Jain Lullaby । जैन लोरी

ओ मेरी बिटिया रानी, तू बनना पूज्य आर्यिका जी
नारी के भव को हरना नरभव पा मुक्ति वरना।।

यदि कोई करे प्रशंसा सुनकर प्रसन्न नहीं होना
जग निंदा भी यदि कोई करता, तो सुनकर दुखित न होना
प्रशंसनीय निज ज्ञायक को लखकर प्रसन्न ही रहना।।1।।

श्री देव शास्त्र गुरुवर जी सर्वोत्कृष्ट है जग में
उनकी सम्यक श्रद्धा कर, लखना निज ज्ञायक निज में
निर्मल समकित प्रगटाना, संयम की भावना भाना।।2।।

जो भाव शील से सजते, सच्ची प्रभावना करते
प्राण अर अर्पण करके भी, निज शील की रक्षा करते
तुम भी नव बाड़ो से सज, निज शील की रक्षा करना।।3।।

ये भोग महा दुखदायी , इन माँहि नही तू फँसना
तू ब्रह्म स्वरुप को लखकर, ब्रह्मचर्य व्रत तुम धरना
निज श्वेत साड़ी धारण कर बन आर्यिका वन को जाना।।4।।

कर्मोदय से नही डरना, अंतर में ज्ञायक लखना
उपसर्गों की चिंता में भी,आराधना न तजना।
समता का भाव धरकर उपसर्ग विजयी ही होना।।5।।

एक दिवस आर्यिका बनकर, आतम वन माँहि ध्याना
सल्लेखना पूर्वक तन तजकर, फिर सुखपदवी को पाना
फिर नरभव पा मुनिव्रत धर, शुद्धातम ध्यान लगाना।।6।।

फिर क्षपक श्रेणी को चढ़कर अरहंत दशा प्रगटाना
फिर अंतिम ध्यान लगाकर शाश्वत पदवी को पाना
फिर काल अनंतानंत आनन्दित ही बस रहना।।7।।

Singer - @Atmarthy_Ayushi_Jain

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