चार गति के पार से

चार गति के पार से , सिद्धों का संदेश ये ।
चेतन आतम को ध्याना , परमातम पद पा जाना ।।
यह पर्याय सफल करना , सिद्ध शिला पर आ जाना ।।

जग में कोई नहीं तेरा , जैन धर्म ही है शरणा ।
शुभ मानव कुल को पाया , मंगल जैन धर्म पाया ।।
मोही जन भरमाएंगे , धन वैभव दिखलाएंगे ।
विषय भोग में मत फंसना , ज्ञानी की संगति करना ।।
यह पर्याय सफल करना, सिद्ध शिला पर आ जाना ।।

शुभ देव शास्त्र गुरु पाए , मुक्ति मार्ग जु दिखलाया ।
जिन भक्ति हृदय धरना , और तुम भेद ज्ञान करना ।।
मोह तुम्हे बहलाएगा , सुख बाहर दिखलायेगा ।
चेतन शक्ति नहीं खोना , मोह अंधेरा क्षय करना ।।
यह पर्याय सफल करना, सिद्ध शिला पर आ जाना ।।

जग ये जाल घनेरा है , चारों ओर अंधेरा है ।
कुछ भी समझ नहीं आता , कोई मार्ग न बतलाता ।।
जिनवाणी बतलाती है , सब स्वार्थ के साथी है ।
ज्ञान सूर्य तेरे अन्दर , तू मुक्ति पथ पर चलना ।।
यह पर्याय सफल करना , सिद्ध शिला पर आ जाना ।।

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