What should be the order of reading Anuyog?


#1

What should be the order of reading anuyog? Please specify the reason and shastra name. Also, what should a beginner and a person who know the basics read?


#2

1, Parthamanuyog ; Says about stories to learn from. Interesting and eye catching for the beginners.
eg : Harivanshpuran, Padmapuran
2. Charnanuyog : Talks and preaches about the conduct one should follow whether muni or Shravak.
eg : Ratnakaran Shravakachar, Mulachar and many more.
3. Karnanuyog : The geography and mathematics part. These have some mind boggling concepts which may take months, years to understand completely.
eg : Gommatsaar (Karmakand and Jeevkand), shatkandagam
4. Dravanuyog : Mein aatma hu. the 6 Dravya and most importantly Jeev Dravya.
eg : Samaysaar, Pravachansaar and the rest major three written by Acharya shree Kund Kund dev.

Now coming to reading part it depends on your interests :
My answer would be go first with Charnanuyog, it makes you realize the essence of Jainism importance and gives you primary guidelines.
Then go with Prathmanuyog which have good stories to hear and learn from, helps develop stronger faith in yourself and what you are following.
Then opt for Dravyanuyog only after intense desire to study and knowing it has been developed.
Lastly go with Karnanuyog as it requires lot of patience to understand each and every concept.

I would even say read Vitraag Vigyaan bhaag 2 and 3 in every detail possible because it has some basics of Karnanuyog, Dweep, Parvat, Kshetra, narak ,swarg etc.
Once you get things moving then you can switch to any anuyog you desire to read.


#3

अनुयोगो का अभ्यास क्रम by पं. प्रवर टोडरमल जी (Pg - 304, 8th Chapter)


#4

अपने क्षयोपशम और रुचि के अनुसार अध्ययन शुरू करना करना चाहिए। यदि क्षयोपशम कम हो तो प्रथमानुयोग व द्रव्यानुयोग का अध्ययन करना चाहिए। यदि क्षयोपशम अच्छा हो तो करणानुयोग का अध्ययन करना चाहिए।
यदि मात्र द्रव्यानुयोग का ही अध्ययन हो तो स्वच्छन्दी होने का भय रहता है इसलिए बिना चरणानुयोग के द्रव्यानुयोग शोभा नही देता।
करणानुयोग का ही मात्र ज्ञान किया तो तो वह भी कोई कार्य कारी नही है, क्योंकि संख्या,भूगोल ,गणित,कर्म आदि को पढ़ने का उद्देश्य कर्मादि से छूटने का है। इसलिए बिना द्रव्यानुयोग के करणानुयोग शोभा नही देता।
कुल मिलाकार चारों का ही balance होना चाहिए। प्रथमानुयोग का और करणानुयोग का विशेष ज्ञान न भी हो तो कोई दिक्कत नही है।
लेकिन मूलभूत आत्मतत्व में स्थित होने के लिए द्रव्यानुयोग और उसमें स्थिर रहने के लिए चरणानुयोग का ज्ञान व श्रद्धान आवश्यक है।
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और इन सभी का स्वाध्याय करने के लिए एक विषय बहुत ही अधिक आवश्यक/अनिवार्य है वह है नय। जब तक इनका ज्ञान नही होगा तब तक सभी अनुयोग एक दूसरे के विरोधी लगेंगे।
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फिर भी…!!!
कहाँ से शुरू करें???
बालबोध आदि, छ्ह ढाला, कर्मबद्धपर्याय, श्रावकाचार ।(इन सभी के पूर्व सामान्य नय का ज्ञान होना ही चाहिए)
समयसार तक पहुँचने के लिए प्रवचनसार और पंचास्तिकाय से गुजरना होगा😅।


#5

Can I know where can I get these books online?


#6

You can read books in JinSwara Google Drive shared folder here: https://drive.google.com/open?id=1C7GUmA86rghzF9_SqFIjRXN5AcJLyYvt

We have made separate folders anuyog-wise.

For more books, You can visit the following sites too:
-http://www.atmadharma.com/
-http://www.vitragvani.com/
-http://ptst.in/snatak/suchipatra_pdf_books.php


#7

I can’t access Google drive Link. Can you check once?


#8

It’s working pretty well. @divyangashah you should try it again.


#9

आपके विचारों से जिनवाणी के अध्ययन को सहज-सुगम कराने के अभिप्राय से जनित अनुयोग-क्रम से संतुष्ट होने पर भी… थोड़ा आगम के समीप एक अन्य प्रस्तुतिकरण।

Caution - द्रव्यानुयोग को मात्र अध्यात्म ही न समझें और वह जितना सरल है उतना ही वृहद-विशद भी - प्रमाण-नय-निक्षेप-निर्देशादि-सदादि-ज्ञानावस्थाएँ-अनेकान्त-स्याद्वाद-निमित्तोपादान-षट्कारक-षड्द्रव्य-पंचास्तिकाय-नवपदार्थ-सप्ततत्त्व इत्यादि।

टोडरमलजी ने मात्र पृ. 304 पर ही इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया है किन्तु अन्य प्रस्तुतिकरणों से भी दिया है। जो कि टोडरमलजी ने 8वे अध्याय को समझाते समय 8-10 बार अनेक स्थानों पर भी करके दिखाया है - प्रथमानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग, द्रव्यानुयोग।
ये प्रस्तुतिकरण मोक्षमार्ग-जैनधर्म-जीवनशैली-प्रेरणादायकता आदि से बहुत सटीक बैठता है। (मेरे हिसाब से टोडरमलजी का विचार)

दूसरा इससे बिल्कुल उलट - द्रव्यानुयोग, चरणानुयोग, करणानुयोग और प्रथमानुयोग।
ये प्रस्तुतिकरण आगम-जैनदर्शन-शास्त्रीयाध्ययन-बौद्धिकसटीकता आदि से भी सटीक बैठता है। (मेरा विचार)