ज़्यादा बोलना सरल या मुश्क़िल?


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एक धातु अनेक अर्थों को लिए हुए होती है। उन अर्थों में से कुछ विभक्तियों/लकारों या प्रत्यययों के माध्यम से शब्द के अनेक रूप होते हैं। उन शब्दों से बना वाक्य अनेकों अभिप्रायों को लिए हुए होता है। और उन अभिप्रायों में से किसी एक अभिप्राय को मुख्य करके अनुच्छेदों के माध्यम से प्रत्येक वाक्य पल्लवित किया जाता है।

अब विचारिये कि एक वस्तु की योग्यताएं कितनी हैं जो उन धातुओं से बने शब्दों से बताया जाता रहा है। और फिर भी हम फर्राटे से सोचते या बोलते ही जाते हैं।