अंताक्षरी प्रतियोगिता
अनुक्रमणिका
| क्र. | विवरण |
|---|---|
| 1 | नियम |
| 2 | 1. अक्षर राउण्ड |
| 3 | 2. शब्द राउण्ड |
| 4 | 3. परिस्थिति राउण्ड |
| 5 | 4. अभिनय राउण्ड |
| 6 | मुखड़ा - अंतरा राउंड |
| 7 | धुन राउंड |
| 8 | चित्रकला राउंड |
| 9 | जिनवर एक मिनट |
| 10 | छंदपूर्ति राउंड |
| 11 | अन्ताक्षरी प्रतियोगिता सामान्य नियम |
| 12 | कुछ अन्य राउण्ड के नाम |
| 13 | १. अक्षर राउण्ड |
| 14 | २. शब्द राउण्ड |
| 15 | ३. मुखड़ा-अन्तरा राउण्ड |
| 16 | ८. धुन राउण्ड |
| 17 | ५. पारिस्थिति राउण्ड |
| 18 | छन्दपूर्ति राउण्ड |
| 19 | हाँ ना का हाँ |
| 20 | अनुयोग |
| 21 | पार्सल गेम |
| 22 | प्रतियोगिता के नियम |
| 23 | प्रश्नोत्तरी |
नियम
इस प्रतियोगिता में पाँच राउण्ड रखे जायेंगे
- अक्षर राउण्ड
- परिस्थिति राउण्ड
- मुखड़ा-अंतरा राउण्ड
- चित्र कला राउण्ड
- छंदपूर्ति राउण्ड
- शब्द राउण्ड
- अभिनय राउण्ड
- धुन राउण्ड
- जिनवर एक मिनिट
1. अक्षर राउण्ड
- अक्षर राउण्ड में अंतिम अक्षर पर भजन बोलना होगा
- श, ष, एवं स एक समान चल सकते हैं।
- क्ष = क, ष प्र = त र, ज्ञ = ज
- भजन आध्यात्मिक ही होना चाहिए
2. शब्द राउण्ड
आपको एक शब्द दिया जायेगा।
वह शब्द भजन पूजन या स्तुति की पहली पंक्ति में आना चाहिए
मंगल = मंगले भगवान् वीरो…।
अशरीरी = अशरीरी सिद्ध भगवान…।
जिनराज = आज हम जिनराज …।
3. परिस्थिति राउण्ड
= हम आपको एक परिस्थिति बता रहे हैं।
आपको परिस्थिति अनुसार भजन था
पूजन की पंक्ति बोलना है।
जैसे :- आप मंदिर जा रहे हैं, दूर से मंदिर
दिखने पर अपने मन में क्या भाव
आयेंगे ?
→ ऊँचे ऊँचे शिखरोवाला है जिनमंदिर हमारा…
4. अभिनय राउण्ड
- इस राउण्ड में आपको अपना एक प्रतिभागी
को मंच पर भेजना होगा,
उसे संचालक एक भजन बताएगा फिर वह
प्रतिभागी उस भजन को अभिनय के
माध्यम से आप सभी को बताएगा
→ आप सभी को भजन 1 मिनट में ही
पहचानना है। - अभिनय मौन रहकर करना है अन्यथा
आपकी माइनस मार्किंग होगी - प्रतिभागी का समूह उत्तर ना दे पावे तो
अगला समूह उत्तर दे सकता है
उत्तर गलत होने पर जितने अंक
आप को मिलने है, उतने ही अंक
आपके घटाने में निर्णायक समर्थ है।
मुखड़ा - अंतरा राउंड
- इस राउंड में हम आपके लिए एक मुखड़ा या अंतरा बोलेंगे। यदि हम मुखड़ा बोलते हैं तो आपको अंतरा बोलना है एवं यदि हम अंतरा बोलते हैं तो मुखड़ा बोलना है।
मुखड़ा
जैसे - परम दिगम्बर मुनिवर देखे हृदय हर्षित होता है।
आनंद उल्लसित होता है, होऽऽऽ सम्यग्दर्शन होता है।।
अंतरा
वास जिनका वन उपवन में, गिरि शिखर के नदी तटें।
वास जिनका चित्त गुफा में, आत्म आनंद में रम।।
धुन राउंड
- इस राउंड में कई धुनें बजायी जायेंगी आपको धुन समझकर हाथ ऊँचा करना है। जो सबसे पहले हाथ ऊँचा करेगा, उससे वह धुन पूछी जायेगी।
- सही बतानेवाले को दस अंक एवं हाथ उठाकर भी नहीं बताने या गलत बताने पर माइनस दस किये जायेंगे।
चित्रकला राउंड
- इस राउंड में आपके समूह के एक प्रतिभाशाली को भजन बताया जाएगा।
- उस भजन को चित्रकला के माध्यम से अपने समूह तक पहुंचाना है।
- अगर आपका समूह उत्तर सही देता है तो उसे 10 अंक दिए जाएंगे।
- उत्तर नहीं आने पर आप पास कह सकते हैं।
- अगला समूह अगर उत्तर गलत देता है तो उसके अंक घटा दिए जाएंगे।
जिनवर एक मिनट
- इस राउंड में एक मिनट में आप जितने भजन बोलोगे उसी हिसाब से आपके समूह को 2 अंक प्रत्येक भजन के अनुसार दिए जाएंगे।
- इसके नियम शब्द राउंड की तरह ही होंगे।
- सही भजन ही मान्य होंगे।
छंदपूर्ति राउंड
- इस राउंड में संचालक द्वारा एक छंद की आधी पंक्ति बताई जाएगी आपको उस पंक्ति को पूर्ण करना है।
जैसे
- अति पुण्य उदय मम आया
- पावन मेरे नयन भये तुम दरशन
- इस अर्घ्य का क्या मूल है
- शुचि निर्मल नीर गंध स अक्षत
- शास्त्रोक्त विधि पूजा महोत्सव
- आतम को हित है सुख सो सुख
- बस इष्ट संवारी तुम दिगधारी
- तीन भुवन में सार
- मंगल भगवान् वीरो
- मंगलमय मंगलकरण
- ब्रह्म पतित पावन में अपावन
- दो: शांतराग समिभि:
- यह अर्घ्य समर्पण करके प्रभु
अन्ताक्षरी प्रतियोगिता सामान्य नियम
- इस प्रतियोगिता में कोई भी तीन राउण्ड खेले जायेंगे
- प्रतिभागियों की संख्या को देखते हुए समूह का निर्माण करें
- तत्काल बनाया गया भजन मान्य नहीं होगा
- अत्यधिक फिल्मी तर्जों के भजन मान्य नहीं होंगे
- आपका भजन प्रमाणिक होना चाहिए
- भजन सही बोलने पर ही अंक दिए जाएंगे
- नहीं बोलने पर शून्य मिलेंगे
- गलत बोलने पर माइनस मार्किंग
- पासिंग राउण्ड में बोलने के अंक भी मिलेंगे
- निर्णायक का निर्णय अन्तिम एवं सर्वमान्य होगा
कुछ अन्य राउण्ड के नाम
- संस्कृत श्लोक शब्द राउण्ड
- भजन राउण्ड
१. अक्षर राउण्ड
- अक्षर राउण्ड में अन्तिम अक्षर पर गीत बोलना होगा।
- श ष एवं स एक समान चल सकते हैं।
- क्ष = क + ष, त्र = त + र, ज्ञ = ज + य चलेंगे।
२. शब्द राउण्ड
आपको एक शब्द दिया जायेगा; वह शब्द भजन, पूजन या स्तुति की पहली पंक्ति में आना चाहिए:
| मंगल | - |
| अशरीरो | - |
| जिनराज | - |
| मुनिराज | - |
| परमेष्ठी | - |
| मन्दिर | - |
| महापुण्य | - |
| महिमा | - |
| वाणी | - |
| परम दिगम्बर | - |
| मुद्रा | - |
| जीयहु | - |
| शाश्वत | - |
| लहर | - |
| वात्सल्य | - |
| द्वादशांग वाणी | - |
| वीर | - |
| ध्यान | - |
| सुख | - |
| साधु | - |
| मिथ्यातम | - |
| ज्ञानानन्द | - |
३. मुखड़ा-अन्तरा राउण्ड
इस राउण्ड में हम आपके लिए एक मुखड़ा या अन्तरा बोलेंगे। यदि हम मुखड़ा बोलते हैं तो आपको अन्तरा बोलना है एवं यदि हम अन्तरा बोलते हैं तो मुखड़ा बोलना है।
१. अहो न्यायो रे हमारे बड़ो भाग्य कि हम आये पूजन को।
२. पिता झलक ज्यों पुत्र में दिखती जिनेन्द्र झलक मुनिराज झलकती।
३. हे प्रभो! चरणों में तेरे आ गये, भावना अपनी का फल हम पा गये।। मुखड़ा।।
४. नित्य सारा है झलकता ज्ञान में, किन्तु प्रभुवर लीन है निज ध्यान में।।
ध्यान में निज-ज्ञान को हम पा गये, हे प्रभो! चरणों में तेरे आ गये।। अं०।।
५. भावे भजो भावे भजो जिनराया, चौबीस जिनवर पाया जी पाया।। मुखड़ा।।
६. ऋषभ भजित सम्भव अभिनन्दन, सुमति प्रभु सुपार्श्व पद वन्दन।।
आगम में अपनापन करके मिथ्यातन को दूर भगाया, जिनवर भई आत्म लई, जिनराया।। अं०।।
७. पञ्चाङ्ग ओऽऽऽ पञ्चाङ्ग… पञ्चाङ्ग रे उड़ के जाओ कुण्डलपूर में
तीर्थङ्कर जन्मे आज भरतक्षेत्र में।। मुखड़ा।।
माता त्रिशला ने देखे थे सोलह सपने, उनका फल बताया सिध्दार्थराज ने।
तेजवान शुद्धिमान रत्न होयेगा, ज्ञानवान तीर्थङ्कर बाल होयेगा।। अं०।।
८. जिया ऋषभ अवतार, जय जयकार जय जयकार जय जयकार।
९. त्रिशला नन्दनकुमार, जय जयकार जय जयकार जय जयकार।। मुखड़ा।।
आज खुशी है आज खुशी है, हमें खुशी है तुम्हें खुशी है।
खुशिऽयाँ अपरम्पार, जय जयकार जय जयकार जय जयकार।। अं०।।
१०. परम दिगम्बर मुनिवर देखे, हृदय हर्षित होता है।
११. आनन्द उल्लसित होता है, होऽऽऽ सम्यग्दर्शन होता है।। मुखड़ा।।
१२. वास जिनका उत्पन्न में, गिरि शिखर के नदी तटों।
१३. वास जिनका जिन गुफा में, आत्म आनन्द में रहें।। अं०।।
८. धुन राउण्ड
ऐसे रागु सुद्ध कब मिलि है ॥ सुभद्धा॥
तिल तुम मांहि सद्ध नहिं जिनके, ज्ञान-ध्यान पुनफल है, ऐसे रागु सुद्ध कब मिलि है ॥ अ०॥
इस राउण्ड में कुछ चुने भजनी जानी, आपको धुन समझकर हाथ ऊँचा करना है। जो सबसे पहले हाथ खड़ा करेगा, उससे वह धुन पूछी जायेगी। सही ५०%ले की दरा अंक एवं हाथ उठाकर भी नहीं बताने या गलत बताने पर माईनस दस किये जायेंगे।
५. पारिस्थिति राउण्ड
हम आपको एक परिस्थिति बता रहे हैं। आपको उस परिस्थिति के अनुसार भजन या पूजन की पंक्ति बोलना है।
- आप मन्दिर जा रहे हैं, दूर से मन्दिर दिखने पर आपने मन में क्या भाव आयेंगे?
- ऊँचे-ऊँचे शिखरोंवाला है जिनमन्दिर हमारा..
- जैनाचार्य का ध्वज लहरा रहा है, इस सम्बन्ध में आपने विचार प्रकट करो।
- लहर-लहर लहराये केशरियां झण्डा जिनपात का हो जी..
- मन्दिर में प्रवेश करते ही प्रतिमा के दर्शन हुए तो उन्हें देखकर जो भाव हुए, उन्हें प्रकट करो।
- जिनप्रतिमा जिनवर-सी कहिये..
- मुनिराज आपकी कुटिया में पधारे हैं - उन्हें देखकर आपके कैसे भाव होंगे, उन्हें प्रकट करो।
- मुनिवर आज मेरी कुटिया में आये हैं..
- आप जैनकुल में पैदा होकर कैसा महसूस करते हैं?
- मैं महापुण्य उदय से जिनधर्म पा गये..
- आनन्द के अवसर पर आप लोगों - मन्दिर कैसे बुलवायेंगे।
- आओ जिनमन्दिर में आओ..
- परम दिगम्बर साधु को देखकर, उनके जैसा बनने की चाह होने पर अपने अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हो तो?
- दत साधु बन के विरक्त..
- मुनिराज के उपदेश से प्रेरित हो किसी ने दीक्षा धारण की तो आप कैसे भाव व्यक्त करेंगे?
- धन्य मुनिश्वर आतम हित में छोड़ दिया संसार..
- सभी जीवों में प्रेम भावना का प्रचार करना है तो कौन-सा भजन/स्तुति गायेंगे?
- प्रेम भाव हो सब जीवों..
- यदि जिनवर के अंगों की प्रशंसा में लिखे कक्ष गाये तो किस भक्ति के द्वारा भाव प्रकट करेंगे?
- निरखो अंग-अंग जिनवर..
- जब जिनवर के दर्शन पाते हैं तो आपके आन्तरिक रोम कैसे हो जाते हैं?
- रोम-रोम पुलकित हो जाये..
छन्दपूर्ति राउण्ड
अति पुण्य उदय मम आया
पावन मेरे नयन भये तुम दरशाते
इस अर्घ्य का क्या मूल्य है
शुचि निर्मल नीर गंध सु अक्षत
शास्त्रोक्त विधि पूजा महोत्सव
आरती को हित है दुख सो सुख
वसु द्रव्य सेवारी तुम ढिग धारी
तीन भुवन में सोर
मंगल भगवान् वीरे
मंगलमय मंगलकरण
प्रभु पतित पावन मैं अपावन
चै: शाश्वतम् जयति
यह अर्घ्य समर्पण करके प्रभु
कार्तिक फाल्गुन साढ़ के
उदक-चन्दन-तंदुल पुष्पके
जल फल आठों शुचि सार
मैं कौन हूँ आया कहाँ से
तास भ्रमण की है बहु कथा
अहंतो भगवत इन्द्र महिता
राजा राणा छत्रपति
हाँ ना का हाँ
इस प्रतियोगिता में सभी भाग ले सकते हैं।
१. प्रतिभागियों के नाम पर्ची के माध्यम से निकाले जायेंगे।
२. प्रतिभागियों को पाँच प्रश्न पूछे जायेंगे -
-
प्रथम तीन प्रश्नों के उत्तर सही देने हैं और सिर गलत हिलाना है।
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अन्तिम दो प्रश्नों के उत्तर गलत देने हैं और सिर सही हिलाना है।
४. निर्णायक का निर्णय ही सर्वमान्य व अन्तिम निर्णय होगा। -
परमेष्ठी पाँच होते हैं।
-
कषाय चार होती है।
-
रात में नहीं खाना चाहिए।
-
नरक गति अच्छी है।
-
तीर्थंकर २४ होते हैं।
-
तत्व चार होते हैं।
-
देवों की मुख होती है।
अनुयोग
अनुयोग चार होते हैं।
हम गधे भी हुए हैं।
तुम बैल हो।
अनछना जल पीना चाहिए।
इन्द्रियाँ पाँच होती हैं।
तुम अज्ञानी हो।
आज उत्तम क्षमा का दिन है।
तुमने आज नहाया है।
तुम मनुष्य हो।
विदेह क्षेत्र में २० तीर्थंकर होते हैं।
कोई किसी का कर्ता धर्ता नहीं है।
हम अनादि काल से मिथ्यादृष्टि हैं।
पाण्डव पाँच होते हैं।
पंचकल्याणक पाँच होते हैं।
हम बहुत पापी नहीं हो।
हमें देव शास्त्र गुरु की पूजा करनी चाहिए।
नरक सात होते हैं।
तुम ब्रह्मचारी हो।
तत्वार्थसूत्र के रचयिता उमास्वामी हैं।
छहढाला के रचयिता बनारसीदास हैं।
सुकुमार मुनि ने उपसर्ग किया था।
तुम भगवान् आत्मा हो।
भगवान् बाहुबली के पिता का नाम *ऋषभदेव था।
तुम भूत हो।
बाहुबली पाँचवे तीर्थंकर नहीं हैं।
व्यसन सात होते हैं।
जिनवाणी सुनना चाहिए।
परिग्रह पाँच होते हैं।
प्रमाद के १५ भेद होते हैं।
माता १६ स्वप्न देखती है।
अष्टविनायक का चिन्ह हिरण है।
बारह भावनाएँ होती हैं।
जैन धर्म महान् नहीं है।
जियो और जीने दो आदिनाथ का संदेश है।
सम्यग्दर्शन के बिना मोक्ष नहीं होता।
लोभ पाप का बाप है।
१४ गुणस्थान होते हैं।
धर्म दस नहीं होते, अतः १० होते हैं।
धर्म से श्रेष्ठ धन है।
हमें प्रवचन में नहीं सोना चाहिए।
हमें रात्री में भोजन करना चाहिए।
तुम्हारे घर में आलू-प्याज नहीं बनते।
तुम्हें मोक्ष जाना है।
अरहंत पिता है, जिनवाणी माता है।
हमें पूरे जीवन भर पाप करना चाहिए।
काला होना पुण्य कर्म का उदय है।
भगवान् जगत् के कर्ता-धर्ता हैं।
सिद्ध भगवान् संसारी हैं।
कुमुद ने पार्श्वनाथ भगवान् का उपसर्ग दूर किया।
आदिनाथ के पिता का नाम नाभिराय था।
सिद्ध परमेष्ठी ५ गुणों से रहित हैं।
क्या सीता सती थी।
तुम जानते देखते हो।
नेमिनाथ की शादी राजुल से हुई।
तुम्हारी मम्मी मंदिर जाती है।
केवली भगवान् चारो लोकों को स्पष्ट जानते हैं।
प्रत्येक द्रव्य स्वतंत्र व स्वाधीन है।
भरत ने १ तब तक तप किया।
हाथी नारकी जीव है।
सीता लव-कुश की माता थी।
राही भगवान् तीर्थंकर होते हैं।
पर्वत १० होते हैं।
दोष १८ होते हैं।
आचार्य के ३६ मूलगुण होते हैं।
रत्नकरंडश्रावकाचार ग्रन्थ आचार्य समंतभद्र द्वारा रचित है।
दश लक्षण पर्व वर्ष में ७ बार मनाया जाता है।
पार्सल गेम
प्रतियोगिता के नियम
(क) अधिक संख्या होने पर यह प्रतियोगिता वर्गों में आयोजित की जाएगी।
(ख) प्रति ३० सेकेण्ड में एक घण्टी बजेगी जिसके बीच आपको हाथ में दिया गया पात्र आगे-आगे प्रतियोगियों को देना है।
(ग) जिसके हाथ में घण्टी बजने पर पात्र आयेगा उसे यहां आकर पर्ची में जो नंबर लिखा होगा उसके अनुसार कार्य करना पड़ेगा।
(घ) यदि किसी प्रतियोगी के हाथ से पात्र गिर जायेगा तो उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा।
(ङ) निर्णायक का निर्णय अन्तिम व सर्वमान्य होगा।
(आप सही की जगह कोई भजन इस्तेमाल कर सकते हो।)
- मंदिर जाने की विधि कम शब्दों में बताईए।
- भगवान् को देखकर आपके मन में कैसे भाव आते हैं।
- आपको पाठशाला में बच्चों को भेजना है तो आप बच्चों को किस प्रकार समझाओगे।
- आपके मम्मी-पापा झगड़ रहे हैं तो आप उन्हें कैसे समझाओगे।
- जो आध्यात्मिक भजन आपको सबसे प्रिय लगता है वह सुनाईए।
- जैनधर्म संबंधित प्रेरणादायक एक छोटी सी कहानी सुनाये।
- सत्य सत्य आपकी दिनचर्या बताइये।
- अहिंसा के नारे जुलूस में किस प्रकार लगवाओगे।
- आपके पति/पिता टीवी देख रहे हैं और तभी आपको स्वाध्याय करना है तो आप अपने पति/पिता को स्वाध्याय के प्रति किस प्रकार प्रेरित करोगे।
- वर्तमान में लोग माला किस प्रकार फेरते हैं और किस प्रकार फेरनी चाहिए।
- अचानक आपके सामने मंदिर में शेर आ जाए तो आप क्या प्रतिक्रिया करेंगे।
- वर्तमान में लोग किस तरह पूजा करते हैं और किस तरह करना चाहिए।
- भजन सुनाईए।
- कविता सुनाईए।
- आपकी प्रिय पूजा कौन सी है और क्यों।
- आपको कौन सी भक्ति प्रिय है और क्यों।
- आप कौन सा पाठ प्रतिदिन करते हो और उस पाठ से क्या लाभ है।
- आप ज्ञान और धर्म में से किसको चुनेंगे और क्यों।
- भगवान् और तारिछट में से 5 अंतर बताईए।
- भक्ताम्बर का पहला काव्य सुनाईए।
- दिवाली पर क्या हुआ था।
- किसी पूजा का एक छन्द सुनाईए।
- इस दशलक्षण में आपने कोई नया नियम लिया है या नहीं, लिया है तो क्यों नहीं लिया है तो क्यों।
- अगर आपको कोई नियम लेना है तो आप कौन सा नियम लेंगे।
- पंच परमेष्टि के लक्षण सुनाईए।
- णमोकार मंत्र के पांच नाम।
- छहढाला का मंगलाचरण सुनाईए।
- अगर एक बार क्षमा मांगने से आपकी सालों पुरानी दुश्मनी खत्म हो जाती है।
प्रश्नोत्तरी
तो आप किस प्रकार क्षमा मागेंगे।
आप क्षमा के बारे मे क्या जानते है
29. मार्दव धर्म किस कुषारा के अभावरूप प्रकट
30. होती है
31. आपके सामने कोई गरीब आ जाए तो आप
उसकी मद्द किस प्रकार करेंगे
भजन सनाईए
32. 24 तीर्थंकरो के नाम या छन्द सुनाईए
33. 5 बालयति तीर्थंकर के नाम बताईए
34. पंच महाव्रतों के नाम बताईए
35. अगर आप सौधर्म इन्द्र होते तो क्या करते
36. अगर आप कुन्द-कुन्द की माँ होते तो आप
37. उन्हे दिक्षा की अनमति देते
38. अगर आपका पुत्र / पुत्री दीक्षा लेने के
लिए अनुमति मांगे तो आप क्या करेंगे
39. अगर आपके परिवार मे से कोई अपने
नियम से भटक रहा है तो आप उसे कैसे
समझाएगे
40. अगर आपको चक्रवर्ती की संपदा मिल जाए तो
आप उससे क्या करोगे
41. अगर आप मुनि श्रुतसागर होते तो आप क्या करले
42. रक्षाबंधन की घटना फिर से घटित हो उसमे
आपको बिष्णुकुमार बनाया जाए तो आप क्या करोगे
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है