आओ हम सब मिलके गायेशब्दों से भजन बनाये
आओ हम सब मिलके गायेशब्दों से भजन बनाये
उदाहरण :-
प्रश्न:
जी
है
पा
की
बूं
जीवन है पानी की बूंद
प्रश्न - 1:-
ध
ध
आ
घ
कै
धन्य धन्य आज धड़ी कैसी
धन्य धन्य आज धड़ी कैसी सूखकर है।
सिद्धों का दरबार है ये सिद्धों का दरबार है।।
प्रश्न - 2:-
मु
आ
मे
कु
में
मुनिवर आज मेरी कुटिया में
मुनिवर आज मेरी कुटिया में आये हैं।
चलते फ़िरते… चलते फ़िरते सिद्ध प्रभु आये हैं।।
प्रश्न - 3:-
मं
ण
ह
प्रा
से
मंत्र णमोकार हमें प्राणो से
मंत्र णमोकार हमें प्राणो से प्यारा।
ये है वो जहाज जिसने लाखों को तारा।।
प्रश्न - 4:-
अ
सि
भ
आ
अशरीरी सिद्ध भगवान् आदर्श
अशरीरी सिद्ध भगवान्, आदर्श तुम्ही मेरे।
अविरुद्ध शुद्ध चिद्घन, उत्कर्ष तुम्हीं मेरे।।
प्रश्न - 5:-
प्र
अ
न
भ
प्रभुजी अब न भटकेंगे
प्रभुजी अब न भटकेंगे संसार में।
अब अपनी…हो…अब अपनी खबर हमें हो गई।।
प्रश्न - 6:-
नि
अ
अ
जि
के
निरखो अंग-अंग जिनवर के
निरखो अंग-अंग जिनवर के।
जिनसे झलके शान्ति अपार।।
प्रश्न - 7:-
ओं
वा
ते
ओंकारमयी वाणी तेरी
ओंकारमयी वाणी तेरी, जिनधर्म की शान है।
समवशरण देखके, शांत छवि देखके,
गणधर भी हैरान है।।
प्रश्न - 8:-
छो
छो
मु
हो
छोटे-छोटे मुनिवर, हो
छोटे-छोटे मुनिवर, हो गये निहाल।
निज परिणति का, देखो तो कमाल।।
प्रश्न - 9:-
मी
र
से
भ
मीठे रस से भरी
मीठे रस से भरी जिनवाणी लागे,
जिनवाणी लागे।
म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे।।
प्रश्न - 10:-
जि
क
त
उ
जिया कब तक उलझेगा
जिया कब तक उलझेगा संसार विकल्पों में।
कितने भव बीत चुके संकल्प-विकल्पों में।।
प्रश्न - 11:-
ध
ध
वी
वा
धन्य धन्य वीतराग वाणी
धन्य धन्य वीतराग वाणी,
अमर तेरी जग में कहानी।
चिदानंद की राजधानी,
अमर तेरी जग में कहानी।।
प्रश्न - 12:-
ऊं
ऊं
शि
वा
ऊंचे ऊंचे शिखरों वाला
ऊंचे ऊंचे शिखरों वाला है रे,
यह तीरथ हमारा।
तीरथ हमारा हमें लागे है प्यारा।।
प्रश्न - 13:-
मैं
ज्ञा
स्व
हूँ
मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूँ
मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूँ,
मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूँ।
मैं हूँ अपने में स्वयं पूर्ण,
पर की मुझ में कुछ गंध नहीं।
मैं अरस, अरूपी, अस्पर्शी,
पर से कुछ भी संबंध नहीं।।
प्रश्न - 14:-
अ
से
ग
भ
अमृत से गगरी भरो
अमृत से गगरी भरो,
कि न्हवन प्रभु आज करेंगे।
खुशी-खुशी मिल के चलो,
कि न्हवन प्रभु आज करेंगे।।
प्रश्न - 15:-
मं
ज
न
म
मंत्र जपो नवकार मनुवा
मंत्र जपो नवकार मनुवा,मंत्र जपो नवकार।
पंचप्रभु को वंदन करलो,परमेष्ठी सुखकार।।
प्रश्न - 16:-
भा
की
चु
ओ
भावना की चुनरी ओढ़
भावना की चुनरी ओढ़ के जिन मंदिर में आवाजो रे,
जिन मंदिर में आवाजो रे।।
प्रश्न - 17:-
आ
पं
म
श्री
आया पंचकल्याणक महान् श्री
आया पंचकल्याणक महान्,
श्री नेमि बनेंगे भगवान्,
आनंद रस झरता है।
प्रश्न - 18:-
नि
का
मा
ह
निर्ग्रथों का मार्ग हमको
निर्ग्रथों का मार्ग हमको प्राणों से भी प्यारा है।
दिगम्बर वेश न्यारा है…निर्ग्रथों का मार्गं।।
प्रश्न - 19:-
ति
ध्या
की
मू
तिहारे ध्यान की मूरत अजब छवि
तिहारे ध्यान की मूरत अजब छवि को दिखाती है।
विषय की वासना तज कर निजात्म लौ लगाती है।।
प्रश्न - 20:-
ती
भु
में
सा
वी
तीन भुवन में सार वीतराग विज्ञानता
तीन भुवन में सार वीतराग विज्ञानता।
शिव स्वरूप शिवकार नमहुं त्रियोग सम्हरिके।।
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