आत्मानुभव भावश्रुत ज्ञान में होता है।वहां ज्ञान तो परोक्ष ही है किंतु जो आनंद आया वह प्रत्यक्ष है अतः उसको स्वानुभव प्रत्यक्ष कहते हैं।
वहां प्रदेश प्रत्यक्ष नहीं है किंतु आनंद प्रत्यक्ष है जैसे गूंगा मिश्री खावे ।
क्या आप यह पूछ रहे है कि स्वानुभूति से तो आत्मा की सिद्धि है किंतु अन्य किस किस प्रकार से आत्मा की सिद्धि होती है? परोक्ष एवं प्रत्यक्ष प्रमाण से सिद्धि।