अष्टमद् (एक लघु नाटिका)
- यह ग्रंथ का अंश है; पूर्ण ग्रंथ नीचे संलग्न PDF में उपलब्ध है -
अनुक्रमणिका
| क्र. | विवरण |
|---|---|
| 1 | अष्टमद |
| 2 | (1) कुलमद |
| 3 | (2) जातिमद |
| 4 | (3) रूपमद |
| 5 | (4) बलमद |
| 6 | (5) धनमद |
| 7 | (6) ज्ञानमद |
| 8 | (7) प्रभुतामद |
| 9 | (8) तपमद |
| 10 | आकाशवाणी |
अष्टमद
(एक लघु नाटिका)
(1) कुलमद
कुलमद - नमस्कार प्रणाम भाइयो और बहनों मैं यहाँ से गुजर रहा था तो देखा की यहाँ बहुत भीड़ है तो सोचा थोड़ा मिलजुल लू
वैसे हम बहुत ही बड़े कुल से सम्बन्ध रखते हम आपको अपना परिचय देते है
हम है चिड़ी वाला गद्दीवाल फतहपुर फतहपुर। कहाँ के फतहपुर। हम अपने गाव के इकलौते इसे जमींदार है
जिनकी अंग्रेजो से दोस्ती थी हमारे पिताजी के पास दस-दस बीघा जमीन थी कितनी दस-दस बीघा।
हमारे गाव को नापने के लिए जाओ तो यो छोर से यो छोर तक परगने में सुबह से शाम हो जाये। हा समझ।
ये कुछ भी नहीं है हमारे पिताजी के पास हाथी घोड़ा बैल गाये इतने सारे -2 जानवर थे की यदि उनके एक दिन के
मल को इक्कठा हो जाये तो कुएब गोबर मिट्टी कही हो जाये का कही हो जाये कुएब गोबर। और पता है हमारे
पिताजी उन जानवरों को अपने बच्चो की तरह पालते थे बिलकुल अपने बच्चो की तरह , अंग्रेजो के समय में दस
दस बंगला थे।
(2) जातिमद
जातिमद - (राजस्थानी वेशभूषा में प्रवेश करता है ) तू दूर हो जा मारे से अपुन्यो लगे छे जो सब थारा
जानवराम का कुएब गोबर तू ही साफ करे छे हट जा मारे सामने से मारे मुंड खराब कर दियो इनरा तो छोरो
मारे नाम रतन सिंह छे इनरा नाम तो सुन्यो ही होयो अरे इनरा महाराजा की जाती को छू में महारा मामा
महाराज हीरा सिंह जी नाम तो सुन्यो होये। (राजपुताना 10 10 शहरो पे राज करू छू। मरे मामा को एसी सुन्दर
महल छे की देखन मन खुश हो जाये ओये। सर विलियम जोन्स नाम तो सुन्यो होये। जाने तो मामाजी को राय
बहादुर की उपाधि भी। दी ए। अर बाकी उनकी सुन्दरता का काय बखान करू महारा मामा इतना सुन्दर छे इतना
सुन्दर छे …।।
(3) रूपमद
रूपमद - बोल बोल कितना सुन्दर है तेरा मामा बोल की उसको देखकर चाँद भी शरमा जाये या बोल दर्पण
के जैसा इतना स्वच्छ की लोग उसमे अपना चेहरा भी देख ले। परन्तु अब इन सब का कोई फायदा नहीं क्योकि ये
सारी उपमाये इस रूपमती पर पहले यूज़ हो चुकी है
चिल्लालाल- कौन रूपमति?
रूपमती- मुँह में रूपमती और कौन चाँद के जैसा रूप है मेरा
(लिपिस्टिक लगाये हुए) पता है ये फैशन क्रीम वाले ब्यूटी पार्लर वाले तो मेरे पीछे ही पड़ गए की प्लीज मेम एक ऐड
करदो प्लीज पर मैंने तो साफ इंकार कर दिया की न बाबा न
और पता है मैं अभी अभी बड़े बड़े डायरेक्टर रोहित शेट्टी और करण जौहर से मिल कर आ रही हूँ चार चार
फिल्मो को साइन करके आ रही हूँ
(4) बलमद
ये — हाथ अग्रबत्ती पर मोमबत्ती हर जा मेरे रास्ते से हट जाओ सभी जगह करो मेरे लिए हा हा
हा हा मैं पहलवान सुल्तान हूँ सुल्तान जानते हो मेरे लिए
मैं एक एक दिन में 500 500 दण्ड पेलता हूँ मैं अपने एक दिन के सुबह के नाश्ते में 5 लीटर दूध मलाई भर के एक
सास में गटक जाता हूँ और खाने में 40 40 रोटी रगड़ जाता हूँ
आपको पता एक मैं बस में जा रहा था तो मुझे बहुत गर्मी लगी तो मैं अपने हाथ तो यू किया और खिड़की ही
टूट गयी आपको क्या अपने को क्या। आने लगे।
और क्या बताऊँ आपको ये खाती है wwe का खिलाड़ी ये अपना ही चेला है।
मैं मेरे ट्रक को अपने भुजाओ से यूही खींच लेता हूँ मेले में बड़े बड़े पहलवान धुल चाट जाते हैं।।
(5) धनमद
अरे चल हट जा मेरे रास्ते से मोटे गेंडे तू इन्सान है या जानवर। ये तेरे पैर है या कुआ, न
जाने कहाँ कहाँ से चले आते है।
लुनगी छाप लोग, पहनने को कपड़े तो है नहीं और मोटे के मुँह के बाल तो देखो। हा हा
मुझसे मिलो मैं हूँ सेठ करोड़ीमल मेरे पास 10 10 हेक्टेयर्स है और 20 तो दल मोले है ओ भाई चिडीलाल
फतेहपुर में नहीं मुंबई में मुंबई में।
मुझे पता है मैं अपने बेटो को रोज 1000 रुपये तो पॉकेट मनी देता हूँ तू जनता है क्या होती है पॉकेट मनी। तू क्या
जानेगा तेरे पास तो पॉकेट ही नहीं है। हा हा हा
और तू क्या अपनी ताकत दिखा रहा है रे रे जैसे पहलवान तो मेरे घर पे चौकीदारी करते है ताकत से कुछ नहीं
होता सब कुछ पैसो से होता है पैसे है तो गद्दी बंगला सब कुछ है नहीं तो जिन्दगी फटेहाल फटेहाल। अब कभी
भूलना नहीं मेरा क्या है
करोड़ीमल-(सब एक साथ बोलते है)
(6) ज्ञानमद
अरे सेठ जी नमस्कार-2 क्या नाम बताया अपना?
सेठजी- करोड़ीमल (मुंहो को ताव देते हुए)
अच्छा ठीक है जरा अपना नाम लिखकर तो बताइए
सेठजी -(कुछ सोचकर और पसीना पोछते हुए) अंगूठा चलेगा क्या?
हा हा हा इतने बड़े सेठ और अपना नाम तक लिखना नहीं आता जब नाम लिखने की बारी आई तो अंगूठा दिखाने
लगे।
चलो छोड़िये मुझसे मिलो मैं हूँ प्रोफेसर ज्ञानचंद मुंबई के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में पढ़ता हूँ मेरी सेलरी
10000000 करोड़ है
आपको पता मैंने BA,MA,BSC,MCom,MCom, पीएचडी ,और न जाने कितनी सारी डिग्रियां हासिल की है और
सेठ जी मुझे से नहीं ज्ञान से समझ आया
और पता है मुझ से बड़ा मैना शिक्षामंत्री ने और ये बाना राष्ट्रपति ने जी ने दी है (मैडल दिखाते हुए)
सेठजी कुछ नहीं नेता यदि ज्ञान हो तो पैसा पीछे पीछे भागता है
सेठजी -पैसा किसी महापुरुष ने कहा
मैंने प्रोफेसर ज्ञानचंद ने समझे ।।
(7) प्रभुतामद
नेता जी का प्रवेश (फोन पर बात करते हुए)
हा हा आपका काम हो जायेगा, अरे जब हमने दबाब देती तो जायेगा, अरे पागल मैना जबान तो मेरे मुँह
में है जबान देदी मतलब वचन देदिया समझो हा चलो अब फोन रखो(अपने PA को फोन देते हुए)
हा तो भाइयो और बहनों हम है नेता गन्नूहाजारे कौन गन्नूहाजारे।
गन्नूहाजारे जिंदाबाद -2
अरे घबराइए मत हम नहीं वोट मागने नहीं आये चुनाव तो अभी बहुत दूर है वो तो बीस यहाँ से गुजर रहा था तो
देखा ये मूर्ख झगड़ रहे थे आ गए।
ये भाई ज्ञानचंद मेरे फूफाजी के मामाजी के ताऊजी के लड़के है बड़ी बड़ी हांक रहे थे पहले इनके यहाँ
खाने पीने के लिए भी हम ही ले इन्हें यहाँ तक पहुंचाया है मैंने आया और कहता है कि भाईसाहब कोई छोटी
मोटी नौकरी हो तो दिला दो फिर क्या हुवा क्या आ गई और फोन घुमाया और आज देखो आपके सामने।
और देखो हमने पुरे भारत में लाखो शौचालय बनवाये है और तत्काल तीन तक बिल पास किसने करवाया और
अभी वो धारा 370 और 35A हम ही ने हटवाया है।
सभी एक साथ फिर से जिन्दाजारे जिंदाबाद-2 ।।
(8) तपमद
दो शिष्य अपने हाथो को हटाते हुए सुनो सुनो महातपस्वी महाराजम परम दयालु करुणा के सागर
10000 क्रोधानंद महाराज पधार रहे है…
स्वामी- ओ का प्रवेश-अवस्तनभो सव्वण कल्याण हो धर्मबुद्धिप हो।
मैं क्रोधानंद महाराज एक वर्ष से हिमालय की गुफाओ में तपस्या में लीन था जिसके प्रभाव से मैंने देवो को प्रसन्न
किया और अनेक रिद्धियो का स्वामी बन चूका हूँ और मुझ जैसा तप करने वाला इस संसार में कोई भी नहीं है।
शिष्य- बोलो 10000 क्रोधानंद महाराज की …जय
स्वामी- अरे मूर्ख महातपस्वी कौन बोलेगा हम 10 20 दिन बिना अन्य यदुग किये साधना की है
शिष्य- और रोज 10 प्रकार के फल भी खाए है
स्वामी- हमने तबकती गर्मी में गर्म-2 चट्टानों पर ध्यान किया है।
शिष्य- वो चट्टान स्वामी जी के बाल बाले कमरे में रखी है।
स्वामी- और हमने अनेक प्रकार के चमत्कार भी किये है।
शिष्य- उनका कम इनके शिष्यो का ज्यादा समाचार है।
स्वामी- इसलिए जब हम हमारा ज्ञान तो बड़े ही सम्मान के साथ और महातपस्वी लगाना कभी मत भूलना
परन्तु भक्तजनों आज हम यहाँ कोई चमत्कार दिखने नहीं आये है।
हमने अपने एक शिष्य को तपोभूमि बनाने के लिए एक जमीन व्यवस्था करने की आज्ञा दी थी परन्तु हमारी
आज्ञा मानी नहीं अरे बचपन में वो हमारी चरणो की धुल में खेलता था जिसने बड़ा होकर आज वो इतना बड़ा नेता
बन गया है।
ज्ञानमद- स्वामी जी कही वो नेता गन्नूहाजारे तो नहीं है (नेता जी तरफ ऊँगली करते हुए)
स्वामीजी- हा। अरे कुछ कुचनी सुने हमारी आज्ञा न मानकर घोर दुस्साहस किया है तू नहीं बचेगा, शिष्य मेरा
कमंडल लाओ अभी इसे श्राप देता हूँ
शिष्य- स्वामी जी कमण्डल तो हिमालय की गुफाओ में ही छूट गया।
स्वामीजी- अच्छा… कोई बात नहीं।
नेताजी- स्वामी जी कही तो हिमालय की वापसी की टिकट करा दू देख लो मिन्नो में ये ढोंगी साधू अपनी प्रसंसा
के ढेड़ पीठ रहा था लेकिन इसी को ढोल फट गया।
मानो या न मानो मैं ही सबसे महान् हूँ।
(सभी अपने अपने को महान् कहने लगते है आपस में लड़ने झगड़ने लगते है तभी आकाशवाणी होती)
आकाशवाणी
ओम…
अरे मूर्ख रुक जाओ यह व्यर्थ की लड़ाई बंद करो अरे जिस जिस भी वास्तु को लेकर तुमने घमंड है वह तो वास्तव
में तुम्हारी है ही नहीं। (कोई भी एक व्यक्तिल पीछे से क्रमशः संबोधित करेगा और समझाएगा)
चिन्दीलाल और रतनसिंह-
- अंश यहाँ समाप्त; पूर्ण ग्रंथ के लिए नीचे संलग्न PDF देखें -
मूल दस्तावेज़ (PDF): 2754.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है