आओ जाने ग्रंथों के मंगलाचरण
आओ जाने ग्रंथों के मंगलाचरण
इसमें आपको दो पंक्ति दी जाएगी, जिनको पहचान
कर ग्रंथ का नाम बताना है, किस ग्रंथ का मंगलाचरण
है।
तीन भुवन में सार, वीतराग विज्ञानता।
शिवस्वरूप शिवकार, नमहुँ त्रियोग सम्हारिकैं।।
छहढाला
तीन भुवन में सार, वीतराग विज्ञानता।।
शिवस्वरूप शिवकार, नमहुँ त्रियोग सम्हारिकैं।।
छहढाला
पहली ढाल
नमो अरहंताणं
नमो सिद्धाणं
नमो आइरियाणं
नमो उवज्झायाणं
नमो लोए सव्वसाहूंणं
षट्खण्डागम
तज्जयति परं ज्योतिः समं समस्तैरनन्तपर्यायैः।
दर्पणतल इव सकला, प्रतिफलति पदार्थमालिका यत्र।।
पुरुषार्थ सिद्धयुपाय
मंगलमय मंगलकरण, वीतराग–विज्ञान।
नमों ताहि जातें भये, अरहंतादि महान।।
मोक्षमार्ग प्रकाशक
एस सुरासुरमणुसिंदवंदिदं धोदघाइकम्ममलं |
पणमामि वद्धमाणं तित्थं धम्मस्स कत्तारं ||
प्रवचनसार
नमः श्रीवर्धमानाय निर्धूतकलिलात्मने |
सालोकानां त्रिलोकानां यद्द्विद्या दर्पणायते ||
रत्नकरण्ड श्रावकाचार
यस्य स्वयं स्वभावाप्तिरभावे कृत्स्नकर्मणः।
तस्मै संज्ञानरूपाय नमोस्तु परमात्मने।।
इष्टोपदेश
काव्य
वंदित्तु सव्वसिद्धे धुवमचलमणोवमं गदिं पत्ते।
वोच्छामि समयपाहुडमिणमो सुदकेवलीभणिदं।।
शीर्षक
समयसार
काव्य
जीवमजीवं दव्वं, जिणवरवसहेण जेण णिद्दिट्ठं।
देविंदविंदवंदं, वंदे तं सव्वदा सिरसा।।
मंगलाचरण
मोक्षमार्गस्य नेतारं, भेत्तारं कर्मभूभृतां।
ज्ञातारंविश्वतत्त्वानां, वन्दे तद्गुणलब्धये ।।
श्लोक
देवागम नभोयान चामरादि विभूतयः।
मायाविष्वपि दृश्यन्ते नातस्त्वमसि नो महान्।।
शीर्षक
आप्तमीमांसा / देवागम स्तोत्र
श्लोक
भक्तामर प्रणत मौलि मणि प्रभाणा।
मुद्योतकं दलित पाप तमो वितानम्।।
भक्तमर स्तोत्र
प्रमाणादर्थसंसिद्धिस्तदाभासाद्विपर्ययः ।
इति वक्ष्ये तयोर्लक्ष्म्,सिद्धमल्पं लघीयसः ।।
परीक्षासुख (आचार्य माणिक्यनन्दि)
काव्य
श्रीवर्धमानमर्हन्तं नत्वा बाल-प्रबुद्धये ।
विरच्यते मित-स्पष्ट-सन्दर्भ-न्यायदीपिका ।।
शीर्षक
न्यायदीपिका
काव्य
गुणानां विस्तरं वक्ष्ये, स्वभावानां तथैव च ।
पर्यायाणां विशेषेण, नत्वा वीरं जिनेश्वरम् ।।
आलाप पद्धति (आचार्य देवसेन)
जय जिनेन्द्र
मूल दस्तावेज़ (PDF): 158.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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