने की आदत से बहुत तंग आ गया हूँ। अब इस उम्र में सब कुछ याद रखना बहुत मुश्किल होता है। बाजार चार चीजें लाने जाता हूँ तो 2 लेकर आता हूँ, दो भूल जाता हूँ।
दूसरा दोस्त- मेरे साथ तो और भी दिक्कत वाली बात है सीढ़ियाँ चढ़ रहा होता हूँ तो आधी सीढ़ियों में रुककर सोचता हूँ कि मैं चढ़ रहा था या उतर रहा था। 75. धीरज (पिता से) - मैं बड़ा होकर पायलट बनूंगा।
पिता (धीरज से)- यह तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन इंटरव्यू में अगर तुमसे पूछा गया कि विमान चलाते वक्त तुम्हारा विमान खराब हो जाए तो तुम क्या करोगे, इस सवाल का तुम क्या जवाब दोगे ?
धीरज (तपाक से) - सभी यात्रियों को उतार कर पीछे से धक्का लगाने को कहूँगा। 76. महेश (सुरेश से) - यार भगवान् ने तुम्हें मुझसे पहले क्यों पैदा किया ? सुरेश- मुझे क्या पता … ?
महेश- अरे यार, इतना भी नहीं समझता, भगवान् एक मास्टरपीस बनाने से पहले एक मॉडल जो बनाकर देखना चाहते थे।
- माँ (पुत्र से)- बेटे, मैंने कहा था कि अगर तुम पास हो जाओगे तो मैं तुम्हारे लिए साइकिल खरीद दूंगी। मगर तुम फिर भी फेल हो गए।
पुत्र- सब आपकी वजह से हुआ है।
माँ- कैसे ?
पुत्र- मैं साइकिल चलाना सीख रहा था।
- एक पाँच वर्षीय बालिका अपने पिताजी को बता रही थी- पापा आज मैं स्कूल में बहुत जोर से गिर पड़ी थी।
पिताजी- अच्छा, फिर तो तुम बहुत जोर से रोई होगी।
बालिका- कहाँ पापा, टाइम ही नहीं मिला। गिरते ही छुट्टी की घंटी बज गई थी। 79. सोनू-पापा, क्या आप अंधेरे में अपने हस्ताक्षर कर सकते हैं ? पापा- हाँ, पर इसकी जरूरत क्या है ?
सोनू- क्योंकि, मैं अपने रिपोर्ट कार्ड पर हस्ताक्षर करवाना चाहता हूँ। 80. एक लड़का साइकिल सीखने के बाद अपने दोस्तों को बता रहा था- ऐ राजू देख मेरे हाथ हैंडिल पर नहीं हैं। थोड़ी देर बाद बोला- ऐ राजू मेरे पांव पैडल पर नहीं हैं।
तभी वह धड़ाम से गिर पड़ा तो राजू ने कहा- देख तेरे दाँत भी मुंह में नहीं हैं। 81.
एक आदमी ने आकर नंदू से पूँछा- क्यों तेरे पापा घर में हैं ? हाँ पापा घर में ही हैं। नंदू ने कहा।
उस आदमी ने पूरा घर छान मारा पर पापा नहीं दिखे। इस पर उसने कहा- क्यों रे, तू झूठ बोलता है ?
नंदू ने जवाब दिया मैं झूठ नहीं बोलता, मैंने तो सच ही कहा कि पापा घर में हैं। पर मैंने ये कब कहा कि ये घर मेरा है।
एक जंगल में एक हाथी रहता था। वह जहाँ भी जाता वहीं तबाही मचा देता था। एक बार हाथी को आता देख सभी चूहे बिल में घुस गए। एक चूहे ने पैर बाहर निकाल रखा था। दूसरे ने इसका कारण पूछा तो उसने कहा कि जब हाथी यहाँ से जाएगा तो मैं उसको तगड़ी अड़ा दूंगा।
एक पागल हाथी जंगल में बैठे चूहों के पीछे भागने लगा तभी सभी चूहे पेड़ पर चढ़ गए तभी एक चूहा गलती से पेड़ से गिर गया और सीधे हाथी के पीठ पे जाकर गिरा तभी दूसरे चूहे ने कहा-दबा साले को दबा।
पिता- बेटे, तुम इतिहास में फेल क्यों हुए ?
बेटा- पिताजी, मैं क्या करूँ सभी प्रश्न उस समय के पूछे गए थे जब मैं पैदा भी नहीं हुआ था।
अध्यापक- मैंने तुम्हें आम का चित्र बनाकर लाने कहा था, तुम आम उठा लाए। छात्र- चित्र बनाने में अधिक समय लगता और अच्छा भी नहीं बनता। 86.
पति- हरा सूट और लाल टाई पहनकर अपनी पत्नी से कहता है कि मैं कैसा लग रहा हूँ ?
पत्नी- एकदम मिड्डू की तरह।
- जज (चोर से) - तुम जानते हो, झूठ बोलकर कहाँ जाओगे ?
चोर- नरक में।
जज- और सच बोलकर ?
चोर- जेल में।
- किसान- डॉक्टर के पास जाकर बैठ जाता है।
डॉक्टर- व्हाट हैप्टेन्ड ?
किसान- (क्यों न मैं भी अंग्रेजी में बोलूं सोचते हुए)- काउज हसबैन्ड मारिंग सिंगड़ा माइ टंगड़ा सो आई एम लंगड़ा।
- पिता (पुत्र से)- बेटा, प्रश्नपत्र कैसा था ?
पुत्र- जी लाल रंग का।
- मास्टरजी- रवि, तुम्हें यह सोचकर आश्चर्य नहीं होता कि अंडे में से बच्चे कैसे निकलते हैं ?
रवि- होता हैं सर, पर उससे ज्यादा यह सोचकर होता है कि वे उसके अन्दर घुसते कैसे हैं।
- पहला मित्र- यार चल बाहर ठंड़ी हवा खाके आते हैं।
दूसरा मित्र- नहीं यार, आज मेरा उपवास है।
- एक आदमी- ट्रेन की भीड़-भाड़ में खड़ा रहता है। वह मन ही मन सोचता है क्यों न भीड़ कम की जाए। उसने अपनी जेब से नकली साँप निकाल कर ट्रेन के डिब्बे में डाल दिया उस सांप के कारण वह डिब्बा खाली हो गया।
उसे जबलपुर से नरसिंहपुर जाना था। वह यह सोचकर सो गया कि कल सुबह के 8 बजे वह नरसिंहपुर स्टेशन पहुँच जाएगा। सुबह जब वह उठा तो आवाज आई- चाय वाला, चाय वाला उसने चाय वाले से पूछा क्यों भाई यह कौन-सा स्टेशन है। वह बोला भाई यह तो जबलपुर स्टेशन है। रात में इस डिब्बे में साँप था। इसलिए इस डिब्बे को काट दिया गया था।
- माँ- बेटी क्या कर रही हो ?
बेटी- भैय्या को पत्र लिख रही हूँ।
माँ- लेकिन तुझे तो लिखना आता नहीं।
बेटी- तो भैय्या को कौन-सा पढ़ना आता है।
- लखन (नानाजी से) - नानाजी, आपके सिर के बाल तो सफेद हैं लेकिन मूँछों के बाल काले क्यों हैं ?
नानाजी- बेटा, क्योंकि मूँछों के बाल सिर के बालों से 18 साल छोटे हैं। 95. एक लड़का- मेरे पिताजी प्रतिदिन हजारों लोगों को खाना खिलाते हैं। दूसरा लड़का- तो फिर तुम्हारे पिताजी बहुत बड़े आदमी होगें। पहला लड़का- नहीं यार, वो तो एक होटल में वेटर हैं।
- रामू अपनी माँ से कहता है- माँ मैने आज कक्षा में कमाल कर दिया। माँ - वह कैसे ?
रामू- सर, ने एक सवाल पूछा और पूरी कक्षा में उसका उत्तर सिर्फ मैंने दिया। माँ- सवाल क्या था, बेटे ?
रामू- कक्षा का काँच किसने तोड़ा ?
माँ- तो तुमने क्या कहा ?
रामू - मैंने कक्षा का काँच तोड़ा।
- तीन लड़के आपस में बात करते हैं।
पहला कहता है- मेरे पिताजी की चाय की दुकान है इसलिए मैं रोज चाय पी कर आता हूँ।
दूसरा कहता है- मेरे पिताजी की मिठाई की दुकान है इसलिए मैं रोज मिठाई खाकर आता हूँ।
तीसरा कहता है- मेरे पिताजी की जूते की दुकान है इसलिए मैं रोज जूते खाकर आता हूँ।
-
नवाब साहब अपनी आलीशान कोठी अपने एक दोस्त को दिखाते हुये कह रहे थे- यह गर्म पानी का स्वीमिंग पुल है और यह ठंड़े पानी का और यह तीसरा, दोस्त ने पूछा- हाँ, यह खाली रहेगा। यह उन लोगों के लिये है जो तैरना नहीं जानते । नवाब साहब ने बताया।
-
बंटी- तुम आकाश के तारे गिन सकते हो ?
चिंटू- अभी तो अंधेरा है। दिन में गिनकर बताऊँगा।
- पवन (भिखारी से)- ये लो 1 रुपया कुछ खा-पी लेना।
भिखारी- माफ करना बाबूजी, मैं लंच टाइम में भीख नहीं लेता।
- एक बच्चा कुत्ते को परेशान कर रहा था। तभी वहाँ कुत्ते का मालिक आ गया और गुस्से में बोला अगर तुम मेरे कुत्ते के कान खीचोगे तो मैं तुम्हारे कान खीचूंगा, अगर बाल खीचोगे तो मैं भी तुम्हारे बाल खीचूंगा।
बच्चा- अगर मूँछ खीचूं तो ?
- पति (पत्नि से) - अरे मेहमान आने वाले हैं और घर में झाडू तक नहीं लगी है। पत्नि- तुम्हीं ने तो कहा था कि जब तक मैं हूँ तुम्हें फिक्र करने की जरूरत नहीं है। 103. अध्यापक- बच्चों, सबसे कड़वा खाना कौन-सा है ?
बच्चे- सर, मार खाना।
- पुत्र (पिताजी से)- आप कहते हैं कि ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए ? पिताजी - हाँ बेटा।
पुत्र- इसलिए मैंने गणित में सौ में से दो ही अंक प्राप्त किए हैं। 105. एक आदमी सड़क पर चल रहा था, लेकिन ऊपर आसमान की ओर देख रहा था। चौराहे पर खड़े सिपाही ने उसे रोककर कहा-भाई, कहाँ जाता है ? उसने कहा- सामने बाजार में।
तो उधर ही देखो नहीं तो वही चले जाओगे जहाँ देख रहे हो। पुलिस ने समझाया। 106. शिक्षक- राम जहाँ वर्षा अधिक होती है वहाँ सबसे ज्यादा क्या उत्पन्न होता है ? राम- सर, कीचड़।
- शिक्षक (छात्र से)- तुम्हारा नाम क्या है ?
छात्र- जी सूर्यप्रकाश ।
शिक्षक- तुम्हारे पिताजी का क्या नाम है ?
छात्र- जी चन्द्रप्रकाश ।
शिक्षक- अब दोनों नाम अंग्रेजी में बोलकर बताओ ?
छात्र- माय नेम इज सन लाईट, माई फादर्स नेम इज मून लाईट । 108. शिक्षक-बेटे बताओ तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो ? छात्र- मास्टर जी मैं बड़ा होकर म्यूजिक डायरेक्टर बनना चाहता हूँ। शिक्षक- बताओ बेटे तुम्हारा फेवरेट म्यूजिकल इन्सटुमेन्ट क्या है ? छात्र- मास्टर जी मेरा फेवरेट म्यूजिकल इन्सटुमेन्ट स्कूल की घंटी है जब वह बजती मैं खुशी से पागल हो जाता हूँ।
- अध्यापक-मोहन बताओ, अक्ल बड़ी की भैंस ?
मोहन-सर, पहले आप उन दोनों की डेट आफ बर्थ तो बताइए।
- रीता- पिंकी तुम्हें जन्मदिन पर सबसे अच्छा गिफ्ट कौन-सा मिला ? पिंकी- यह बाजा।
रीता- पर यह सबसे अच्छा कैसे है ?
पिंकी- क्योंकि इसे न बजाने के लिए मेरी मम्मी मुझे 10 रुपये देती है। 111. गणित के शिक्षक- कल मैं तुम लोगों से एक सवाल पूँछूगा। सब के सब तैयारी करके आना।
दूसरे दिन टीचर ने पूछा- बताओ तुम्हारे सिर पर कितने बाल हैं ? एक छात्र- दो करोड़ साठ लाख पाँच हजार दो सौ इक्यावन सर । शिक्षक- यह तुमने कैसे गिने ?
छात्र- यह तो दूसरा सवाल हो गया सरजी, आपने तो एक ही सवाल की तैयारी करके आने को कहा था।
- दो किसान आपस में बातचीत करते हैं।
पहला किसान- दूसरे किसान से कहता है कि जैन लोग इतने धनी क्यों होते हैं ? दूसरा किसान- क्योंकि जैन लोगों के भगवान् लक्ष्मी जी को यहीं पर छोड़ गए हैं जबकि अपने भगवान् लक्ष्मी जी को लेकर क्षीरसागर में बैठे हुए हैं। 113. शिक्षक (छात्र से)- बच्चो बताओ सत्य एवं भ्रम में क्या अंतर है ? छात्र- सर आप पढ़ा रहे हैं, ये तो सत्य है परन्तु यदि आप समझते हैं कि हम पढ़ रहे हैं तो ये भ्रम है।
-
पत्नि (पति से) - कॉलेज लाइफ का तुम्हारा कोई कटु अनुभव है ? पति- हाँ मेरी और तुम्हारी पहली मुलाकात वहीं हुई थी।
-
एक बार एक व्यक्ति नई घड़ी खरीदता है। चार दिन बाद उसकी घड़ी बंद हो जाती है तो वह घड़ी खोलकर देखता है तो उसमें एक मरा हुआ मच्छर मिलता है तो वह रोने लगता है, दूसरा व्यक्ति उससे रोने का कारण पूछता है तो वह कहता है मेरी घड़ी का चालक मर गया है।
-
एक बार तीन व्यक्ति मरने के पश्चात् नरक में जाते हैं, एक अमेरिका का, दूसरा भारत का तथा तीसरा पाकिस्तान का। तीनों व्यक्ति वहाँ से अपने-अपने देश में बात करने को कहते हैं। अमेरिका वाला व्यक्ति टेलीफोन से बात करता है तो उसका बिल 100 रुपया आता है। भारत का व्यक्ति बात करता है तो उसका बिल 500 रुपया आता है जब पाकिस्तान वाला व्यक्ति बात करता है तो कोई बिल नहीं आता है वह एस. टी. डी. के कर्मचारी से पूछता है ऐसा क्यों ? तो कर्मचारी कहता है- नरक से नरक मुफ्त है।
-
निशा (माँ से) - मम्मी, आज में स्कूल नहीं जाऊँगी।
मम्मी- क्यों बेटी ?
निशा- कल स्कूल में हमारा वजन तौला गया था। मुझे डर है कि आज हमें बेच न दें।
- एक मूर्ख दूसरे मूर्ख से- यार नाव तो डूब रही है।
दूसरा मूर्ख- डूबने दो नाव अपनी तो है नहीं यह तो किराये की है। 119. एक लड़के के घर में हवन होता है। पंडित जी कहते हैं कि बच्चे इस आग में दो लड्डू डालो और कहो स्वाहा।
लड़का दोनों लड्डू अपने मुँह में डालता है और कहता है-आहा। 120. एक आदमी- मेरी बकरी आठ ऊन के गोले खा जाती है।
दूसरा आदमी- अच्छा होगा जब उसके बच्चे होगें तब स्वेटर पहने होगें। 121. बृजेश- क्या बात है संदीप आज तुम गिलास से नहा रहे हो ? संदीप- क्या बताऊं यार आज नल नहीं आये हैं और मुझे देर तक नहाने की आदत है।
बृजेश- तो चम्मच से क्यों नहीं नहाते, दिन भर आराम से नहाते रहना। 122. रिंकू- शादी के कुछ ही दिनों बाद मैं लखपति बन गया। संटू- तब तो तुम्हारी पत्नी बड़ी भाग्यशाली है ?
रिंकू- लेकिन मैं शादी के पहले करोड़पति था।
- पहला आदमी- अगर तुमने गड़बड़ की तो मैं तुम्हारी खाट खड़ी कर दूँगा। दूसरा आदमी- तुम मेरी खाट खड़ी कर ही नहीं सकते।
पहला आदमी- क्यों नहीं कर सकता ?
दूसरा आदमी- क्योंकि मैं सोता जमीन पर हूँ।
- मालिक (नौकर से)- कल मुझे जल्दी दफ्तर जाना है इसलिए सुबह छह बजे जरूर जगा देना।
नौकर- ठीक है मालिक, लेकिन मुझे घड़ी देखनी नहीं आती, जब छह बज जाएं तो मुझे आप बता देना, मैं आपको जगा दूँगा।
- माँ ने रोहन को बाजार भेजा और हिदायत देते हुए कहा- बेटा, जरा ध्यान से सामान खरीदना कहीं दुकानदार तुम्हारी आँखों में धूल न झोंक दें ?
इस पर रोहन ने कहा- माँ तुम चिंता मत करो, दुकान पर चढ़ने से पहले ही चश्मा लगा लूंगा।
- परीक्षा देकर निकले रोहन ने सोहन से पूछा- कैसा रहा तुम्हारा पेपर ? सोहन- मैंने तो कुछ लिखा ही नहीं। सादी कॉपी जमा कर दी। तुम्हारा कैसा रहा ? रोहन- मैंने भी बिना कुछ लिखे कॉपी जमा कर दी।
सोहन- यार फिर एग्जामिनर सोचेगा हमने नकल की है।
- क्लास में संस्कृत के अध्यापक ने बच्चे से पूछा रमेश जरा बताओ तो तमसो माँ ज्योतिर्गमय का हिन्दी में अनुवाद क्या होगा ?
रमेश ने कुछ देर सोचने के बाद कहा- सर, इसका अर्थ हुआ कि तुम सो जाओ माँ में ज्योति के घर जा रहा हूँ।
-
क्लास में टीचर ने एक छात्रा को नकल करते हुए पकड़ा और उसको कहा- तुमने जितनी मेहनत इन नकल की पर्चियों को बनाने में की है। अगर उतनी पढ़ाई करने में की होती तो अवश्य पास हो जाती। इस पर छात्रा ने कहा-जी मैं मेहनत से जी नहीं चुराती।
-
कल्पना ने अपनी सहेली रमा से कहा- पत्नि अक्सर अगले जन्म में वही पति पाना चाहती है पर क्यों ?
रमा ने कहा- जिससे उस पति को सुधारने की कड़ी मेहनत बेकार न जाए। 130. एक शराबी लपककर बस में चढ़ा और एक पादरी के बगल में बैठ गया। पादरी ने शराबी की हालत देखकर दुखी होते हुए कहा-बेटे तुम नहीं जानते कि तुम सीधे नरक की तरफ जा रहे हो।
यह सुनते ही शराबी खड़ा हो गया और चिल्लाया-ड्राइवर बस रोको, मैं गलत बस में चढ़ गया हूँ।
- मम्मी (बेटे से)- बेटा गोली खा ले।
बेटा- मैं नहीं खाऊँगा।
मम्मी- मम्मी लड्डू में गोली रखकर कहती है ले बेटा लड्डू खा ले मैं बाजार जा रही हूँ।
बेटा- मम्मी खा लिया मगर गुठली थूक दी।
- लेखक और कवि में क्या अंतर है ?
जो फर्क तंगी और फटेहाली में है।
-
कवि सम्मेलन में एक कविवर बार-बार पानी मांग कर पी रहे थे। इस पर दूसरे कवि ने आहिस्ता से पूछा- आज क्या खाकर आए हैं कि इतना पानी पी रहे हैं। बीबी की गालियाँ उत्तर मिला।
-
शिक्षक कक्षा में गेहूँ की फसल के विषय में पढ़ा रहे थे। लखन शिक्षक की बातें न सुनकर सो रहा था।
शिक्षक की नजर लखन पर पड़ते ही उन्होंने पूछा- बताओ लखन गेहूँ सबसे अधिक कहाँ उगाया जाता है ?
लखन- जी खेत में।
- रानी अपनी सहेली के घर मिलने आई। उससे हाल-चाल पूछा और बोली-सुना है तुम्हारे पति को नींद में चलने की आदत है ?
सहेली बोली- हाँ आदत तो है पर थोड़ी दूर चलकर वापस आ जाते हैं। 136. यात्री (बस ड्राइवर से)- इस खतरनाक मोड़ पर सावधान का बोर्ड लगा था वो कहाँ गया ?
ड्राइवर- पिछले दो वर्षों से कोई दुर्घटना नहीं हुई तो उसे हटा दिया। 137. एक मरीज अपने असहनीय दर्द से तड़पते हुए चीखता है-हे ईश्वर जल्दी से यमराज को भेज दो।
डॉक्टर (दूसरे कमरे से ही)- घबराओं नहीं मैं आ रहा हूँ।
- एक डॉक्टर की नेम प्लेट पर नाम के नीचे उसकी डिग्री-पी. पी. एम. एफ. लिखी थी।
मरीज ने पूछा इसका क्या मतलब है ?
डॉक्टर साहब ने बताया कि प्राईमरी पास और मिडिल फेल।
- एक सज्जन दुकान पर छतरी खरीदने गये, छतरी पसंद कर दुकानदार से पूछा कि कितने साल तक चलेगी ?
दुकानदार ने कहा- बाबू जी इसे पानी और धूप से बचाकर रखना सालों साल चलेगी।
- रिक्शा चालक से एक युवती ने कहा- भइया, जल्दी चलो वरना टी. वी. पर चित्रहार निकल जाएगा।
तब रिक्शा चालक बोला- बहन जी रिक्शा ज्यादा तेज चलाया तो मेरे चित्र पर हार चढ़ जाएगा।
- बेटे ने पापा से कहा- पापा, पापा इस बार आप हमें क्या दिलवाएँगे ? तब पापा बोले बेटा पास हुए तो साइकिल और यदि फेल हुए तो रिक्शा। 142. बाप ने बेटे को किसी बात पर डाँटा और कहा- गधा कहीं का, इससे कुछ भी नहीं बनता।
तब बेटा बाप से बोला- पापा समझ में नहीं आता जब आप डाँटते हैं तो गधा कहते हैं और टीचर जब डाँटती हैं तो गधे का बच्चा कहती हैं। तो मैं क्या हूँ? 143. माँ बेटे को डंडा दिखाते हुए कहती है- ठहर जा अभी बताती हूँ। बेटा जाकर खटिया के नीचे छिप जाता है पिता बेटे को आवाज देते हुए आते हैं। खटिये के नीचे देखते हैं तो बेटा कहता है- पापा, पापा आ जाओ, माँ डंडा लेकर आ रही है।
- पापा (बेटे से)- तुम्हें पता है जब जवाहरलाल नेहरू तुम्हारी उम्र के थे तो अपनी क्लास के मॉनीटर थे।
बेटा-हाँ पापा जानता हूँ और आपको मालूम है कि वे जब आपकी उम्र के थे तो भारत के प्रधानमंत्री थे।
- लखन- पापाजी आपकी दाल ?
पापा- कितनी बार समझाया है कि भोजन करते समय बातें नहीं करते हैं। भोजन करने के पश्चात् हाँ लखन क्या कह रहे थे तुम ?
लखन- पापाजी आपके दाल में मक्खी गिर गई थी।
- मोदीजी अपने पालतू कुत्ते की तारीफ करते हुए कह रहे थे-यह बहुत समझदार है सुबह उठते ही दरवाजे से अखबार लाकर देता है, बच्चों को स्कूल तक छोड़कर आता है। पत्नि के साथ बाजार खरीदी करने साथ में जाता है।
एक ने कहा- सेठ जी, मैंने सुना है कि आप कुत्ते को बेच रहे हैं। क्यों ? मोदी जी - कल रात को हमारे घर में चोरी हुई तो यह टार्च लेकर चोरों को रास्ता बता रहा था।
- पवन की शादी होने के कुछ दिन बाद ही उसे उसका दोस्त सौरभ मिला। उसने पवन के हाल-चाल पूछे ।
पवन - मेरी पत्नि मुझे रोज बर्तन मारती है फिर भी हम दोनों बहुत खुश हैं। सौरभ - कैसे खुश हो ?
पवन – जब उसका निशाना लग जाता है तो वो खुश होती है और जब उसका निशाना सही नहीं लगता तो मैं खुश हो जाता हूँ।
- जज (चोर से) - तुमने एक ही दुकान पर बार-बार चोरी क्यों की ? चोर – साड़ियाँ तो मैंने पहली बार ही चुरा ली थी। तीन बार उन्हें बदलने के लिए जाना पड़ा, क्योंकि मेरी पत्नि को साड़ी पसंद नहीं आ रही थीं। 149. एक यात्री – यहाँ पास में कोई कब्रिस्तान है ?
कुली – जी नहीं।
यात्री (परेशान होकर)- तो फिर जो यात्री ट्रेन की प्रतीक्षा करते-करते मर जाते हैं उन्हें कहाँ दफनाया जाता है ?
- ग्राहक - यह कैसा चित्र है ?
चित्रकार – गन्ने खाते हाथियों के झुंड का।
ग्राहक – गन्ने कहाँ हैं ?
चित्रकार – गन्ने तो हाथी खा गये।
ग्राहक - और हाथी भी तो नहीं दिख रहे।
चित्रकार – हाथी तो गन्ने खाकर चले गये।
- यातायात पुलिस तेजी से कार चला रहे युवक का पीछा करते हुए चालक से पूछती है-इतनी तेजी से कार क्यों चला रहे हो ?
चालक – सर, मेरी कार के ब्रेक फेल हो गये हैं। कोई दुर्घटना घटे इसके पहले जल्दी से घर पहुँचना चाहता हूँ।
- ग्राहक (दुकानदार से) - आपने कहा था कि यह घड़ी जिंदगी भर खराब नहीं होगी लेकिन ये तो एक वर्ष में ही खराब हो गई।
दुकानदार - मुझे क्या पता था आपकी उम्र इतनी लंबी है।
- अध्यापक (छात्र से) - अगले जन्म में तुम क्या बनना चाहते हो ? छात्र - सर जिराफ।
अध्यापक – क्यों ?
छात्र – ताकि आप हमें थप्पड़ न मार सकें।
- सौरभ - पिता जी, मुझे इस बार स्कूल में चार पुरुस्कार मिले। पिता जी - बड़ी अच्छी बात है बेटा। किन-किन बातों के लिए पुरुस्कार तुम्हें दिये गये हैं ?
सौरभ – एक अच्छी हाजिरी के लिए, दूसरा अनुशासन के लिए, तीसरा अच्छी स्मरण शक्ति के लिए मिला है।
पिता जी – और चौथा पुरुस्कार किसलिए ?
सौरभ – मुझे याद नहीं आ रहा है।
- पिता - लखन, आज का पेपर कैसा गया ?
लखन – केवल एक प्रश्न गलत हुआ।
पिता – बहुत बढ़िया, शेष प्रश्न सभी सही हैं ?
लखन – वो मैंने किये ही नहीं।
-
अध्यापक (छात्र से)-वस्तु गर्म होकर फैलती है, उसका एक उदाहरण दीजिए। छात्र – सर, गर्मियों में हमारी छुट्ठियाँ डेढ़ महीने की होती हैं जबकि सर्दियों में केवल 7 दिन की होती हैं।
-
एक बार राबड़ीदेवी, लालू को क्लिंटन के पास अंग्रेजी सीखने अमेरिका भेजती है। लालू कई दिनों तक भारत वापस नहीं आये तो राबड़ी देवी ने अमेरिका फोन करके पूछा - हैलो, ललुआ हैं का ?
उधर से जवाब आता है - ललवा तो नहीं है, हम क्लिंटनवा बोलत हैं। कहत कछु काम है का ?
- मोटी औरत - डाक्टर साहब मैं पतली होना चाहती हूँ।
डाक्टर - 100 गोली की दवाई वाली शीशी देते हैं।
महिला – इन्हें कब व कितनी गोली खाना है ?
डाक्टर – ये गोलियाँ आपको खाना नहीं हैं, इन्हें दिन में पचास बार जमीन पर बिखेरना और एक-एक कर शीशी में भरना है।
- भिखारी - अंधे को कुछ दे दो बेटा।
लखन – क्या सबूत है कि तुम अंधे हो ?
भिखारी - क्या तुम्हें सामने की ये बड़ी बिल्डिंग दिखाई देती है ? लखन – हाँ।
भिखारी – पर मुझे नहीं दिखाई देती है।
- वकील ने अपने मुवक्किल को निर्दोष साबित करने के लिए फाइल जज की ओर बढ़ाते हुए कहा-योर ऑनर, इसमें वे सबूत हैं जिनसे साबित होता है कि मेरा मुवक्किल निर्दोष है।
जज ने फाइल खोली उसमें हजार-हजार के दस नोट थे।
जज ने कहा - ठीक है लेकिन ऐसे कम से कम दस सबूत और पेश करो। 161. भिखारी - बाबू जी एक पैसा दे दो।
बाबू जी - भाई एक पैसे से क्या मिलेगा ? ज्यादा क्यों नहीं माँगते हो ? भिखारी - बाबू जी मैं आदमी की हैसियत देखकर माँगता हूँ।
- डॉक्टर मरीज को हल्का भोजन खाने की सलाह देते हैं पर दूसरे दिन मरीज की तबियत ज्यादा खराब होने पर पुनः डॉक्टर के पास आता है। डॉक्टर ने पूछा- कल रात को कुछ हल्का भोजन खाया था।
मरीज- हाँ, पकौड़े खाए थे।
डॉक्टर- पर कैसे समझा कि पकौड़े हल्का भोजन होता है।
मरीज- जी कढ़ाई में भारी चीज तेल के नीचे व पकौड़े ऊपर तैर रहे थे। 163. डॉक्टर (मित्र से)- इस जगह क्लीनिक खोलकर मेरा काम बिल्कुल बंद हो गया। मित्र- इसका कारण है बाहर लगा हुआ बोर्ड।
डॉक्टर- क्या मतलब ?
मित्र- बोर्ड पर लिखा है- ऊपर जाने का रास्ता।
- एक पहलवान अपने नए जूते मंदिर के बाहर उतार कर गया। उसी वक्त वहाँ एक चोर आया और उसने जूते में पड़े संदेश को देखा जिसमें लिखा था- ये जूते एक पहलवान के हैं। बहुत खतरनाक हैं। चुराने वाले सोच लें।
पहलवान जब मंदिर से पूजा-पाठ करके बाहर आया तो उसने देखा कि उसके जूते गायब हैं। और उसकी नजर वहाँ पड़े एक संदेश पर पड़ी, जिसमें लिखा था- आपके जूते चुराने वाले चोर ने दौड़ में कई इनाम जीते हैं। पीछा करने वाले सोच लें।
- एक पड़ोसी संगीतकार से बोलता है-क्या आज की रात आपका यह तबला और सितार मिल सकता है ?
संगीतकार ने प्रसन्नता भरे स्वर में पड़ोसी से कहा- क्यों, मेरा गाना सुन-सुनकर आपको भी गाने की इच्छा होने लगी ?
पड़ोसी- नहीं आज की रात मैं आराम से सोना चाहता हूँ।
- एक पड़ोसन (दूसरे से) - मैंने कहा क्या कर रही हो बहिन ?
दूसरी पड़ोसन (पहली से)- झाडू लगा रही हूँ।
तो पहली पड़ोसन ने कहा-तो यहीं आकर लगा लो, कुछ गपशप भी हो जाएगी। 167. एक रात एक पंडित जी ने सपना देखा कि कोई उनके हाथ में नौ रुपये दे रहा है। और पंडित जी ग्यारह रुपये से कम लेने को तैयार ही नहीं हो रहे हैं। इसी वार्तालाप से उनकी आँखें खुल गईं और उन्होंने अपने दोंनो हाथों को खाली पाया। झट से पंडित जी ने आँखें बंद कर ली और लगे जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने, अच्छा लाओ, लाओ नौ रुपये ही दे दो।
- जेलर (चोर से)- तुम्हें किस अपराध में सजा हुई ?
चोर- खाँसी के कारण।
जेलर- ऐसा संभव नहीं है।
चोर- जब मैं जेब काट रहा था कि अचानक खाँसी आ गई और मैं पकड़ा गया। 169. शादी के समय दूल्हा-दुल्हन की माँग भर रहा था। तभी दूल्हे के दोस्त सौरभ ने कहा- यह रस्म उल्टी होना चाहिए। यानि दुल्हन दूल्हे की माँग में सिन्दूर भरे। दूसरे दोस्त ने कहा-यदि ऐसा हुआ तो सभी गंजे कुँवारे रह जाएँगे। 170. संजय (धोबी से)- तुम्हें धुलाई के पैसे माँगने पर शर्म आना चाहिए। एक तो तुमने मेरी पेंट खो दी।
धोबी- अगर पेंट धोने के पहले खो जाती तो कभी पैसे नहीं मांगता, पर पेंट धोने के बाद खोई है।
- एक व्यक्ति रात्रि के समय सूनसान सड़क पर जा रहा था। उसे रास्ते में दो व्यक्ति मिले।
एक बोला- साहब आप एक रुपया का सिक्का देंगे।
उसने कहा- हाँ जरूर दूंगा पर आप सिक्के का इस समय क्या करोगे ? हमें टॉस करना है कि कौन आपकी घड़ी लेगा और कौन आपके पैसे लेगा। 172. पागलखाने में दो पागल कुँए पर नहा रहे थे। उनमें से एक कुँए में गिर पड़ा। दूसरे ने बड़ी बहादुरी से उसे कुँए से बाहर निकाला।
तुमने तो कमाल कर दिया। पागलखाने का इंचार्ज प्रशंसात्मक स्वर में बोला। जो आदमी इतनी होशियारी और सूझबूझ दिखा सकता हो वह पागल नहीं हो सकता। कल से तुम्हारी छुट्टी कर दी जाएगी।
कुछ देर बाद इंचार्ज को खबर मिली कि उस पागल ने उसे फाँसी लगाकर टाँग दिया। इंचार्ज ने उस पागल को बुलाकर पूछा-तुमने ऐसा क्यों किया ? पागल ने जवाब दिया-नहीं साहब उसे तो मैंने सूखने के लिए टाँगा है। 173. क्या तुम इससे पहले कभी जेल गये हो ?
मुल्जिम (रोते हुए)- नहीं माई बाप, कभी नहीं गया।
जज- रोते क्यों हो, अब चले जाओगे।
-
शिक्षिका- आज तुमने देर से आने का क्या बहाना सोचा है ? टिनी- मैडम, आज मैं इतनी तेज से आई कि बहाना सोच ही नहीं पाई। 175. जज (चोर से)- तुमने रेल के डिब्बे से चोरी क्यों की ? चोर- हुजूर, मैंने चोरी नहीं की। उस पर लिखा था रेल्वे की सम्पत्ति आपकी सम्पत्ति है।
-
ईयर फोन लगाकर गाने सुन रहे श्याम ने घंटी बजने पर फोन उठाया। दो-तीन बार हैलो-हैलो कहा।
फिर बोले- अबे कुछ बोलेगा भी, या गाना ही सुनाए जाएगा।
-
एक भिखारी सरकारी नल पर नहा रहा था। तभी उसके एक भिखारी मित्र ने कहा- यार, जहाँ तक मुझे याद पड़ता है, तुम पिछले महीने ही तो नहाये थे ? दूसरा बोला- यार, तुझे तो मालूम है, मुझे साफ-सुथरा रहने की आदत है। 178. एक भिखारी- अगर तुम्हारी लाटरी खुल जाये तो तुम क्या करोगे ? दूसरा भिखारी- सबसे पहले एक मोटर साइकिल खरीदूंगा, क्योंकि पैदल भीख मांगते-मांगते में थक जाता हूँ।
-
एक करोड़पति, लेकिन बहुत ही आलसी आदमी जो अपनी कार के पीछे की सीट पर बैठा था, कार के ड्राइवर से बोला-जरा कार को झटका देना, मेरी सिगरेट में काफी राख जमा हो गयी है।
-
एक दोस्त (दूसरे से) - क्या तुम अपनी मम्मी का कहना मानते हो ? दूसरा दोस्त- हाँ, वह जितना कहती हैं उससे ज्यादा मानता हूँ। पहला दोस्त- वह कैसे ?
दूसरा दोस्त- जब मम्मी कहती हैं स्कूल मत जाओ, तो मैं दो दिन और छुट्टी मार लेता हूँ।
- नेता जी की पत्नि- मेरी चप्पल टूट गई हैं कितने दिनों से कह रही हूँ कि एक जोड़ी नई चप्पल दिलवा दो।
नेताजी- प्रिये, अब इंतजार खत्म हुआ। आज शाम मेरा भाषण है, तुम साथ चलना। एक क्या कई जोड़ी नए जूते-चप्पल मिल जायेंगे।
-
एक नाई ने एक गंजे आदमी की कटिंग की तथा दुगुने पैसा मांगे। गंजे आदमी ने कहा-कि मेरे सिर में तो बाल कम हैं आधे पैसे लो। नाई बोला- मुझे आपके बाल ढूंढ-ढूंढ कर काटने पड़े इससे मुझे बड़ी परेशानी हुई। इसलिये दुगुने पैसे चाहिए।
-
शर्माजी- ग्रामीण और शहरी बहू में क्या फर्क है ?
वर्माजी - पहली खाना बनाती है दूसरी खाना बनवाती है।
- शिक्षक-कार शब्द का एक वाक्य में प्रयोग करो।
विद्यार्थी- सरकारी अहलकार श्री निरंकार ने सरकार के लिए साहूकार श्री चन्द्रकार की न्यू इंपोटेंड कार अधिग्रहित की।
-
कंजूस मालिक (नौकर से) - अरे तू तो मुझे लुटवा देगा। एक रोटी पर इतना घी। नौकर-क्षमा करें मालिक गलती से मैंने आज अपनी रोटी आपकी थाली में रख दी है।
-
पति तेजी से कमरे में दाखिल हुए और जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया। फिर वह अपनी पत्नि से बोले- सारी खिड़कियां बंद कर दो और उनके पर्दे गिरा दो। मारे घबराहट के पत्नि ने जल्दी से कमरा पूरी तरह पैक कर दिया, फिर पति से पूछा कि- क्या हुआ है ?
पति- देखो, इधर आओ मेरी घड़ी अंधेरे में भी कैसी चमक रही है।
- शिक्षक कक्षा में छात्रों को पढ़ा रहे थे। तभी एक शरारती छात्र ने सीटी बजा दी। अध्यापक ने कड़क कर पूछा- कक्षा में सीटी बजाने की हिम्मत किसने की सचिन कहीं तुमने तो नहीं बजाई ?
सचिन हड़बडा कर- जी-जी सर, मैं तो सो रहा था।
- राजेश और संजय आपस में लड़ रहे थे।
राजेश- यह सूर्य है।
संजय - नहीं यह चंद्रमा है।
वही एक राहगीर को रोककर पूछते हैं।
राहगीर- मुझे क्या मालूम मैं तो यहाँ परदेशी हूँ।
- शिक्षक (छात्र से)- वर्षा के दिन बिजली क्यों चमकती है। छात्र- सर भगवान् टार्च जलाकर देखते हैं कि कहीं सूखा तो नहीं है। 190. शिक्षक (छात्र से)- वाक्य को शुद्ध करके बताओ- रिश्वत लेना अन्याय है। छात्र- रिश्वत लेना अन्य आय है। छात्र ने वाक्य को शुद्ध करके बताया। 191. रोगी- डॉक्टर साहब मैं आपका आभारी हूँ। कभी मेरे लायक कोई सेवा हो तो अवश्य मौका देना।
डॉक्टर (रोगी से)- आप क्या काम करते हैं।
रोगी- कब्र खोदने का।
- मुकेश- यार जीतू, क्या तुम जानते हो कि मैंने झूठ बोलने का रिकार्ड बनाकर अपना नाम गिनीज बुक में लिखवाया है।
जीतू- अच्छा तो झूठ बोलने का कोई नमूना दिखाओ।
मुकेश- अभी तुम क्या सुन रहे थे।
- डॉक्टर (मरीज से) - कहो अब तबियत कैसी है।
रोगी- अब कुछ आराम है बुखार तो टूट गया। बस पैर में हल्का-सा दर्द है। डॉक्टर- घबराओ मत पैर भी टूट जाएगा।
-
डॉक्टर (दीपू से) - किसके लिए चश्मा बनवाना चाहते हो ? दीपू- मास्टर जी के लिए उन्हें मैं गधा दिखाई देता हूँ।
-
शिक्षक- जहाँ वर्षा अधिक होती है वहाँ कौन-सी चीज अधिक पाई जाती है ? छात्र- जी छाता।
-
एक गप्पी (दूसरे से)- वह देखो, एक अमेरीकन चाँद पर उतर रहा है। दूसरा गप्पी- क्या खाक देखूं, चश्मा तो मैं चांद पर ही छोड़ आया हूँ। 197. इंस्पेक्टर (ग्रामीण से)- तुम्हारे खोये हुये लड़के ने किस रंग की कमीज पहनी थी। ग्रामीण- यह मुझसे क्या पूछते हो साहब ? जब लड़का मिले तो खुद ही देख लेना। 198. शिक्षक- बच्चो, भालू के बाल बड़े क्यों होते हैं ?
बच्चे- सर, जंगल में नाई जो नहीं होते।
- एक कम्पनी के मालिक ने एक लड़के को डांटते हुए कहा-गधे तुम्हें मालूम है झूठ बोलने वालों के साथ कम्पनी क्या सुलूक करती है लड़के ने उत्तर दिया-सेल्स मैन बनाकर शहर भेज देती है।
- अंश यहाँ समाप्त; पूर्ण ग्रंथ के लिए नीचे संलग्न PDF देखें -
मूल दस्तावेज़ (PDF): 3017.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है