1. यह ग्रन्थ अपूर्ण ही रह गया था
- यह ग्रन्थ अपूर्ण ही रह गया था
- इस ग्रंथ में 9 अधिकार हैं|
- यह ग्रन्थ मूलत: ढूंढारी भाषा में लिखा गया था, बाद में बहुत सी भाषायों में इसके अनुवाद हुये
- इस ग्रन्थ के लेखक को हाथी के पैर के नीचे कुचल वा दिया गया था
मोक्षमार्ग प्रकाशक
- इस ग्रंथ को दो आचार्यों ने लिखा था
- यह प्रथम शताब्दी में लिखा गया था
- इस ग्रंथ के लेखकों के गुरू आचार्य धरसेन थे
- इस ग्रंथ में 6 खण्ड हैं
- इस ग्रन्थ का मंगलाचरण णमोकार मंत्र है
षटखंडागम
- यह चरणानुयोग का बहुत ही प्रसिद्ध ग्रन्थ है
- इस ग्रन्थ में 8 अधिकार हैं
- इस ग्रन्थ के लेखक द्वारा अरहंत भगवान् की भी परीक्षा की गई है|
- इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य को भस्मक व्याधि रोग भी हो गया था
रत्नकरंड श्रावकाचार
- इस ग्रन्थ के लेखक का दुसरा ग्रन्थ समाधितन्त्र भी है
- इसमें कुल 51 श्लोक ही हैं|
- इस ग्रन्थ के अंत में जीव जुदा पुद्गल जुदा, यही तत्त्व का सार बताया गया है
- यह आचार्य पूज्यपाद स्वामि द्रारा रचित ग्रन्थ है|
इष्टोपदेश
- यह एक प्रथमानुयोग का ग्रन्थ है
- इस ग्रन्थ के तीन भाग है|
- यह आचार्य रविषेण द्वारा रचित है|
- इसमें वर्णित कथा मुनिसुव्रत नाथ तीर्थंकर के काल के किसी महापुरुष से सम्बन्धित है|
- इसकी कथा राम रावण के युद्ध पर आधारित है
पद्मपुराण
- इस ग्रन्थ में 96 छन्द हैं|
- इस ग्रन्थ में संसार से लेकर मोक्ष तक की यात्रा का वर्णन मिलता है
- इसको छोटा समयसार भी कहा जाता है|
- इसके रचयिता पं. दौलतराम जी हैं
छहढाला
- यह द्वितीय शताब्दी का ग्रन्थ है|
- यह संस्कृत भाषा का सर्वप्रथम ग्रन्थ है|
- इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य का नाम गृद्धपिच्छाचार्य भी था|
- यह ग्रन्थ सूत्रात्मक रूप में लिखा गया है|
- इस ग्रन्थ का दूसरा नाम मोक्ष शास्त्र भी है|
तत्वार्थसूत्र
- इस ग्रन्थ में जीव और अजीव द्वारा नाटक का मंचन किया गया है|
- इस ग्रन्थ में 10 अधिकार हैं
- इस ग्रन्थ में मुख्य रूप से एकत्व विभक्त आत्मा को चर्चा का विषय बनाया गया है|
- इस ग्रन्थ की टीका आचार्य जयसेन द्वारा भी की गई है
- इस ग्रन्थ में 415 गाथाएँ हैं
- इस ग्रन्थ के कुछ श्लोकों में अष्ट प्रातिहार्यों का वर्णन भी किया गया है|
- इस ग्रन्थ में आदिनाथ भगवान् की स्तुति को मुख्य आधार बनाया गया है|
- इस ग्रन्थ के रचयिता आचार्य ने जेल में बैठ कर इसकी रचना की थी|
- इस ग्रन्थ में 48 श्लोक हैं|
भक्तामर
- यह ग्रन्थ दो भागों में है|
- यह करणानुयोग का प्रसिद्ध ग्रन्थ है|
- यह ग्रन्थ राजा चामुण्डराय के निवेदन से लिखा गया था|
- इस ग्रन्थ पर पं. टोडरमल जी भाषा टीका भी लिखी है|
- यह ग्रन्थ आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती द्वारा रचित है|
गोम्मटसार
1.इस ग्रन्थ में एक काल द्रव्य को गौण करकर अन्य पांच द्रव्यों को चर्चा का मुख्य विषय बनाया गया है|
2. इस ग्रन्थ के रचयिता के पांच नाम प्रसिद्ध हैं
3. इस ग्रन्थ की टीका आचार्य अमृतचन्द देव द्वारा लिखी गई है|
4. इसमें 173 गाथायें है|
5. यह ग्रन्थ पंचपरमागमों में से एक ग्रन्थ है|
पंचास्तिकाय
- यह अमृतचन्द्र आचार्य का मूल ग्रन्थ है
- यह ग्रन्थ संस्कृत भाषा में तथा चरणानुयोग पर आधारित है
- इस ग्रन्थ में सम्यग्दर्शन ज्ञान चारित्र का वर्णन विस्तृत रुप से किया गया है|
- इस ग्रन्थ का हिंसा अहिंसा सम्बन्धि “आप्रादुर्भाव: खलु…” श्लोक बहुत प्रसिद्ध है|
पुरुषार्थसिद्धिउपाय
प्रूफरीडिंग बाकी है