Petrol से vehicle

Petrol से vehicle नही चलती । इस principle को समझाएँ।

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Keval petrol se vehicle nahi chalti. Chalane vaala bhi chahiye. Vehicle bhi sahi honi chahiye

Petrol से vehicle नहीं चलती , क्योकि दोनो के बीच में अन्योन्याभाव है।

पेट्रोल से गाड़ी नहीं चलती और पेट्रोल के बिना भी गाड़ी नहीं चलती
शास्त्र भाषा : निमित्त से कार्य नहीं होता, और निमित्त के बिना भी कार्य नहीं होता
सामान्य भाषा : यदि पेट्रोल से गाड़ी चलती हो तो एक गाड़ी जिसका इंजन खराब है उसमें जब पेट्रोल डालो तो वो चलना चाहिए, परंतु ऐसा देखने में नहीं आता। यदि पेट्रोल के बिना भी गाड़ी चलती हो तो पेट्रोल बिना डाले गाड़ी चलाके दिखाओ ― तो ऐसा भी देखने में नहीं आता।
एक कार्य के होने में अनेकों निमित्त कारण उपलब्ध होते हैं परंतु वो मात्र ‘निमित्त’ कारण हैं, उपादान कारण तो उस वस्तु की तत समय की योग्यता ही है। अर्थात गाड़ी, गाड़ी के कारण ही चलती है, पेट्रोल के कारण नहीं। पर जब जब भी तत समय की योग्यता से चलती हुई गाड़ी नज़र आएगी तो उसको चलाने में निमित्तरूप पेट्रोल भी अवश्य नज़र आएगा।

उसी तरह जब पेट्रोल गाड़ी में डालते हैं और गाड़ी चलाते हैं तो गाड़ी को तो उस समय चलना ही था, बाकी पेट्रोल, चलाने वाला, यह सब लग तो रहा है की निमित्त की दृष्टि से चाहिए लेकिन वास्तव में क्रमबद्ध पर्याय से, पर्याय का योग्ताय रूप से द्रव्य में विद्यमान रहना, और एक द्रव्य दूसरे द्रव्य का कुछ नहीं करता, इस प्रिंसिपल से यह सिद्ध होता है कि गाड़ी का चलना अपने आप में स्वतंत्र है। गाड़ी के प्रत्येक परमाणुओं में यह जानकारी पहले से ही विद्यमान थी कि उस समय पर उनको चलना है।
(यह मेरी क्रमबद्ध पर्याय कॉन्सेप्ट की अंडरस्टैंडिंग है। हो सकता है कि मैं गलत हूं।)

A video for reference:


The explaination used in video is the major difference in interpretation of shastras by Digamber sects.

Some believe, nimmit does influence.

While others believe that nimmit is just present or ‘appears’ to be influencing but does not actually influence.Nimmit is just present and only Upadan is essential.

There should be debate on this. Because this interpretation totally changes the view to study Jainism.

See this 2 minute video.

Also, electromagnet when brought above iron scrap, those iron particles fly up in air and stick to magnet. More particles stick to place where strength is high. Everytime, you repeat, same observation. Now, everytime, you say, it was upadaan of iron scrap particle that they fly up and magnet was merely present.
Strength of electric current is increased, magnetism is increased and more particles get attracted. You still say, nimmit was just present.

Why everytime, particle behaves according to nimmit brought brought before it ?


How do you define upadan ?

  1. ‘capacity / ability’ to do a thing which is merely ability which takes सहारा of nimmit to do a work. Nimmit here is not merely present , but also influences the thing to exude / manifest its upadan / potential.


  1. The act which a parmanu has to do at a particular period of time (kram baddh).

Also, in video, it is said that same teacher (nimmit) teaches , but all results are different, so it is only upadan of child that is responsible when a child learns something.

But, if you think that there are 2 different schools where a subject teacher(nimmit) is very good in one school but bad in other school. All students work hard (upadan). But, when board copies are sent for checking outside, good teacher students perform better. What made the difference and that too in that subject only ? Did nimmit (subject teacher) not play any role ?
Or, if it was upadaan only that all students in one school were bad in studies and that too in one particular subject. Also, why students complain that they faced problems in one subject because the teacher could not explain good. Where did their upadan went which played role in other subjects without influence of nimmit ?

So, this topic requires a lot of debate.

आपका वीडियो में कथन प्रत्यक्ष से बाधित है that nimmit does nothing and is merely present ।

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I am sure you might have already seen this post as it answers most of your Questions.

@Abhay ji, Before moving to your questions, please provide your views or define the terms upadaan and nimitt as per your understanding, so that we can move forward for a healthy and fruitful discussion.


I think that this 2 minute video explains about upadan & nimmit.

You can compare this video with the above video of car and petrol.

According to me, ‘Upadan’ is potential to do a thing. Means a weak child has less potential to become IAS and a brilliant child has more potential to become IAS.

Now, nimmit is a teacher / notes. Suppose a weak child gets a good teacher and well prepared notes to study. And a good student gets a bad teacher with haphazard notes. So, the chances of weak student cracking IAS is increased and that of good student is slightly decreased with reference to potential (upadan).

So, here, a thing is affecting other thing.

Teacher / notes affect other dravya (jeev dravya/student)

Upadan matters, no doubt, but nimmit also has its influence.

But, the video of car and petrol says that car moves by upadan only and petrol was merely present.
Consumption of petrol was also independent of moving car although it appears to be consumed.

I think that this post is not relevant to the current topic - "One dravya cannot affect another. "

क्या लोक व्यवहार और प्रत्यक्ष प्रमाण के विरुद्ध यह कॉन्सेप्ट नहीं है कि एक द्रव्य दूसरे द्रव्य का कुछ भी नहीं करता ?

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We cannot give ‘nimmita’ too much power other wise Siddha bhagwan will have kashay and there is no more liberation!! …because karmaan varganaye are everywhere…but because Siddha bhagwan has completely destroyed mohniya, there karmaaan varganaye does not have any power…this proves the necessity of ‘upadan’, that to ‘shanik upadan’ to be specific…for example, water starts boiling after applying heat for 10 mins…if you give heat all the power…then if I replace water with rock…rock should turn to lava and start boiling after 10 mins…which is not the case…‘upadaan-nimmitaa’ is a delicate balance brilliantly explained by Jainism and is the true nature of universe…

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Suppose a mobile camera captures a photo of a mirror reflection. When we show that photo to other person, he gets to know of that content of photo by his own क्षायोपशम and that mobile gallery photo is merely a nimmit. The photo in gallery is stored in what form ? It should not be actual photo because one dravya cannot affect other. So, mobile cannot store actual photo. Our own क्षायोपशम creates that photo in mind at the same time when mobile gallery is brought before us.

By this logic, video cameras cannot record anything. We all hear same video lectures by our own क्षायोपशम when a file is played ?

Is this concept of independence of dravya from adhyatmic drashti or from siddhantik point of view also ??

एक कार्य अनेक कारण
उदा. - गाड़ी का चलना तो कार्य है और
कारण - A. चलने में बाह्य सहायक ईंधन, चालक, इत्यादि एवं ऊपरी सहायक धर्म द्रव्य, रोड़ इत्यादि
B. गाड़ी का इंजन, चक्के, अन्य योग्यताएँ इत्यादि पुद्गल द्रव्य एवं उसके स्कन्ध
A. निमित्त कारण
B. उपादान कारण

अब 2 परिस्थितियाँ देखिए -

  1. गाड़ी बिल्कुल योग्य अवस्था में है और किसी एक बाह्य साधन की कमी है। जैसे - ईंधन या चालक नहीं है; तो बाह्य साधन ही जुटाने होंगे। [यहाँ, यह कहा जायेगा कि ईंधन नहीं होगा तो गाड़ी कैसे चलेगी]

  2. गाड़ी में कुछ अयोग्यताएँ हैं और हमने बाह्य साधन सही-सही जुटा लिए हैं। तो गाड़ी ही ठीक करनी/करानी होगी। [ यहाँ, यह कहा जायेगा कि यदि गाड़ी ही ठीक नहीं होगी तो ईंधन क्या करलेगा?]

अब, यदि कोई साधन जुटाना है या गाड़ी ठीक करनी है तब कार्य बदल जायेगा तो उसके कारण भी बदल जाएंगे।

उपर्युक्त परिस्थितियों में 1. तो निमित्त प्रधान है और दूसरी उपादान प्रधान है।

जब दोनों दृष्टियों को मिला कर प्रमाण से बात करें तो दोनों ही आवश्यक है।

किन्तु विचारिए यदि आपकी गाड़ी चल नहीं रही है [अर्थात् कार्य नहीं हो रहा है] तो,
उपादान प्रधान जीव अपनी गाड़ी को चेक करेंगे, उसका अनुरक्षण करेंगे, गाड़ी में हुई कमी को कोसेंगे, प्रकृत गाड़ी में डले ईंधन की जाँच करेंगे।
निमित्त प्रधान जीव ईंधन, अन्य चालक, रोड़, सरकार आदि पर विचार करता रहेगा।

इसलिए ईंधन से गाड़ी चलती भी है और नहीं भी लेकिन ईंधन पर दृष्टि रखनेवाले और गाड़ी पर दृष्टि रखने वाले के फ़र्क को समझाने के लिए यह कहा जाता है कि अपना लोटा छानो अर्थात् गाड़ी कुशलक्षेम पर दृष्टि रखो।

अब ज़रा “एक द्रव्य दूसरे द्रव्य का कुछ कर सकता है या नहीं” पर विचार कर लें।

जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि एक कार्य में अनेक कारण होते हैं।
उपादान कारण - वह द्रव्य स्वयं
निमित्त कारण - अन्य द्रव्य

अब यदि कार्य पर दृष्टि रखेंगे तो अपने साथ-साथ बाकी सब भी चाहिए। निमित्त पर दृष्टि रखेंगे तो अपने अलावा सब पर काम करेंगे। उपादान पर दृष्टि रखेंगे तो अपने पर काम करेंगे।

मोक्षरूपी कार्य में तो अनेक कारण हैं। जैसे - भव्य जीव, काल-लब्धि, पुरुषार्थ, नियति एवं कर्मों का क्षय, गुरु का उपदेश, आगम का ज्ञान, आदर्श उदाहरण स्वरूप देव इत्यादि निमित्त। अब, यदि कार्य की दृष्टि से देखें तो आपको सभी आवश्यक प्रतीत होंगे; किन्तु जब निमित्त की दृष्टि से देखें तो गुरु का चुनाव, सच्चे देव की पहचान, शास्त्रों में सही-गलत की खोज इत्यादि और जब उपादान की दृष्टि से देखें तो आत्मा का श्रद्धान सम्यग्दर्शन, आत्मा का ज्ञान सम्यग्ज्ञान और आत्मा में चरण सम्यक्चारित्र, यही मोक्षमार्ग और यही मोक्ष। और तो और गहराई से विचार करें तो यही पैमाना है देव-गुरु-शास्त्र की प्रामाणिकता का भी।

इसलिए, एक द्रव्य दूसरे द्रव्य का कुछ नहीं कर सकता - यह उपादान परक प्रस्तुतिकरण के साथ-साथ सबसे बड़ा MOTIVATION भी है।

क्यूँ पर में सुख खोज रहा है, बनता क्यों दीवाना रे।
आत्म ही सुख धाम है प्यारे इसको भूल न जाना रे।।
नहीं चलेगा कोई बहाना, ढूँढ ले ठिकाना चेतन, ढूँढ ले ठिकाना…

{नोट - विषय के प्रस्तुतिकरण में कोई स्खलन हुआ हो तो कृपया सुधारें किन्तु अभिप्राय जाने बिना नहीं, भाव भासना किए बिना नहीं।}


I wanted to ask -

If it is true from both aspects and is a universal truth, then in a mobile phone :camera:,

It cannot be actual photo as mobile has no क्षायोपशम ।

You’re questioning a form not an event. Without an event it’s reasons cannot be analyzed.

Please use the above format to analyse the event.

जिनागम में आध्यात्मिक एवं सैद्धान्तिक विषयों में आत्म-पदार्थ की मुख्यता है। चलित दूरभाष यन्त्र के सम्बन्ध में उठी जिज्ञासा में आत्मपदार्थ न होने से आध्यात्मिक विचार अशक्य है।

साथ ही कारण-कार्य मीमांसा न केवल सैद्धान्तिक, बल्कि आध्यात्मिक, न्यायिक, पारम्परिक, व्यावहारिक एवं सामाजिक है।


Nimitt Upadan and their relationship is very well explained in this book. I highly recommend reading this one.

This is a dialogue between Nimitt and Upadan put down as a series of verses and then detailed lectures on it.