आज गिरिराज के शिखर सुन्दर सखी | aaj giriraj ke shikhar sundar sakhi

राग- पंचम

आज गिरिराज के शिखर सुन्दर सखी
होत है अतुल कौतुक महा मनहरन॥
नाभि के नंद को, जगत के चंद को,
लेगये इंद्र मिलि, जन्ममंगल करन॥ आज. ॥

हाथ-हाथन धरे, सुरन-कंचन घरे,
छीरसागर भरे, नीर निरमल बरन।
सहस अरु आठ गिन, एकही बार जिन,
सीस सुर ईशके, करन लागे ढरन॥ १ ॥ आज. ।।

नचत गीत सुरसुंदरी, रहस रससों भरी,
गीत गावैं अरी, देहि ताली करन।
देव-दुंदुभि बजेैं, वीन वंशी सजैं,
एकसी परत, आनंदघन की भरन॥२|| आज.||

इंद्र हर्षित हिये, नेत्र अंजुलि किए,
तृपति होत न पिये, रूप अमृत झरन।
दास ‘भूधर’ भनै, सुदिन देखे बनै,
कहि थके लोक लख, जीभ न सके वरन॥ ३ ॥ आज. ।॥

भूधर भजन सौरभ

1 Like