दस लक्षण का उत्तम मार्दव धर्म — मान-अभिमान के त्याग की परिभाषा, दशलक्षण पूजन पद, सरल अर्थ और प्रसंग (राजा रावण का मान, उत्तम पर्याय से चांडाल तक का दृष्टान्त)। मृदुता व विनय सिखाने वाली सामग्री।
Uttam Mardav of Das Lakshan — the dharma of humility over pride/ego: definition, pujan verse, simple meaning and prasang. Das lakshan dharma content on maan and mardav for children.
डाउनलोड / Download PDF: 02-uttam-mardav.pdf
दस लक्षण का उत्तम मार्दव धर्म
परिभाषा
मार्दव स्वभावी आत्मा के आश्रय से आत्मा में जो मान के अभावरूप शान्ति स्वरुप पर्याय प्रकट होती है, उसे भी मार्दव कहते हैं।
मृदुता-कोमलता का नाम मार्दव है।
मान किसे कहते हैं ?
घमण्ड को मान कहते हैं।
कुल, जाति, रूप, ज्ञान, धन, बल, तप और प्रभुता - यह आठ मान के भेद हैं।
मान क्यों होता है ?
- जब जीव ऐसा मानते है कि शरीर, पैसा, घर-संपति आदि मेरे है, मैं इनका मालिक हूँ, तब व्यक्ति को मान होता है।
- जब जीव दूसरों को खुद से नीचा दिखाना चाहता हो और स्वयं को उनसे श्रेष्ठ समझता हो।
मान के नुकसान
- घमण्डी व्यक्ति की सभी निंदा करते हैं।
- घमण्डी व्यक्ति को कोई मित्र नहीं बनाना चाहता है।
- घमण्ड के कारण जीव के अच्छे गुण भी ढक जाते है।
उत्तम मार्दव धर्म — पूजन पद (द्यानतराय जी द्वारा रचित दशलक्षण धर्म पूजन)
मान महा विषरूप, करहि नीच-गति जगत् में।
कोमल-सुधा अनूप, सुख पावे प्रानी सदा।।
उत्तम-मार्दव-गुन मन माना, मान करन को कौन ठिकाना।
बस्यो निगोद माहिं तैं आया, दमड़ी-रूकन भाग बिकाय।।
रूकन बिकाया भाग वशतें, देव इकइंद्री भया।
उत्तम मुआ चांडाल हूवा, भूप कीड़ों में गया।।
जीतव्य जोवन धन गुमान, कहा करे जल-बुदबुदा।
करि विनय बहु-गुन बड़े जन की, ज्ञान का पावें उदा।।
सरल अर्थ
मान (अहंकार) हलाहल विष के समान है। यह मान, नीच गतियों को करने वाला है अर्थात् मान के कारण खोटी गतियों में जाना पड़ता है। मार्दव (कोमलता) रुपी अमृत को धारण करने वाला जीव हमेशा सुख पाता है। उत्तम मार्दव को गुण (स्वाभाविक धर्म) मन से माना जाता है और मान करने वाले का कौन-सा ठिकाना है? क्योंकि अनादिकाल से निगोद में रहा, वहाँ से आकर वनस्पति काय का जीव हुआ तो दमड़ी (दमड़ी) रूकन (मुद्रा की सबसे छोटी इकाई) के भाव बिका और कभी-कभी बिना मूल्य के ही बिका। तीव्र पुण्य के उदय से देव हुआ और वहाँ से चलकर फिर एक इंद्रिय हुआ। उत्तम पर्याय के बाद चंडाल हो गया और राजा भी कीड़ों में उत्पन्न हुआ। हे जीव! जीवन, यौवन और धन-दौलत का क्या घमंड करना! ये सब जल के बुलबुले के समान क्षणभर में नष्ट होने वाले हैं। जो बहुत गुणवान हैं, बड़े हैं; उन महापुरुषों की विनय करनी चाहिए, जिससे ज्ञान प्राप्त होता है।
उदाहरण
- उत्तम मार्दव धर्म में प्रसिद्ध — भरत चक्रवर्ती
- मान के कारण दुर्गति को प्राप्त — राजा रावण
काव्य
मार्दव मेरा धर्म है।
मानी को न शर्म है।।
मान कषाय ना करना है।
कोमलता को धरना है।।
मान से रावण नरक गया।
मार्दवी भरत को मोक्ष हुआ।।
— समकित शास्त्री
मार्दव का anti-virus हमें अभिमान नामक खतरनाक virus से बचाता है।
कहानी
अब्राहम लिंकन एक बार अपने गांव के नजदीक एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। भाषण के बीच एक महिला खड़ी होकर बोली- अरे, यह राष्ट्रपति है! यह तो हमारे गाँव के मोची का लड़का है।
अपने प्रति ये अपमान जनक शब्द सुनकर लिंकन ने बड़े ही विनम्र शब्दों में उस महिला से कहा- मैडम! आपने बहुत अच्छा किया, जो उपस्थित जनता से मेरा यथार्थ परिचय करा दिया। मैं वही मोची का बेटा हूँ। क्या मैं आपसे एक बात पूछ सकता हूँ?
अवश्य, उस महिला ने कहा।
लिंकन ने पूछा क्या आप यह बताने का कष्ट करेंगी कि मेरे पिताजी ने आपके जूते आदि तो ठीक से मरम्मत किये थे न? आपको उनके कार्य में कोई शिकायत तो नहीं मिली।
उस महिला ने सफाई देते हुए कहा- नहीं-नहीं! उनके कार्य में कोई शिकायत नहीं मिली। वे अपना काम बड़ी अच्छी तरह करते थे।
तब लिंकन ने उत्तर दिया- मैडम! जिस प्रकार मेरे मोची पिता ने अपने कार्य में आपको कोई शिकायत का मौका नहीं दिया, उसीप्रकार मैं भी आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि आपने मुझे राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने का जो मौका दिया है, उसे मैं बड़ी ही कुशलता से करूँगा और यह मेरी कोशिश रहेगी कि मेरे काम में आपको कोई शिकायत का मौका न मिले।
*स्रोत: जैन पाठशाला जयपुर (निदेशक - डॉ. बी.सी. जैन) · विशेष सहयोग - समकित शास्त्री
प्रूफरीडिंग बाकी है