आओ जिनमन्दिर में आओ : जिनमंदिर पर आधारित प्रश्न-पहेली, डॉ. बी.सी. जैन | Aao Jin Mandir Me Aao Paheli

डॉ. बी.सी. जैन द्वारा निर्देशित प्रश्न-पहेली ‘आओ जिनमन्दिर में आओ’ — जिनमंदिर से सम्बन्धित तथ्यों, वस्तुओं और प्रतीकों पर आधारित प्रश्न, नियमावली सहित। पूरा पाठ नीचे, मूल PDF (23 पृष्ठ) संलग्न।
Aao Jin Mandir Me Aao, a quiz/paheli on the Jain temple (Jinmandir): its symbols, objects and rituals, directed by Dr. B.C. Jain. Full text below; original 23-page PDF attached.


आओ जिनमन्दिर में
आओ …
निदेशक - डॉ.बी.सी. जैन

नियमावली
आपसे जिनमन्दिर से सम्बन्धित प्रश्न पूछे
जाएं गे।
आपको उन प्रश्नों का उत्तर जिनमं दिर से
सम्बन्धित तथ्यों एवं वस्तुओं के आधार पर ही
देना है।
प्रश्न 1
जिन मंदिर किसका प्रतीक है ?
प्रश्न 2
मंदिर शब्द का क्या अर्थ होता है ?
प्रश्न 3
मंदिर में मूलनायक कौन-से
परमेष्ठि होते हैं ?
प्रश्न 4
मंदिर में मूलनायक अरिहंत परमेष्ठि हैं- ऐसा
ज्ञान किन वस्तुओं को देखकर होता है ?
प्रश्न 5
तीनों लोक में जिनेन्द्र देव के शासन
की सूचक कौन-सी वस्तु है ?
प्रश्न 6
मुलनायक भगवान् का मुख कौन-सी दिशा
में होता है ?
प्रश्न 7
समवशरण में भव्य जीवों को अपने
अधिकतम सात भव कहां दिखाई देते हैं ?
प्रश्न 8
तीन लोक में कितने जिनमंदिर हैं ?
प्रश्न 9
मन्दिर में अन्य सर्व सांसारिक बातें नहीं
करने की प्रतिज्ञा हम क्या बोलकर लेते हैं ?
प्रश्न 10
रत्नत्रय की प्राप्ति की भावना से हम
मन्दिर जी में कौन-सा कार्य करते हैं ?
प्रश्न 11
जिनमंदिर में दिव्यध्वनि के प्रतीक
रूप क्या होता है ?
प्रश्न 12
भगवान् के साथ में लगी 1008 संख्या
किसका प्रतीक है ?

नियमावली
हम एक वाक्य बोलेंगे, आपको बताना है कि
उससे मिलती हुई क्या वस्तु मं दिर में होती है।
उदाहरण :प्रश्न- एक आत्मा होती है।
उत्तर- मन्दिर में एक मूलनायक भगवान् होते हैं।
प्रश्न 1
आठ कर्म होते हैं।
प्रश्न 2
64 ऋद्धियां होती हैं।
प्रश्न 3
तीन योग होते हैं।
प्रश्न 4
मुनिराज पाँच महाव्रतों का पालन
करते हैं।
प्रश्न 5
चौबीस परिगृह होते हैं।
प्रश्न 6
नव के वल लब्धियां होती हैं।

उत्तरमालिका
प्रथम चरण

  1. समवशरण 2. भवन 3. अरिहंत 4. अष्ट प्रातिहार्य 5. तीन छत्र 6.
    पूर्व/उत्तर 7. भामण्डल 8. असंख्यात 9. नि:सहि 10. तीन प्रदक्षिणा
  2. जिनवाणी 12. तीर्थंकर के शारीरिक शुभ लक्षण

द्वितीय चरण

  1. पूजन के अष्ट द्रव्य। 2. अरिहंत भगवान् पर देव 64 चंवर ढोरते हैं।
  2. तीन छत्र होते हैं। 4. पूजन के पाँच अंग होते हैं।
  3. चौबीस तीर्थंकर होते हैं। 6. नौ बार णमोकार महामंत्र जाप करते हैं।

जय जिनेन्द्र
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साभार - तपिश शास्त्री
विशेष सहयोग - समकित शास्त्री - 9057185893

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