जैन स्वतंत्रता सेनानी — भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के 20 अमर जैन शहीद | Jain Swatantrata Senani — Bharteey Swatantrata Sangram Ke 20 Amar Jain Shahid

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जैन समाज का योगदान अक्सर इतिहास की किताबों में अनदेखा रह जाता है। डॉ० कपूरचंद जैन एवं डॉ० (श्रीमती) ज्योति जैन द्वारा लिखित पुस्तक “स्वतंत्रता संग्राम में जैन” (प्रथम खण्ड) — जो मुख्यतः मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के जैन स्वतंत्रता सेनानियों पर केंद्रित है — इस गौरवशाली इतिहास को सामने लाती है। इस पुस्तक में 20 “अमर जैन शहीदों” के विस्तृत परिचय के साथ 350 से अधिक अन्य जैन स्वतंत्रता सेनानियों की सूची भी दी गई है।

यहाँ प्रस्तुत है इन 20 अमर जैन शहीदों का संक्षिप्त परिचय:

1. अमर शहीद लाला हुकुमचंद जैन (कानूनगो)

हांसी (हिसार, हरियाणा) में जन्मे हुकुमचंद जैन मुगल बादशाह बहादुरशाह ज़फर के दरबार में कानूनगो थे। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध सहायता का वचन दिया — यह पत्र अंग्रेजों के हाथ लग गया और 19 जनवरी 1858 को उन्हें व उनके साथी मिर्जा मुनीर बेग को हांसी में फांसी दे दी गई।

2. अमर शहीद फकीरचंद जैन

हुकुमचंद जैन के मात्र 13 वर्षीय भतीजे फकीरचंद को अदालत ने बरी कर दिया था, फिर भी अंग्रेजों ने उसे जबरन फांसी के तख्ते पर लटका दिया — 1857 के संग्राम की सबसे क्रूर घटनाओं में से एक।

3. अमर शहीद अमरचंद बांठिया

1857 के महासमर में जूझ रहे क्रांतिवीरों को आर्थिक सहायता देकर अमरचंद बांठिया ने मुक्ति-संघर्ष के इतिहास में अपना नाम अमर किया।

4. अमर शहीद मोतीचंद शाह

स्वतंत्रता संग्राम के मध्यकाल के शहीदों में से एक, जब देशसेवा के लिए सार्वजनिक रूप से बोलना भी बड़े जीवट का काम समझा जाता था।

5. अमर शहीद सिंघई प्रेमचंद जैन

दमोह (मध्य प्रदेश) जिले के ग्राम सेमरा बुजुर्ग में जन्मे प्रेमचंद जैन बचपन से ही उत्साही, निर्भीक और प्रतिभाशाली स्वतंत्रता सेनानी थे।

6. अमर शहीद वीर साताप्पा टोपण्णावर

कर्नाटक के छोटे से गाँव कड़वी शिवापुर में 1914 में जन्मे साताप्पा ने महज 16 वर्ष की आयु में 1930 के असहयोग आंदोलन से क्रांतिकारी यात्रा शुरू की और 1942 तक देश के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया।

7. अमर शहीद वीर उदयचंद जैन

1942 के ‘करो या मरो’ आंदोलन के दौरान अपनी शहादत देने वाले वीर सेनानी — 90 वर्षों के लंबे स्वतंत्रता संग्राम (1857-1947) के निर्णायक चरण के गवाह।

8. अमर शहीद साबूलाल जैन बैसाखिया

गढ़ाकोटा, जिला-सागर (मध्य प्रदेश) में 1923 में जन्मे साबूलाल ने अत्यल्प आयु में ही स्वतंत्रता की बलिवेदी पर अपनी कुर्बानी दे दी।

9. अमर शहीद कुमारी जयावती संघवी

अहमदाबाद (गुजरात) में 1924 में जन्मी जयावती 15 अप्रैल 1943 को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध निकले छात्र जुलूस में अपने जीवन का बलिदान देने वाली युवा सेनानी थीं।

10. अमर शहीद नाथालाल शाह (नत्थालाल शाह)

अहमदाबाद के निकट ग्राम रामपुरा में 1923 में जन्मे नाथालाल 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के शहीद बने।

11. अमर शहीद अण्णा पत्रावले

मात्र 17 वर्ष की आयु में अपनी परीक्षा की कॉपी में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांतिकारी संदेश लिखकर 1942 के आंदोलन में कूद पड़ने वाले युवा शहीद।

12. अमर शहीद मगनलाल ओसवाल

जावरा (मध्य प्रदेश) में 1906 में जन्मे मगनलाल की शहादत भारत के स्वतंत्रता संग्राम में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

13. अमर शहीद भूपाल अणस्कुरे

कोल्हापुर (महाराष्ट्र) के ठिकपुर्ली ग्राम में 1927 में जन्मे भूपाल भूमिगत क्रांतिकारियों को भोजन-दवा पहुँचाकर गुप्त रूप से क्रांति में सहयोग देते थे।

14. अमर शहीद कन्धीलाल जैन

1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन — जिसे गांधीजी की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकारिणी ने स्वीकृति दी थी — के दौरान अपनी शहादत देने वाले सेनानी।

15. अमर शहीद मुलायमचंद जैन

जबलपुर के लार्डगंज में छोटी सी कपड़े की दुकान चलाने वाले मुलायमचंद एक क्रांतिकारी के हमशक्ल होने के कारण शहादत को प्राप्त हुए।

16. अमर शहीद चौधरी भैयालाल

मुलायमचंद जैन के साथ जुड़ी घटनाओं में उल्लेखित एक और स्वतंत्रता सेनानी, जिनकी हार्दिक भावनायें सदैव आजादी के लिए हिलोरे लेती रहती थीं।

17. अमर शहीद चौथमल भण्डारी

3 जुलाई 1926 को ग्राम कायथा, जिला-उज्जैन (मध्य प्रदेश) में जन्मे चौथमल ने किशोरावस्था से ही आंदोलनों में भाग लिया और महिदपुर क्रांति में श्री विनायक राव व्यास के साथ सक्रिय भूमिका निभाई।

18. अमर शहीद भूपाल पंडित

पाँच बार जेलयात्रा करने वाले वीर हुतात्मा भूपाल पंडित ने अंत में स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

19. अमर शहीद भारमल

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के ग्राम मुरगुड में लगभग 1927 में जन्मे भारमल 6 दिसंबर 1942 को पुलिस की गोली से शहीद हुए।

20. अमर शहीद हरिश्चन्द्र दगडोबा जैन

महाराष्ट्र के परभणी जिले के मानवत कस्बे के हरिश्चन्द्र जैन ने हैदराबाद मुक्ति संग्राम में निज़ाम-राज से मुक्ति के लिए अपना बलिदान दिया।


पूर्ण अनुक्रमणिका

इन 20 अमर शहीदों के अतिरिक्त, पुस्तक में 350 से अधिक अन्य जैन स्वतंत्रता सेनानियों का परिचय (नाम-वर्णानुक्रम में, पृष्ठ संख्या सहित) भी संकलित है — जिनमें संविधान सभा के जैन सदस्य, आज़ाद हिन्द फौज की जैन सदस्याएँ, और राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान देने वाले जैन पत्र-पत्रिकाओं का उल्लेख भी शामिल है। पूरी सूची पुस्तक की मूल अनुक्रमणिका में उपलब्ध है।


स्रोत: स्वतंत्रता संग्राम में जैन (प्रथम खण्ड), लेखक: डॉ० कपूरचंद जैन एवं डॉ० (श्रीमती) ज्योति जैन।

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