24 तीर्थंकरों के चिन्हों के नाम की सार्थकता | 24 Tirthankar Sign

आदिनाथजी का कहता बैल, छोड़ो चार गति की जेल,
अजितनाथजी का कहता हाथी, जग में कोई नहीं है साथी,
शंभवनाथजी का कहता घोड़ा ,जीवन है अपना यह थोड़ा,
अभिनंदनजी का कहता बंदर ,कितनी कषाय भरी है अंदर,
सुमतिनाथजी का कहता चकवा, धर्मात्मा का जग में है रुतवा,
पद्मप्रभजी का लाल कमल, कभी किसी से करो न छल,
सुपार्श्वनाथजी का कहता साथिया, काटो अब तुम अब कर्म घातिया,
चंद्रप्रभजी का कहता चंद्रमा, सच्ची है जिनवाणी माॅं,
पुष्पदंतजी का कहता मगर ,मोक्ष महल की चलो डगर,
शीतलनाथजी का कहता कल्पवृक्ष ,धर्म-कर्म में हो जा दक्ष,
श्रेयांसनाथजी का कहता गेंडा ,कभी चलो ना रास्ता टेढ़ा,
वासुपूज्य का कहता भैंसा, जैसी करनी फल हो वैसा,
विमलनाथजी का कहता सूकर, बुरे काम तू कभी न कर,
अनंतनाथजी का कहता सेही, अब तो हमें बनना है वैदेही,
धर्मनाथजी का कहता वज्रदण्ड ,कभी ना करना कोई घमंड,
शांतिनाथजी का कहता हिरण, सत्य धर्म की रहो शरण,
कुंथुनाथजी का कहता बकरा ,मोक्ष महल का पथ है सकरा,
अरनाथजी की कहती मीन ,रत्न कमा लो अब तुम तीन,
मल्लिनाथजी का कहता कलशा, बनाओ मन को निर्मल जल सा,
मुनिसुव्रतजी का कहता कछुआ ,धर्म से जीवन सफल हुआ,
नमिनाथजी का कहता कमल ,शुभ करनी का उत्तम फल,
नेमिनाथजी का कहता शंख,व्रती ,संयमी रहो निशंक,
पार्श्वनाथजी का कहता सर्प ,मिटाओ मन से सारे दर्प,
महावीरजी का कहता शेर, चलो मोक्षमार्ग में करो न देर |

साभार: सुकुमाल प्रश्न मंजरी भाग 1

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