बालपोथी सच्चा जैन
बालपोथी
सच्चा जैन
सच्चे जैन
प्रभुदर्शन नित करते, रात्रि भोजन तजते।
पियें छानकर पानी, सुने सदा जिनवाणी ।।
कभी अभक्ष्य न खाते, जीव दया चित्त लाते।
सप्त व्यसन के त्यागी, संयम में अनुरागी ।।
वस्तुस्वरूप समझते, शुद्धात्म को भजते।
जाग्रत प्रज्ञा छैनी, वे ही सच्चे जैनी ।।
प्रभुदर्शन नित करते।
रात्रि भोजन तजते।
पियें छानकर पानी।
सुने सदा जिनवाणी।
कभी अभक्ष्य न खाते, जीव दया चित लाते।
सप्त व्यसन के त्यागी
संयम में अनुरागी।
वस्तुस्वरूप समझते, शुद्धात्म को भजते।
जाग्रत प्रज्ञा छैनी, वे ही सच्चे जैनी ।।
जय जिनेंद्र
अर्हं पाठशाला
मूल दस्तावेज़ (PDF): 2098.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है