कृपया संख्या की जानकारी दीजिये

कृपया संख्या की जानकारी दीजिये

  1. भव्य-
  2. अभव्य-
  3. दुरानुदुर्भावय-
  4. इतर निगोद-
  5. नित्य निगोद-

दुरानुदुर भव्य के विषय मे विशेष जानकारी दीजिये।

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अभव्य - मोक्षगमन योग्यता रहित

अभव्य-सम भव्य - मोक्षगमन योग्यता सहित किन्तु त्रिकाल में मोक्ष-प्राप्ति-अयोग्य (नित्य-निगोद को प्राप्त)

दूर भव्य - मोक्षगमन योग्यता सहित एवं दूर भविष्य में मोक्ष-प्राप्ति-योग्य

आसन्न भव्य - मोक्षगमन योग्यता सहित एवं निकट भविष्य में मोक्ष-प्राप्ति-योग्य

भव्य - संख्यात, असंख्यात, अनन्त काल में सिद्ध होने वाले एवं कभी सिद्ध न होने वाले भी हैं।

ग्रन्थाधर - कषाय-पहुड़, गोम्मटसार जीवकाण्ड, प्रवचनसार, धवला-2, तत्त्वार्थ राजवर्तिक

#राशी - अभव्य अनन्त, उससे सिद्ध अनन्त, उससे संसारी (भव्य) अनन्त हैं।

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क्या दुरानुदुर भव्य मात्र नित्य निगोद में ही पाए जाते है?

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अभव्यसम भव्य जीव का लक्षण
क.पा./२/२,२२/४२६/१९५/११ अभव्वेसु अभव्वसमाणभव्वेसु च णिच्चणिगोदभावमुवगएसु …। = जो अभव्य है या अभव्यों के समान नित्य निगोद को प्राप्त हुए भव्य हैं।
गो.जो./भाषा/७०४/११४४/३ जे त्रिकाल विषै मुक्त होने के नाहीं केवल मुक्त होने की योग्यता ही कौं धरें हैं ते अभव्य-सम भव्य हैं।

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इसका अर्थ हर 6 महीने 8 समय मे निकलने वाले जीव भव्य होंगे या अभव्य दुरानुदुर भव्य नित्यनिगोद में ही रहेंगे is it right?

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थोड़ा सम्पादित किया है!

ये प्रस्तुतिकरण छु. जिनेन्द्रजी वर्णी का है। मैं भी बहुत समय से विचार कर ही रहा हूँ।

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मैं सोचता हूँ की दोनों हो सकते हैं , क्योंकि अभव्य को तो चार लब्धि भी बताई हैं और नित्य निगोद से बहार निकलने पर ही संभव हैं।

यहां पर प्रश्न दुरानुदुर भव्य का है क्या वे नित्य निगोद से बाहर निकलते है या नही

ok, thanks